8/14/2020

कृषक तनाव क्या है?

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कृषक तनाव क्या है? (krishak tanav ka arth)

भूमि संबंधी तनाव का अर्थ भूमि से जुड़े हुए विभिन्न वर्गों के सम्बन्धों मे अथवा कृषकों की समस्याओं के परिणामस्वरूप विकसित तनाव है।
दूसरे शब्दों मे भूमि या कृषि से जुड़ी समस्याओं से सम्बंधित उत्पन्न तनाव को ही कृषक तनाव कहा जाता है।
आर. बी. पाण्डेय के अनुसार " कोई भी आन्दोलन कृषक आन्दोलन हो सकता है बर्शेंत उसका मूल उद्देश्य कृषकों के अधिकार की लड़ाई हो, चाहे वह कृषकों द्वारा गठित हो अथवा अन्य समूहों द्वारा।
डाॅ. राधाकमल मुखर्जी के अनुसार " कृषि अर्थव्यवस्था मे सामूहिक कार्यों का दुरूपयोग, लगान वसूल करने वालों की संख्या मे वृद्धि, भूमि का बिना रोक-टोक गिरवी रखा जाना, भूमि का हस्तांतरण तथा कुटीर उद्योगों का पतन इन सब कारणों से भूमिहीन श्रमिकों की संख्या मे निरंतर वृद्धि हो रही है।

ए.आर. देसाई के अनुसार " किसान आन्दोलन के प्रमुख कारण इस प्रकार है--

1. किसानों मे राजनीतिक चेतना का उदय,
2. ॠणग्रस्तता,
3. सूदखोरी,
4. जमींदारी के खिलाफ संघर्ष,
5. भूख और गरीबी जैसी आदि समस्याएं कृषक आन्दोलन की पृष्ठभूमि मे रही है।
कृषक असंतोष के उक्त कारणों के आधार पर हम यह कह सकते है कि एक कृषक असंतोष किसानों के द्वारा अपने अधिकारों की मांग, अत्याचार और शोषण के खिलाफ संघर्ष एवं सत्तारूढ़ शक्तियों द्वारा अपनाया गया अत्याचारी रवैया कृषक असंतोष को आन्दोलन मे बदलने का आधार रहे है।
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