har din kuch naya sikhe

हर दिन कुछ नया सीखें।

12/18/2020

विपणन मिश्रण का अर्थ, परिभाषा, घटक, प्रकार

By:   Last Updated: in: ,

विपणन मिश्रण का अर्थ (vipnan mishran kya hai)

vipnan mishran arth,  paribhasha, prakar, ghatak;विपणन मिश्रण के अंतर्गत ऐसे समस्‍त निर्णय लिए जाते है जो कि विक्रय को प्ररित या प्रोत्‍साहित करते है, विपणन मिश्रण कहलाते है। विपणन मिश्रण में वस्‍तु ब्राण्‍ड,  ट्रेडमार्क , पैकिंग, मूल्‍य, वितरण-मार्ग विज्ञापन एवं विक्रय संवर्धन विपणन अनुसंधान आदि को सम्मिलित किया जाता है।

प्रत्‍येक संस्‍था विपणन निर्णय इस प्रकार करती है कि किसी एक निश्चित समय और स्थिति में सबसे अधिक लाभ कमाया जा सके। यहां पर विपणन मिश्रण का विकास इस बात को ध्‍यान देते हुए किया जाता है कि तुलनात्‍मक से अधिक विपणन और संवर्द्धानात्‍मक लागतों के साथ उँची कीमत रखना व्‍यवसाय के लिए ज्यादा उपयुक्‍त है या कम संवर्द्धानात्‍मक लागत के साथ कम कीमत रखना अर्थात् व्‍यवसायी के सम्‍मुख निम्‍मलिखित दो प्रकार की छूटें है-या तो वह उत्‍पाद की कीमत उँची निर्धारित करे और विक्रय संवर्द्धानात्‍मक व्‍यय भी कम करे। विपणन मिश्रण की सहायता से  विपणन मिश्रण कार्यक्रम तैयार करता है जिसका फार्म को शुद्ध लाभ होता है एवं ग्राहकों को अधिकतम सन्‍तुष्टि प्राप्‍त हो सके।

विपणन मिश्रण की परिभाषा (vipnan mishran ki paribhasha)

विपणन मिश्रण की परिभाषाएं इस प्रकार से है--

आर.एस डावर के अनुसार, '' निर्माताओं द्वारा बाजार में सफलता प्राप्‍त करने के लिए प्रयोग की जाने वाली नीतियां विपणन मिश्रण का निर्णाय करती है।''

फिलिप कोटलर के अनुसार, " विपणन मिश्रण नियन्‍त्रण योग्‍य चलों का एक ऐसा समूह है जिसका प्रयोग एक फार्म अपने क्रेताओं के प्रतिवचनों को प्रभावित करती है।''

कीली एवं लेजर के शब्‍दों में,''विपणन मिश्रण उस बड़ी बैटरी की युक्तियों से बना है जिसकों ग्राहकों को किसी विशेष वस्‍तु को क्रय करने के लिए प्रेरित करने के उद्धेश्‍य से काम में लाया जा सकता है।''

विलियम जे.स्‍टेण्‍टन के अनुसार,'' विपणन मिश्रण एक ऐसा शब्‍द है  जिसका उपयोग चार ऐसे अंतर्गामी संयोजन का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो कि कम्‍पनी विपणन व्‍यावस्‍था के कोड़ का निर्माण करते है-- उत्‍पाद कीमत ढांचा संवर्द्धन क्रियाएं तथा वितरण व्‍यावस्‍था।''

लिपसन एवं डार्लिंग के अनुसार विपणन मिश्रण की परिभाषा,'' वि‍पणन विचार के रूप में विपणन मिश्रण व्‍यवसाय प्रणाली द्वारा नियि‍न्‍त्रण उन समस्‍त चलों के सार्थक संगठन का एक साधन है जो बाजार स्‍थान से सौदों को अप्रत्‍यक्ष रूप से प्रभावित करता है।''  

विपणन मिश्रण के घटक एवं परिवर्तन तत्‍व

विपणन मिश्रण की शक्तियां या घटक इस प्रकार से है--

1. उपभोक्‍ता व्‍यवहार

वस्‍तुओं एवं सेवाओं की मांग का प्रत्‍यक्ष संबंध उपभोक्‍ता की आर्थिक स्‍थिति पर  निर्भर करता है साथ में सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक परिवर्तनों का प्रभाव लोगों के जीवन स्‍तर पर भी पडता है लोग बदलती हुई परिस्थिति के अनुसार स्‍वयं को समायोजित करने का प्रयत्‍न करते है। 

जिससे वस्‍तु की मांग पर भी प्रभाव पड़ता है विपणन मिश्रण में योग विपणन प्रबंधक बहुत प्रकार से सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक परविर्तनों केअध्‍ययन के माध्‍यम से तत्‍वों की पहचान कर सकते है  जिसका सीधा प्रभाव उसके द्वारा विक्रय की जाने वाली वस्‍तुओं पर पढ़ेगा।

2. कम्‍पनी की ख्‍याति

कम्‍पनी की ख्‍याति विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाला यह दुसरा महत्‍वपूर्ण घटक है अगर कम्‍पनी की ख्‍याति उच्‍चय गुण वाली है तो वह वस्‍तु के उत्‍पादन क्रम में एक या दो नई वस्‍तुओं का उत्‍पादन सम्मिलित कर सकती है गोदरेज बजाज इसके उल्लेखित उदाहरण है।

