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12/23/2020

उपभोक्ता व्यवहार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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उपभोक्‍ता व्‍यवहार का अर्थ (upbhokta vyavhar kise kahte hai)

upbhokta vyavhar ka arth paribhasha visheshtaye;साधारण शब्‍दों में उपभोक्‍ता द्वारा प्रयोग की जाने वाली उत्‍पाद क्रय प्रक्र‍िया को ही उपभोक्‍ता व्‍यवहार कहा जाता है। विपणन की सम्पूर्ण प्रक्र‍िया उपभोक्‍ता के चारों और चक्‍कर लगाती है संक्षेप में हम यह कह सकते है, कि‍ उपभोक्‍ता कि‍सी वस्‍तु को कब कहां कैसे क्यों क्रय (खरीदता) करता है। इसका पता लगाना ही उपभोक्‍ता  व्‍यवहार का अध्‍ययन करना या उपभोक्ता व्यवहार है।

उपभोक्ता व्यवहार की परिभाषा (upbhokta vyavhar ki paribhasha)

उपभोक्‍ता व्‍यवहार की परिभाषाएं इस प्रकार से है--

स्टिल कण्डिफ एवं गोवोनी के अनुसार,'' क्रेता/उपभोक्ता व्‍यवहार  वह क्रमबद्ध प्रक्र‍िया है जिसके अन्‍तर्गत  कोई व्‍यक्ति बाजार-स्‍थान अथवा उत्‍पाद एवं सेवा सेवा संबन्‍धी निर्णय लेने के लिए अपने वातावरण से परस्‍पर प्रभावित है।''

गोथे के अनुसार,''  क्रय करते समय कि‍सी व्‍यक्ति के सम्‍पूर्ण व्‍यवहार को क्रय व्‍यवहार कहा जाता है।'' 

वाल्‍टर एवं पॉल के अनुसार,''उपभोक्‍ता  व्‍यवहार एक ऐसी प्रक्र‍िया है जिससे व्‍यक्ति यह निर्णय लेता है कि‍ वस्‍तुओं और सेवाओं का खरीदना है तो क्‍या, कब, कहॉं और कि‍ससे खरीदना है।''

शौल एवं गुल्‍टीनन के अनुसार," उपभोकता व्‍यवहार मानव व्‍यवहार का वह भाग है जिसका सम्‍बन्‍ध व्‍यक्तियों द्वारा उत्‍पादों के क्रय व उपयोग के सम्‍बन्‍ध में लिये गये निर्णयों एवं कार्यों से होता है।''

शिफमैन एवं कनुक  के अनुसार ,''  उपभोक्‍ता व्‍यवहार वह अनुभाग है जो प्रबन्‍धकों को यह बताता है कि‍ उपभोग वस्‍तुओं पर व्‍यय करने के निर्णय के पिछे क्‍या है। यह केवल यह सिद्ध नही करता कि‍ विनिमय कि‍या गया है वरन् यह भी दर्शाता है कि‍ कहॉं, कब, क्‍यों  कि‍तनी बार विनिमय किया गया है।''  

उपभोक्ता व्यवहार की विशेषताएं (upbhokta vyavhar ki visheshta)

उपभोकता व्‍यवहार की विशेषताएं इस प्रकार से है--

1. विपणन अवधारणा का मुलाधार 

यह उपभोक्‍ता व्‍यवहार की पहली विशेषता है उपभोकता व्‍यवहार विपणन अवधारणा का मुलाधार है सम्‍पूर्ण विपणन प्रक्रियाएं उपभोक्‍ता व्‍यवहार के चारों और घुमती है। विपणन अवधारणा की सफलता उपभोक्‍ता व्‍यवहार के अध्‍ययन पर निर्भर करती है।

2. मानव व्‍यवहार का अंग  

उपभोक्‍ता व्‍यवहार मानव व्‍यवहार का ही एक महत्‍वपूर्ण अंग है जिसका सीधा सम्‍बन्‍ध वस्‍तुओं एवं सेवाओं के क्रय से है।

3. मानसिक चिन्‍तन

यह उपभोक्‍ता व्‍यवहार की तीसरी महत्‍वपूर्ण विशेषता है उपभोक्ता व्‍यवहार  एक मानसिक चिन्‍तन है  जिसके भीतर उपभोक्‍ता के मस्तिष्‍क में उत्‍पन्‍न  होने वाले विचारों, उद्वेगों,तरंगों, एवं धारणाओं का अध्‍ययन कि‍या जाता है।

4. व्‍यापक प्रक्रिया 

उपभोक्‍ता व्‍यवहार एक अधिक व्‍यापक प्रक्र‍िया है जिसके भीतर अनेक प्रश्‍नों का हल खोजा जाता है, जैसे उपभोक्‍ता क्‍या खरीदता है, उपभोक्‍ता कि‍ससे खरीदता है? उपभोक्‍ता कहां से खरीदता है ?उपभोक्‍ता क्‍यों खरीदता है? उपभोक्‍ता कब खरीदता है ?उपभोक्‍ता कौन है? 

5. गत्‍यात्‍मक क्रिया 

यह उपभेाक्‍ता व्‍यवहार की पांचवी महत्‍वपूर्ण विशेषता है गत्‍यात्‍मक उपभोक्‍ता व्‍यवहार की क्रि‍या है यह स्‍थायी न होकर  निरन्‍तर बदलती रहती है। उदाहरण के लिए आज जो वस्‍तु उपभोक्‍ता खरीदता है यह निश्च्ति नही की वह आगे चलकर भी वही वस्‍तुओं को खरीदेगा। जब उपभोक्‍ता बाजार में बहुत प्रकार के उत्‍पाद को देखता है तो उसका मन चलायमान होने लगता है।

6. अनिश्च्त्तिा का तत्‍व

उपभोक्‍ता व्‍यवहार में अनिश्च्त्तिा का गुण निहित रहता है उपभोक्‍ता व्‍यवहार में यह नही कहां जा सकता उपभोक्‍ता अमुक समय पर अमुक प्रकार का ही व्‍यवहार करता है।

पढ़ना न भूलें; उपभोक्ता व्यवहार का महत्व, घटक

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