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1/07/2021

परिवहन का अर्थ, कार्य, महत्व

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परिवहन का अर्थ (parivahan ka arth)

parivahan arth karya mahatva;परिवहन से आशय कि‍सी वस्‍तु का मानव  को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक ले जाना या पहुंचना परिवहन कहलाता है।

कारखनों में निर्मित की जाने वाली वस्‍तुएं एवं खेतों में पैदा की जाने वाली फसलें उनके उद्गम स्‍थान पर ही उपभोग नही की जाती।  ऐसी वस्‍तुओं  और फसलों को परिवहन के माध्‍यम से उन स्‍थानों तक पहुंचाया जाता है जहां उनकी कमी हो और ग्राहकों  की मांग हो। इस प्रकार परिवहन विपणन  एक अनिवार्य कार्य है। क्‍योंकि बाजार उत्‍पादन क्षेत्रें से दूर स्थित होते है और उत्‍पादित वस्‍तुओं में स्‍थान उपयोगिता सृजित करने के लिए परिवहन आवश्‍यक है।

परिवहन के कार्य (parivahan ke karya)

परिवहन के कार्य इस प्रकार है--

1. बडे पैमाने पर उत्‍पादन को प्रोत्‍साहन

परिवहन के माध्‍यम से उत्‍पादित माल को बाजारों में भेजने की सुगम व्‍यवस्‍था ने उत्‍पादन के पैमाने को बढ़ा दिया है। परिवहन के माध्‍यम से उत्‍पादन हेतु कच्‍चा माल व अन्‍य संसाधन आसानी से उपलब्‍ध  हो जाते है और साथ ही बडे पैमाने पर उत्‍पादित माल को दूर-दराज के उपभोक्‍ताओं तक  आसानी से पहुंचा दिया जाता है।

2. मूल्‍य स्थिरता 

परिवहन के साधनों ने सुदृढ वितरण व्‍यवस्‍था की स्‍थापना में  अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है परिवहन सुविधा होने के कारण जिन क्षेत्र में वस्‍तुएं अधिक है वहा से कम वस्‍तु वाले क्षेत्रों में भेजना सम्‍भव है। परिणामस्‍वरूप मांग एवं पूर्ति में संतुलन बना रहता है और साथ ही मूल्‍यों में स्थिरता बनी रहती है।

3. प्राकृतिक साधनों का विदोहन 

प्राकृतिक साधनों के दोहन में परिवहन साधनों का महत्‍वपूर्ण योगदान है दोहन के लिए जरूरी श्रम व औजार गन्‍तव्‍य स्‍थान तक पहुंचाया तथा दोहन के बाद पदार्थो  को कारखानों या उपभोक्‍ताओं तक पहुंचाना यह सभी कार्य परिवहन व्‍यवस्‍था के बिना सम्‍भव नही है।

4. संतुलित क्षेत्रिय विकास 

परिवहन सुविधा ने सन्‍तुलित क्षेत्रिय विकास को सम्‍भव बनाया है इससे पिछ़डे क्षेत्रों के विकास को बल मिला है दूर-दूर तक क्षेत्रो में उद्योगों की स्‍थापना होने लगी है जिसके द्वारा उत्‍पादित माल परिवहन के माध्‍यम से देश भर में पहुंच रहा है।

5. बीमा बैकिंग व संचार  साधनों का विकास

परिवहन की वजह से ही बीमा, संचार, बैकिंग आदि के विकास को सम्‍भव बनाया है। सामान्‍य बीमा का अधिकांश व्‍यापार तो परिवहन बीमा ही है। बीमा, बैकिंग एवं संचार साधनों के विकास ने देश में उद्योग धन्‍धों के विकास में महत्‍वपूर्ण भुमिका निभाई है। 

6. रोजगार अवसरों का सृजन

परिवहन के माध्‍यम से साधनों के विकास के कारण नये रोजगार अवसरों का सृजन होता है। भारत में रेल, सड़क, वायु, जल परिवहन के विभिन्‍न  परिवहन संगठनों ने लाखो लोगों को रोजगार  दिया है और आज भी रोजगार के नये अवसर सृजित हो रहे है। यह उल्‍लेखनिय है कि इस कार्य के लिए शिक्षित व अशिक्षित दोनों ही प्रकार के लोगों को रोजगार मिलता है।

7. कमी या अभाव के भय को दूर करना 

किसी भी स्‍थान पर कि‍सी वस्‍तु की कमी या अभाव के  कारण उन वस्‍तुओं  की कीमत बड़ने लगती है और लोगो का जीवन कष्‍टमय होने लगता है तेज सुविधाप्रद परिवहन ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न होने  ही नही देता। परिवहन द्वारा वस्‍तु को अधिकतम वाले क्षेत्रों से अभाव वाले क्षेत्रों में सरलता से पहुंचाया जा सकता है।