3. संवेष्‍ठन नीति

संवेष्‍ठन विपणन मिश्रण का तीसरा महत्‍वपूर्ण घटक है उत्‍पाद की बिक्री पर उसकी पैकिंग का विशेष प्रभाव पड़ता है इस में विपणन प्रबन्‍धक को विशेष ध्‍यान देना चाहिये।

4. विपणि अनुसंधान

विपणि अनुसंधान को विपणन की आत्‍मा कहा जाता है। विपणन प्रबन्‍धक को विपणि अनुसंधान के अध्‍ययन से विपणन मिश्रण के विभिन्‍न निर्णय लेने में सहायता प्राप्‍त होती है।

5. विज्ञापन नीति

विज्ञापन विपणन मिश्रण को प्रभावित करने वाला पांचवा घटक है इसके अंतर्गत विपणन प्रबंन्‍धक को  विज्ञापन के उद्देश्य ‍या क्षेत्र किस विज्ञापन के माध्‍यम से विज्ञापन प्रतिलिपि (काॅफी) के समन्‍वय से नीति निर्धारित करना तथा विज्ञापन व्‍ययों का पहले से अनुमान लगाना। और साथ ही विज्ञापन व्‍ययों  (खर्चों)पर नियन्‍त्रण आदि के संबंध में निर्णय लेने पढ़ते है। 

6. कम्‍पनी की इच्‍छाओं में अन्‍तर 

विपणन मिश्रण में कम्‍पनी के लाभों को बानाये रखने के लिए लाभों में वृद्धि करने की इच्‍छा भी अलाभकारी वस्‍तुओं का उत्‍पादन बन्‍द करने से   नई वस्‍तुओं के उत्‍पादन प्रारम्‍भ करने को प्ररित कर सकती है।

विपणन मिश्रण के  प्रकार (vipnan mishran ke prakar)

विपणन मिश्रण के प्रकार इस प्रकार से है--

1.उत्‍पाद

विपणन में  किसी बाजार में उचित उत्‍पाद के विकास की आवश्‍यकता होती है अलग-अलग प्रकार की वस्‍तुयें अलग-अलग बाजारों में ग्राहकों को आकर्षित करती है उत्‍पादको प्रभावशाली बनाने के लिए  विपणन की आवश्‍यकता होती है। मेकार्थी के अनुसार विभिन्न बाजारों तथा ग्राहकों के लिए सर्वप्रथम  उत्‍पाद नियोजन किया जाता है ग्राहकों की रूचि के अनुसार वस्‍तुओं के उत्‍पाद का रूप-रंग आकार-प्रकार व शर्ते निश्चित की जाती है उत्‍पाद को विभिन्‍न आकारों में पैक किया जाता है और आवश्‍यकता पढने पर प्रत्‍येक को ब्रांण्‍ड प्रदान किया जाता है। वस्‍तुओं के उत्‍पाद को लोकप्रिय बनाने के लिए उसका प्रमाणीकरण कराया जाता है।     

2. स्‍थान

विपणन मिश्रण में स्‍थान नामक तत्‍व का विशेष महत्‍व है विपणन के लिए यह बहुत महत्‍वपूर्ण है कि ग्राहक द्वारा मांगी गई वस्‍तु उसे उचित समय उचित स्‍थान पर उपलब्‍ध करायी जाये सकें। विपणन में स्‍थान के बिना वस्‍तु एवं सेवाओं का उत्‍पादन महत्‍वहीन होता हैं।

3. संवर्धन या प्रवर्तन

विपणन मिश्रण में उत्‍पाद का विक्रय संवर्धन या विक्रय प्रवर्तन अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है वस्‍तुओं के उत्‍पाद का परिचय सम्‍भावित ग्राहकों को कराया जाय तथा उन्‍हें वस्‍तु के क्रय हेतु प्ररित किया जाए। एकबार ग्राहक बना लेने के बाद उन्‍हे निरन्‍तर बनाये रखना साथ ही नये ग्राहक बनाना बहुत जरूरी है। संवर्धन के लिये व्‍यक्तिगत प्रचार और प्रसार को महत्‍व दिया जाता है।

4. मूल्‍य

अधिकांश उत्‍पादक वस्‍तुओं की कीमत का निर्णय स्‍वयं की इच्‍छा पर  ही निर्भर करती है मूल्‍य नीति का विकास फार्म के उद्धेश्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए ही किया जाना चहिये। मूल्‍य निर्धारित करते समय अनेक बातों का ध्‍यान रखना चाहिए जैसे प्रतियोगी वस्‍तुओं के गुण मांग उपयोगिता मूल्‍य वस्‍तु की मांग पैदा करने  तथा मांग में वृद्धि करने का एक प्रमुख तत्‍व होता है। मूल्‍य निर्धारित करते समय ग्राहक को दिया जाने बाला बटृा ग्राहक के क्रय की शर्ते तरीका आदि तथ्‍यों पर विचार करना आवश्‍यक है।

शायद यह आपके लिए उपयोगी सामग्री होगी


कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।