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1/08/2021

विक्रय संवर्द्धन अर्थ, परिभाषा

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विक्रय संवर्द्धन का अर्थ (vikray samvardhan kya hai)

vikray samvardhan arth paribhasha;प्रत्येक उत्‍पादक निर्माता या व्‍यवसायी यह चाहता है कि उसके उत्‍पादों की अधिक से अधिक बिक्री हो। इसके लिए वह ऐसी क्रि‍याएं करते है जिस की वजह से ज्‍यादा से ज्‍यादा  ग्राहक उत्‍पादों की और आकर्षित  होकर के उन को खरीदने लगते है। विक्रय संवर्द्धन  से आशय उन समस्‍त क्रि‍याओं से है जो विक्रय मात्रा में वृद्धि के लिए की जाती है।

साधारण शब्‍दों में हम यह कह सकते है कि प्रवर्तन का प्रमुख कार्य वस्‍तुओं एवं सेवाओं  के विपणन के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित करना है।

विक्रय संवर्द्धन की परिभाषा (vikray samvardhan ki paribhasha)

फिलिप कोटलर के अनुसार,'' विपणन मिश्रण के सभी उपकरण जिनका प्रमुख अभिनय अनुनय संदेश है संवर्द्धन के अन्‍तर्गत आता है।''

विलियम जे. स्‍टाण्‍टन के अनुसार,' 'प्रवर्तन में विज्ञापन, वैयक्तिक विक्रय, प्रवर्तन अन्‍य विक्रय उपकरण आते है।''

ए.एच.आर.डेलेन्‍स के शब्‍दों में,'' विक्रय संवर्द्धन से आशय उन कदमों से है जो विक्रय करने या बढानें के लिए उठाये जाते है।''

मैसन एवं रथ के शब्‍दों में,'' विक्रय संवर्द्धन में उन सभी क्रि‍याओं को सम्मिलित कि‍या जाता है। जो कम्‍पनी के माल या सेवाओं के विक्रय हेतु उपभोक्‍ता के ध्‍यान को अपनी और आकर्षित कर सकें।''

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