11/03/2020

गाँव या ग्रामीण समुदाय की विशेषताएं

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ग्राम या गाँव का अर्थ

gramin samuday arth visheshta;गाँव सीमित व निश्चित भौगोलिक क्षेत्र मे सीमित संख्या मे, सामान्यतया पाँच हजार से कम,लोगो की बहुत कुछ ऐसी स्थायी बसाहट को कहा जाता हैव जिसमे लोगो की जीविका का प्रमुख आधार कृषि होती है। लोगो के बीच  घनिष्ठ प्राथमिक संबंध होते है और उनका जीवन परम्पराओं से बहुत अधिक प्रभावित होता है तथा जहाँ परिवर्तन कम और धीमा होता है।

गाँव शब्द का प्रयोग आदिकाल से ही किया जा रहा है। तब गाँव का प्रयोग सामाजिक सम्बन्धों को स्थायित्व प्रदान करने वाले संगठन के रूप मे किया जाता था। समाजशास्त्रियों ने गाँव को ग्रामीण समुदाय के रूप मे ही परिभाषित किया है।

ग्रामीण समुदाय या ग्राम की परिभाषा 

मेरिल एवं एलड्रीज के अनुसार " ग्रामीण समुदाय के अंतर्गत संस्थाओं और ऐसे व्यक्तियों का संकलन होता है, जो छोटे से केन्द्र के चारो ओर संगठित होते है तथा सामान्य प्रकृतिक हितो मे भाग लेते है।

सैण्डरसन के अनुसार ," एक ग्रामीण समुदाय वह स्थानीय क्षेत्र है, जिसमे वहां निवास करने वाले लोगो की सामाजिक अन्तः क्रिया और उनकी संस्थायें सम्मिलित है, जिनमे वह खेतो के चारो ओर बिखरी झोपड़ियों या ग्रामों मे रहते है और जो उनकी सामान्य गतिविधियों का केन्द्र है।"

डाॅ. देसाई ," गाँव ग्राम्य समाज की इकाई है। यह रंगशाली के समाज है, जहाँ ग्राम जीवन अपने को प्रकट करता है और कार्य करता है।

पाटिल के अनुसार ", ग्रामीण क्षेत्र मे सामान्य ग्राम स्थान पर समीपस्थ गृहों मे करने वाले परिवारों के समूह को सामान्यतः ग्राम की अभिव्यक्ति के रूप मे समझा जा सकता है।" 

सिम्स ", ग्राम वह नाम है, जो कि प्रचीन कृषको की स्थापना को साधारणतः दर्शाता है।

सुमित्रानंदन पंत ने ग्राम की परिभाषा निम्न शब्दों मे की है--

" यहाँ नही है चलह-पहल वैभव विस्मित जीवन की,

यहाँ डोलती वायु म्लान सौरभ मर्मर ले बन की,

आता मौन प्रभाव अकेला सन्धा भरी उदासी,

यहाँ घूमती दोपहरी मे स्वप्नों की छाया सी।

यहाँ नही विद्युत दीपों का दिवस निशा मे निर्मित, 

अंधियाली ही रहती गहरी अंधियाली भय कल्पित।"

कुछ विद्वान गाँव को सामाजिक जीवन की आत्मनिर्भर इकाई के रूप मे देखते है, किन्तु  यह स्थिति आजादी के पहले या किसी हद तक आजादी के समय तक थी। 

मैटकाफ ने भारतीय गाँव को एक आत्मसम्पन्न गणराज्य के रूप मे चित्रित किया। उनका कहना था भारत मे कई विदेशी आक्रांता, शासक आये, कई गये लेकिन ग्राम गणराज्य एवं पंचायत के माध्यम से भारत ने अपनी सामाजिक व सांस्कृतिक परम्पराओं को बनाये रखा। करीब साढ़े पाँच दशक पहले एम.एन. श्रीनिवास ने मैसूर के रामपुरा गाँव का अध्ययन किया। उनका कहना था कि ग्राम आज भी अधिकांशतः आत्मसम्पन्न है। वे ग्राम को परस्पर निर्भर समूहो की आत्मसम्पन्न इकाई के रूप मे देखते है। वैसे आमतौर पर समाजशास्त्री अब गाँव को एक आत्मनिर्भर आत्मसम्पन्न इकाई के रूप मे स्वीकार नही करते।

ग्रामीण समुदाय या गाँव की विशेषताएं (gramin samuday ki visheshta)

ग्रामीण समुदाय या गाँव की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. ग्राम अथवा गाँव एक निश्चित स्थान पर बसे होते है। इसका क्षेत्र निश्चित व सीमित होता है। 

