8/20/2020

लक्ष्य अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

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लक्ष्य का अर्थ (lakshya ka arth)

lakshya meaning in hindi;प्रत्येक उद्यमी का मूल लक्ष्य उपक्रम को सफलतापूर्वक स्थापित करना होता है। उसे कुशलतापूर्वक संचालित करना और परिणाम मे अधिकतम लाभ अर्जित करना होता है। इसके लिए उद्यमी द्वारा समस्त उद्यमीय क्रियाएँ निर्देशित की जाती है। लक्ष्य वे प्राप्ति योग्य अन्तिम बिन्दु है, जिनकी ओर उद्यमी अपने प्रयत्नों तथा साधनों को निर्देशित करता है। उद्यमी निर्धारित लक्ष्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए निरन्तर समन्वित प्रयासों को प्राप्त करता है।
लक्ष्य का अर्थ अन्य शब्दों मे कहे तो " लक्ष्य वे अन्तिम परिणाम होते है जिनकी प्राप्ति हेतु किसी उपक्रम की समस्त क्रियाएँ की जाती है। बगैर लक्ष्यों के एक निगम के सभी प्रयत्न दिशाहीन हो जाते है।
आगे जानेंगे लक्ष्य की परिभाषा और विशेषताएं।

लक्ष्य की परिभाषा (lakshya ki paribhasha)

ब्रूम के अनुसार " लक्ष्यों को भावी क्रिया व्यवहारों के रूप मे परिभाषित किया जाना चाहिए। इनके मतानुसार कुछ दिशाओं मे ये लक्ष्य प्राप्त हो सकते है, फिर भी प्रत्येक संगठन की रचना इन लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु की जाती है।"
कुण्टज एण्ड ओ डोनेल के अनुसार " लक्ष्य (उद्देश्य), प्रबंध कार्यक्रम का अन्तिम बिन्दु है।
लुई ए एलन के अनुसार " लक्ष्य का आश्य अन्तिम परिणाम से है।"
पीटर एफ. ड्रकर के अनुसार " लक्ष्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों मे व्यावसायिक उद्यम के संचालन के लिए आवश्यक उपकरण है। इसके अभाव मे प्रबंध एवं उद्यमी की उड़ान निरुद्देश्य, क्योंकि मार्ग बोध के लिए न तो संकेत चिन्ह होंगे और न कोई पूर्व परिचित मार्ग होगा।"
उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि " लक्ष्य एक ऐसी उद्यमीय प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत उद्यमी व्यावसायिक संस्था के सामान्य उद्देश्यों के अनुसार अपनी क्रियाओं का संचालन करता है, जिससे संसाधनों का प्रभावी उपयोग होता है तथा पूर्व निर्धारित परिणामों की प्राप्ति होती है।

प्रभावी लक्ष्यों की प्रमुख विशेषताएं (lakshya ki visheshta)

1. विशिष्टता
प्रभावी लक्ष्य विशिष्ट होते है। वे स्पष्टत: यह बताते है कि मात्रा तथा किस्म के संदर्भ मे क्या चाहा गया है एवं कितने समय मे वह कार्य पूरा करना है। विभिन्न शोध कार्यों से यह प्रमाणित हो चुका है कि निर्दिष्ट लक्ष्यों के कारण उच्च निष्पादन होता है।
2. स्वीकृति
प्रभावी लक्ष्य व्यक्तियों को स्वीकार्य होते है। यह स्वीकृति अधिक सूचनाओं को उपलब्ध कराकर उनकी समझ मे वृद्धि करती है। प्रबन्धक प्रायः लक्ष्य निर्धारण मे व्यक्तियों की सहभागिता के द्वारा स्वीकृति प्राप्त करता है, पर अधीनस्थों का प्रबन्धक मे विश्वास होने पर लक्ष्य स्वीकृति का कार्य और सरल हो जाता है।
3. आयामों की स्वीकृति
प्रभावी लक्ष्यों मे जाॅब के महत्वपूर्ण आयाम शामिल होते है। व्यक्ति उन क्षेत्रों मे सख्त परिश्रम करता है जहाँ लक्ष्य निर्धारित होता है। अतः निष्पादन के सभी क्षेत्रों के लिए लक्ष्यों का होना आवश्यक होता है।
4. प्रतिपुष्टि
प्रभावी लक्ष्यों मे पुनरावलोकन के साथ प्रतिपुष्टि की भी व्यवस्था होती है। पुनरावलोकन एवं प्रतिपुष्टि से लक्ष्यों तक पहुंचना सरल हो जाता है। प्रतिपुष्टि से यह ज्ञात होता है कि लक्ष्यों को कैसे मापा जा सकता है। अगर लक्ष्य काफी सीमा तक मापन योग्य है, तो प्रतिपुष्टि पर संकेन्द्रण सरल हो जाता है।
5. चुनौतीपूर्ण किन्तु वास्तविक
प्रभावी लक्ष्य चुनौतीपूर्ण पर वास्तविक होते है। अच्छा प्रबंधक उन लक्ष्यों का विकास करता है, जो चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ विद्यमान संसाधनों के भीतर उपलब्धि के योग्य होते है। अगर लक्ष्य अत्यधिक जटिल अथवा अवास्तविक है तो व्यक्ति उन्हें त्यागने का प्रयास कर सकते है। इसके विपरीत, अगर लक्ष्य अत्यधिक सरल है, तो वे व्यक्तियों को अभिप्रेरित नही करते है।
6. व्यक्तिगत विशेषताओं के अनुरूप
प्रत्येक कार्य के अनेक लक्ष्य होते है, अतः प्रबन्धक के लिए इनकी प्राथमिकताओं को निश्चित करना आवश्यक होता है। कुछ प्रबंधक लक्ष्यों को श्रेणीवार निर्धारित करते है जबकि अन्य आधारभूत लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयत्न करते है। प्रबन्धकों को चाहिए कि वे लक्ष्यों की प्राथमिकताओं को तय करते समय अन्य संगठनात्मक उद्देश्यों के साथ उनकी अनुरूपता स्थापित करने का प्रयत्न करे।
7. लक्ष्यों का महत्व
प्रत्येक लक्ष्य महत्वपूर्ण होता है, अतः प्रबन्धक के लिए विभिन्न लक्ष्यों के मध्य, उनके महत्व को मद्देनजर रखते हुए संतुलन स्थापित करना आवश्यक होता है।
8. समूह तथा व्यक्तिगत लक्ष्य
प्रबन्धकों को चाहिए कि वह व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से लक्ष्यों को निर्धारित करे। सामूहिक लक्ष्य उस दशा मे उपयोगी होते है जिसमे अनेक व्यक्तियों से अदाय एवं सूचनाओं की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, नए उत्पाद विकास अथवा उत्पाद शोध मे समूह लक्ष्य निर्धारित करना उपयोगी होता है। इसके विपरीत, क्रियात्मक स्तर पर व्यक्तिगत लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते है।

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