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1/06/2021

भौतिक वितरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, महत्व

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भौतिक वितरण का अर्थ (bhautik vitran ka arth)

bhautik vitran arth paribhasha visheshtaye mahatva kshetra;भौतिक वितरण से आशय सही समय पर, सही स्‍थान पर एवं सही मात्रा  में वस्‍तुओं को पहुंचाने से है। वस्‍तुओं का उत्‍पादन /निर्माण होने के बाद  तब एक निर्माता /उतपादक वितरण के माध्‍यम का चयन कर लेता है, एवं विक्रेता की नियुक्ति कर लेता है तो उनके सामने यह समस्‍या आती है कि इस प्रकार आदेशित माल कम से कम समय में निर्धारित स्‍थान पर एवं कम से कम यातायात लागत पर भेजा जाए। इसी क्रिया को विपणन प्रबन्‍ध में भौतिक वितरण प्रबन्‍ध कहते है।भौतिक विचतरण को विद्वानों ने सामगियों की उठाया-धारी, परिवहन, भण्‍डारण, पैकेजिंग, इन्‍वेन्‍ट्री प्रबन्‍ध आदि से सम्‍बन्धित कि‍या है।

भौतिक वितरण की परिभाषा (bhautik vitran ki paribhasha)

स्‍टेण्‍टन के अनुसार,'' वस्‍तुओं के भौतिक प्रवाह प्रबन्‍ध और प्रभाव प्रणाली की स्‍थापना एवं संचालन भौतिक वितरण है।''

कण्डिफ एवं स्टिल के अनुसार,'' वस्‍तुओं के उत्‍पादन के बाद किन्‍तु उपभोग से पहले उसका वास्‍ताविक रूप एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर जाना भौतिक वितरण के अन्‍तर्गत आता है।''

मैकाथी के अनुसार,'' वैयक्तिक फर्मो के भीतर एवं वितरण प्रणालीयों के साथ-साथ माल का वास्‍तविक उठाना-धरना एवं संचालन भौतिक वितरण है।''

वेण्‍डेल एवं स्मिथ के अनुसार,'' व्‍यापक रूप में भौतिक वितरण व्‍यवसाय संभरण का विज्ञान है जिसके द्वारा वस्‍तु, उचित मात्रा में उस स्‍थान पर उपलब्‍ध की जाती है जहां उसकी मांग उपलब्‍ध होती है इस प्रकार भौतिक वितरण निर्माण तथा सृजन के बीच की श्रृंखला है।''

भौतिक वितरण की विशेषता (bhautik vitran ki visheshta)

भौतिक वितरण की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. भौतिक वितरण ,व्‍यवसाय सम्‍भरण का विज्ञान है।

2. भौतिक वितरण उत्‍पादक या मांगकर्ता के बीच की प्रमुख कडी है।

3. भौतिक वितरण आदेशित एवं निर्मित उत्‍पादों के एकत्रीकरण,प्रप्ति माल को उठाने- रखने के  सामग्री नियंत्रण, भण्‍डारण, परिवहन, पैकेजिंग, प्रेषक आदि कार्यो से सम्‍बन्‍ध रखता है।

4. भौतिक वितरण संस्‍था के अन्‍दर  तथा संस्‍था के उत्‍पादों के वितरण वाहिकाओं के साथ-साथ उत्‍पादों  के प्रवाह तथा प्रवाह वयवस्‍थाओं का प्रबन्‍ध करता है।

भौतिक वितरण का महत्‍व (bhautik vitran ka mahatva)

भौतिक वितरण के महत्‍व इस प्रकार है--

1. मूल्‍यों के स्थिरीकरण में

भौतिक वितरण की सुविधाएं मूल्‍य स्थिरीकरण में सहायता प्रदान करती है। एक उत्‍पादक अपने माल को उस समय तक अपने गोदाम में रखकर प्रतिक्षा कर सकता है जब तक वस्‍तुओं का मूल्‍य उत्‍पादकर्ता के हित में नही आ जाते और एक बार वस्‍तुओं का मूल्‍य उत्‍पादक के हित में आ जाने पर वह मूल्‍यों को समान क्रम में भी कर सकता है।