8. शक्ति के साधनों की उपलब्‍धता

विश्‍व में शक्ति के साधनों का वितरण समान रूप में नही है खनिज तेल अरब देशो में बहुत अधिक है जबकि इसकी आवश्‍यकता  भारत, अमेरिका व विश्‍व के अन्‍य देशों को भी है। परिवहन के माध्‍यम से ही तेल रूपी इस शक्ति का उपयोग दुनियां के बहुत  देश कर रहे है। इसी तरह कोयला भारत के बिहार व उड़ीसा में उत्‍पादित होता है परन्‍तु इसका उपयोग भारत के सभी क्षेत्रों में उपलब्‍ध कराया जा रहा है।

9. उत्‍पादन के घटकों की  गतिशीलता में वृद्धि करना 

माल, मशीन, श्रम, पूँजी एवं साहस उद्योगों के विकास के लिए आवश्‍यक है। उत्‍पादन के इन तत्‍वों को परिवहन ने ही गतिशीलता प्रदान की है यही कारण है कि एक स्‍थान पर उपलब्‍ध  माल, श्रम, पूंजी आदि को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक बल्‍की देश  के बाहर दूसरे देशों में सरलता से ले जाने लगे है। तेज व सुविधाजनक परिवहन होने के कारण उत्‍पादन के विभिन्‍न  तत्‍वों की गतिशीलता बडी है और विश्‍व के हर स्‍थानों पर इनकी उपलब्धि आसान हुई।

परिवहन का महत्‍व (parivahan ka mahatva)

परिवहन का महत्‍व इस प्रकार है--

1. परिवहन एवं उत्‍पादन 

परिवहन साधनों के विकास में विशेष रूप से बडे पैमाने पर उत्‍पादन में विशेष सहयोग प्रदान किया है परिवहन सुविधा के उत्‍पादन के लिए आवश्‍यक संसाधन, जैसे कच्‍चा माल, श्रम, मशीन, आदि सरलता से उपलब्‍ध हो जाते है और साथ ही दूर-दूर तक वसे उपभोक्‍ताओं के पास उत्‍पादित माल पहुंचाना भी सम्‍भव होता है।

2. परिवहन एवं वितरण 

बहुत प्रकार की वस्‍तुओं में समय एवं स्‍थान पूँजी का अन्‍तर्राष्‍ट्रीय प्रवाह सम्‍भव हो सका है उद्योमियों को विभिन्‍न स्‍थान पर जहां लाभ की सम्‍भावनाएं अधिक हो, व्‍यापार एवं उद्योग प्रारम्‍भ करने के नये अवसर प्राप्‍त हुए है।

3. परिवहन एवं उपयोगिता 

विभिन्‍न वस्‍तुओं में समय व स्‍थान उपयोगिता का सृजन शीघ्र व शुलभ परिवहन सेवाओं के कारण ही सम्‍भव हो पाया है पूँजी, श्रम व संगठन के कारण कच्‍चे माल को निर्मित वस्‍तुओं में परिवर्तित कर विभिन्‍न मानवीय आवश्‍यकताओं  की पूर्ति की जा सकती है।

4. परिवहन एवं उद्योग

परिवहन सुविधा व उद्योगों का विकास एक साथ हुआ है उद्योगिक विकास के लिए जिस आधरभूत संरचना की आवश्‍यकता होती है उसमें परिवहन भी मुख्‍य है सच्‍चाई तो यह है की परिवहन विकास के कारण ही उद्योगों का विकास हुआ है उद्योगों के विकास के कारण परिवहन साधनों का विकास। इस तरह दोनों साथ-साथ चलते है।

5. परिवहन एवं कीमत स्थिरता

परिवहन सेवाओं के विकास ने वस्‍तुओं की कीमत में स्थिरता प्रदान की है अब ज्‍यादा उत्‍पादित वस्‍तुओं को ऐसे क्षेत्रों में भेजना आसान है जहां उनकी कमी है यहां मांग व पूर्ति की स्थिति में सन्‍तुलन बनाये रखता है और कीमतों में उच्‍चावचन नही होते।

6. परिवहन एवं नियोजित अर्थव्‍यवस्‍था 

नियोजित अर्थव्‍यवस्‍था में पिछड़े क्षेत्रों के विकास और सन्‍तुलित आर्थिक विकास पर जोर दिया जाता है साथ ही अच्‍छे वितरण व्‍यवस्‍था के लिए विकास का  लाभ ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कि‍या जाता है इन सभी कार्यो में परिवहन सुविधा की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है।

7. परिवहन एवं व्‍यापार

रेलों, ट्रकों, वायुयानों आदि  परिवहन साधनों की मदद से उत्‍पादित माल कच्‍चा माल, निर्मित वस्‍तुएं उपकरणों, मशीनों आदि को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर लाने-ले जाने में मदद मिलती है यहां तक जल्‍दी खराब होने वाली वस्‍तुओं को कम से कम समय में दूर-दूर तक के स्‍थानों तक भेजना मुमकिन हुआ है इससें व्‍यापार के विकास को बढावा मिला है।

8. परिवहन एवं कृषि 

परिवहन के साधनों ने कृषि के विकास को बढावा दिया है खेती हेतु आवश्‍यक सामग्री खाद्य, बीज, कीटनाशक दवाएं आदि की उपलब्‍धता परिवहन साधनों की वजह से आसान हो गई है और साथ में फसलों को बाजारों व उपभोक्‍ताओं तक पहुंचाना मुमकिन हो गया है।

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