Exam मे अगर गांव विशेषताओं की जगह पर ग्रामीण समुदाय की विशेषताएं आये तो आप इसे इस तरह लिख सकते है-- "ग्रामीण समुदाय के लोग एक निश्चित स्थान पर बसे होते है। इनका क्षेत्र निश्चित या सीमित होता है।" इस तरह आप अन्य विशेषताओं मे बदलाव कर सकते है।

2. गांव का प्रकृति के साथ निकट व घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। कुछ गाँव, जो नगर, कस्बे या बाजार के समीप होते है, के अलावा शेष अधिकांश गाँव या तो प्रकृति की गोद मे बसे होते है या प्रकृति से उनका नजदीकी रिश्ता होता है।

3. गाँव का आकार सीमित होता है। गांव की आबादी आमतौर पर पाँच हजार से कम होती है। वैसे कतिपय देशो मे दस दस हजार तक की आबादी की बसाहट को भी गाँव माना जाता है। आबादी के साथ गाँव की जनसंख्या का घनत्व भी कम होता है।

4. गाँव के लोगो मे व्यावसायिक भिन्नता कम होती है। गांव के लोगो का मुख्य व्यवसाय कृषि है। आमतौर पर लोग कृषि कार्य करते है। यदि कुछ लोग कोई अन्य धन्धा भी करते है तो यह भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से संबंधित होता है।

5. ग्राम या गाँव की एक मुख्य विशेषता यह है की गाँव मे विभिन्न समूह एक दूसरे के कार्यो पर निर्भर करते है। कार्य के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच सहयोगपूर्ण संबंध होता है। गाँवो के समूहो के बीच श्रम का विभाजन और सहयोग जजमानी व्यवस्था के माध्यम से संचालित होता है।

6. भारतीय गाँवों मे श्रम विभाजन का स्वरूप सामान्यतया परंपरात्मक होता है। इसमे विशेषीकरण का अभाव पाया जाता है। गाँवो मे भूमि अधिकांशतः ऊँची जातियों और कहीं-कहीं उच्च मध्यम जातियों के पास होती है। तलाब एवं कुएँ भी अधिकतर उन्ही के पास होते है। हालांकि वर्तमान मे सरकारी नल और टीबेल की व्यवस्था होने से कुएं और तलाब का अब बहुत की ही कम उपयोग होता है। 

7. ग्रामीण समाज मे विवाह तुलनात्मक रूप से कम आयु मे होता है और परिवार का आकार तुलनात्मक रूप से बड़ा होता है। ग्राम समाज मे संयुक्त परिवार का चलन अधिक देखने को मिलता है।

8. ग्रामीण समाज मे लोगो के बीच प्राथमिक संबंध पाया जाता है। लोगो मे आमने-सामने का प्रत्यक्ष संबंध होता है और वे एक दूसरे को भली भांति जानते है।

9. ग्रामीण समाज मे आर्थिक, राजनैतिक और किचिंत शैक्षिक आधार पर वर्गभेद कम होता है। यद्यपि संस्कारजनित जातीय आधार पर भेद प्रखर होता है। 

10. ग्रामीण समाज मे महिलाओं की स्थिति तुलनात्मक रूप से पुरूषों से निम्न होती है।

11. ग्रामीण समाज मे तुलनात्मक रूप से स्थायित्व पाया जाता है। परिवर्तन होता है किन्तु उसका दायरा सीमित और गति धीमी होती है।

12. ग्रामीण समाज मे व्यावसायिक व सामाजिक गतिशीलता कम होती है।

13. ग्रामीण समाज मे अशिक्षा तुलनात्मक रूप से नगरो से अधिक होती है। अशिक्षा के कारण गाँवो मे अंधविश्वास अधिक पाया जाता है। ग्रामीण कमोवेश भाग्यवादी होते है।

14. ग्रामीण जीवन मे धर्म, संस्कृति व परम्पराओं का प्रभाव तुलनात्मक रूप से अधिक देखने को मिलता है।

15. ग्रामीण क्षेत्रों मे जाति व्यवस्था का अत्यधिक प्रभाव पाया जाता है। व्यावसायिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक आदि सभी क्षेत्रों मे जातीय नियमो का कठोरता से पालन किया जाता है।

16. ग्रामीण समुदाय की एक विशेषता यह है कि समान व्यवसाय, समान, जीवन पद्धति, समान, रहन-सहन आदि के कारण ग्रामीण समुदाय मे सजातीयता के दर्शन होते है।

17. भारतीय ग्रामों की एक विशेषता ग्राम पंचायत है। यह स्वायत्त संस्था है, जो ब्रिटिश काल के पूर्व तक राजनीतिक दृष्टि से स्वतंत्र न्यायिक इकाई थी। गांव के आंतरिक कार्यों का निष्पादन ग्राम पंचायतें ही करती है।

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