2. स्‍टांक का आकार 

भौतिक वितरण सुविधाएं स्‍टांक के आकार को भी प्रभावित करती है यदि वितरण सुविधाएं उपलब्‍ध है तो स्‍टांक को ज्‍यादा मात्रा में रखा जा सकता है उत्‍पादक के पास ज्‍यादा मात्रा में स्‍टांक होने से विक्रेता को यह सुविधाएं प्रदान करता है कि अपनी सुविधा के अनुसार वस्‍तुओं को खरीद सकते है।

3. क्रय का प्रभाव

भण्‍डार सुविधा का प्रभाव क्रय पर पड़ता है यदि प्रबन्‍ध के पास भण्‍डार सुविधाएं पर्याप्‍त मात्रा में है तो उनके के द्वारा बडी मात्रा में क्रय करके लाभों को प्राप्‍त कि‍या जा सकता है।

4. वस्‍तु नियोजन पर प्रभाव

कि‍सी भी वस्‍तु की योजना पर उसके भौतिक वितरण का प्रभाव पड़ता है। माल जिस भी परिवहन साधन से भेजा जाता है उसकी पैकिंग भी उसी तरह की करनी पडती है उदाहरण के लिए यदि माल को हवाई जहाज के द्वारा भेजा जा रहा है तो इन बातों को ध्‍यान में रखकर पै‍किंग की जाए माल अधिक भारी न हों और उसका आकार भी ज्‍यादा बड़ा न हो क्‍यों‍कि हवाई जहाज का किराया माल के वजन व आकार दोनो पर आधारित होता है। 

5. अतिरिक्‍त विक्रगय वृद्धि में सहायक 

उपयुक्‍त भौतिक वितरण प्रणाली की मदद से एक निर्माता अपने व्‍यापार को बड़ा सकता है कुशल भौतिक वितरण प्रणाली की मदद से बाजारों की भौगोलिक सीमाओं को बड़ाया जा सकता है और अछूते बाजार में उत्‍पाद विपणन के माध्‍यम से अतिरिक्‍त विक्रय कि‍या जा सकता है। इसके अतिरिक्‍त कुशल भौतिक वितरण प्रणाली की मदद से ग्राहकों व आपूर्तिकर्ताओं के साथ निर्माता संस्‍था अपने सम्‍बन्धों को प्रगाढ़ बना सकती है और नये उत्‍पाद पंक्‍तिओं व‍ विद्यमान पंक्‍तिओं को संरक्षण उपलब्‍ध करा सकती है। 

6. व्‍यवसाय में बड़ती हुई प्रतिस्‍पर्धा

आज के इस तेज गति से चलने वाले व्‍यावसायिक प्रतिस्‍पर्धा के इस युग में  भौतिक वितरण प्रबन्‍ध का महत्‍व दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा  है आज के इस युग में एक वस्‍तु को बनाने वाले अनेक निर्माता है ऐसी स्थिति में ग्राहक श्रेष्‍ट विकल्‍प के उत्‍पाद का चयन करता है यहां श्रेष्‍ट विकल्‍प से आशय वस्‍तु की किस्‍म के साथ-साथ उत्‍पाद द्वारा समय व स्‍थान  पर्याप्‍त मात्रा में मूल्‍य व शुल्‍क पर उत्‍पाद या सेवा की नियमित अपूर्ति से है यही करण है कि वर्तमान स्‍वरूप वह अपने प्रतिस्‍परर्द्धी निर्माताओं की चुनौती को स्‍वीकार करने में सक्षम हो जाता है यही कारण है कि‍ आज के समय में व्‍यावसायिक फर्मो के द्वारा भौतिक वितरण एक करने की और अधिक ध्‍यान दिया जाने लगा है।

7. यातायात प्रबन्‍ध द्वारा लागतों में कमी

यातायात प्रबन्‍ध भौतिक वितरण प्रणाली का एक महत्‍वपूर्ण अंग है। जिसकी मदद से संस्‍थान के सम्‍पूर्ण विपणन कार्यक्रम के क्र‍ियान्‍वयन को लाभदायक भी बनाया जा सकता है इसके भीतर आगत, व निर्गत, परिवहन सम्मिलित होता है परिवहन के शीघ्रगामी, सस्‍ते व उपयुक्‍त साधनों का चुन कर परिवहन लागतों  को न केवल कम कि‍या जा सकता है बल्‍की शीघ्र, निरंतर व समय पर उत्‍पाद की अपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकती है परिवहन प्रबन्‍ध भाड़ा दरों की सुची का गहन परीक्षण करके तथा भाड़ा बिलों का अंकेक्षण करके भी परिवहन लागतों को घटा सकते है।

8. मध्‍यस्‍‍थों को निश्चित करना 

प्रबन्‍धकीय निर्णय वितरण माध्‍यम को निश्चित करते है उदाहरण के लिए यदि कोई उत्‍पादक यह निर्णय लेता है कि‍ स्‍टांक को रखने के लिए अलग-अलग स्‍थानों पर सार्वजनिक गोदामों की सेवाओं की मदद ली जायेगी तो इसका अर्थ यह होगा कि‍ उत्‍पादक को अपने स्‍वयं के गोदामों की स्‍थापना नही करनी होगी। इसी प्रकार, यदि प्रबन्‍धकीय निर्णय यह शाखाएं खोली जाय, तो इसका अर्थ यह है कि वितरण माध्‍यम सीधा होगा और उपभोक्‍ता तक सीधे ही पहुंचा जायेगा जिसके लिए गोदामों की व्‍यवस्‍था करनी पडेगी।

भौतिक वितरण प्रणाली का क्षेत्र (bhautik vitran ka kshetra)

भौतिक वितरण प्रणाली के क्षेत्र के सम्‍बन्‍ध में विद्वानों में मतभेद है कुछ विद्वान भौतिक वितरण प्रणाली के क्षेत्र को व्‍यापक  मानते है इन विद्वानों का मानना है कि भौतिक  वितरण प्रणाली के क्षेत्र के अन्‍तर्गत उत्‍पाद के निर्माण के लिए सामग्री के स्‍त्रोतों  की खोज व चयन  से लेकर अन्तिम उपभोक्‍ता  बाजारों में उत्‍पाद के वितरण  तक कि क्र‍ियाओं को सम्मिलित किया जाना चाहिए। इन विद्वानों का कहना है कि वितरण वहिका प्रबन्‍ध भी भौतिक वितरण प्रणाली का ही एक अंग है इसके विपरीत कुछ विद्वान भौतिक प्रणाली के क्षेत्र में वितरण वहिका प्रबन्‍ध को सम्मिलत नही करते है और भौतिक वितरण निर्णयों तथा वितरण वाहिका निर्णयों का पृथक समस्‍याओं के रूप में देखते है ऐसा दृष्टिकोण भौतिक वितरण प्रणाली के क्षेत्र को संकुचित बना देता है इतना होने पर भी अनेक संकुचित संस्‍थाएं दृष्टिकोण को इस लिए अपनाती है जिससे वे भौतिक वितरण एवं वितरण वाहिकाओं सम्‍बन्‍धी निर्णयों को भली प्रकार ले सके। वास्‍तविकता यह है कि व्‍यापक अर्थ मे भौतिक वितरण प्रणाली को स्‍वीकार करने पर भी अनुकूलतम ग्राहक सेवा स्‍तर को बनाये रखा जा सकता है और यथासंभव वितरण लागतों को कम करने के प्रयास किये जा सकते है।

शायद यह आपके लिए काफी उपयोगी जानकारी सिद्ध होगी

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