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6/16/2021

वस्तुनिष्ठता का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, महत्व

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vastunisthata arth paribhasha visheshta mahatva;सामाजिक अनुसंधान का मौलिक उद्देश्य सामाजिक घटना का वैज्ञानिक अध्ययन है। प्राकृतिक घटनाओं के अध्ययन मे अनुसंधानकर्ता को वस्तुनिष्ठता बनाए रखने मे विशेष कठिनाई नही होती है। वह इनसे अलगाव रखकर तटस्थता से इनका अध्ययन कर सकता है। किन्तु सामाजिक घटनाओं मे यह बात लागू नही होती। इसका कारण यह है कि सामाजिक घटनाओं से व्यक्ति का लगाव होता है, उसके अपने-अपने पूर्वाग्रह होते है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति के लिए असंभव हो जाता है कि वह तटस्थ रहकर इन घटनाओं का अध्ययन करे।

सामाजिक घटनाओं के अध्ययन मे दो दृष्टिकोण अपनाए जा सकते है-- वस्तुनिष्ठ और व्यक्तिनिष्ठ। वस्तुनिष्ठ अध्ययन मे घटना का वास्तविक अध्ययन किया जाता है। अध्ययनकर्ता तटस्थ होकर घटना का अध्ययन करता है और ऐसा करते समय अध्ययनकर्ता की मानसिक स्थिति का प्रभाव अध्ययन पर नही पड़ता है। इसके विपरीत, व्यक्तिनिष्ठ अध्ययन मे शोधकर्ता के अपने विचार, भावनाएं और पूर्वधारणाएं विशेष महत्व रखती है। वस्तुनिष्ठ अध्ययन प्रायः विश्लेषणात्मक होता है तथा व्यक्तिनिष्ठ अध्ययन प्रायः वर्णनात्मक होता है। 

सामाजिक घटना का वास्तविक अध्ययन करना अत्यंत ही कठिन कार्य है। लुण्डबर्ग ने कहा है," अभिमति तथा पक्षपात, सभी विज्ञानों मे जटिलता उत्पन्न करने वाले तत्व है, परन्तु उनका महत्व समाज विज्ञानों की अपेक्षा भौतिक विज्ञानों मे कम है।" 

व्यक्ति के अपने विचार, दृष्टिकोण और संस्कार होते है जो उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर देते है। साथ ही घटनाएं जटिल भी होती है। इस जटिल प्रकृति के कारण अध्ययन के पक्षपात तथा अभिमति की संभावनाएं बढ़ जाती है।

वस्तुनिष्ठता का अर्थ (vastunisthata kise kahte hai)

सामाजिक अनुसंधानकर्ता सामाजिक घटनाओं और तथ्यों से संबंधित सामग्री का संकलन करता है। जब अनुसंधानकर्ता सामाजिक तथ्य और घटनाओं को उसी रूप में देखता है जिस रूप में वे वास्तव में होती है और ऐसा करते समय वह अपने विचारों और दृष्टिकोणों को अलग करके देखता है। इस प्रकार के अध्ययन को ही वास्तविक किया वस्तुनिष्ठ अध्ययन कहां जाता है।

वस्तुनिष्ठता की परिभाषा (vastunisthata ki paribhasha)

लाॅवल कार के अनुसार," सत्य की वस्तुनिष्ठता का अर्थ यह है कि घटनामय संसार के किसी व्यक्ति के विश्वासों, आशाओं अथवा भय से स्वतंत्र एक वास्तविकता, जिसका सब कुछ हम अंतर्दृष्टि और कल्पना से नहीं, बल्कि वास्तविक अवलोकन के द्वारा प्राप्त कर सकते है।" 

ग्रीन के अनुसार," वस्तुनिष्ठता प्रमाण की निष्पक्षता से परीक्षण करने की इच्छा एवं योग्यता है।" 

फेयर चाइल्ड के अनुसार," वस्तुनिष्ठता या वैषयिकता का अर्थ उस योग्यता से है जिसमे एक अनुसंधानकर्ता स्वयं को उन परिस्थितियों से अलग रख सके जिसमें वह सम्मिलित है और द्वेष व उद्वेग के स्थान पर निष्पक्ष प्रमाणों या तर्क के आधार पर तथ्यों को उनकी स्वाभाविक पृष्ठभूमि मे देख सके।" 

प्रो. लुण्डबर्ग के अनुसार," अभिमति तथा पक्षपात सभी विज्ञानों मे जटिलता उत्पन्न करने वाले तत्व है, उनका महत्व सामाजिक विज्ञानों की अपेक्षा भौतिक विज्ञानों मे कम है।"

इसका मुख्य कारण भौतिक विज्ञानों की विषय वस्तु है। समाज विज्ञानों मे यह कठिनाई इस कारण अधिक है  कि इसकी विषय-वस्तु सजीव है। इसके विपरीत, मौलिक विज्ञानों की विषय-वस्तु निर्जीव है, जिस पर नियंत्रण किया जा सकता है। अतः भौतिक विज्ञानों के परिणाम, अनुसंधानकर्ता की मानसिक दशा से प्रभावित नही होते। अतः वस्तुनिष्ठता अनुसंधानकर्ता की भावना तथा क्षमता से संबंधित है।

वस्तुनिष्ठता की विशेषताएं (vastunisthata ki visheshta)

वस्तुनिष्ठता की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. वस्तुनिष्ठता सामाजिक अनुसंधान मे प्रयुक्त सामग्री संग्रहण का साधन नही है, अपितु यह स्वयं मे एक साध्य है।

2. वस्तुनिष्ठता कोई भौतिक वस्तु नही है, इसका स्वरूप अमूर्त होता है।

3. वस्तुनिष्ठता का संबंध व्यक्ति के विचारों, भावनाओं, मानोवृत्तियों, क्षमताओं और योग्यताओं से है।

4. वस्तुनिष्ठता वह शक्ति है जिसकी सहायता से व्यक्ति घटनाओं को उनके वास्तविक स्वरूप मे दिखाने का प्रयास करता है।

5. वस्तुनिष्ठता वैज्ञानिक भावना का मुख्य तत्व है।

वस्तुनिष्ठता की आवश्यकता और महत्व (vastunisthata ka mahatva)

वस्तुनिष्ठता सामाजिक अनुसंधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है। इसके अभाव में अनुसंधान को विज्ञान सम्मत बनाना संभव नहीं है निम्न कारणों से सामाजिक अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता की आवश्यकता एवं महत्व--

1. पक्षपात रहित निष्कर्ष

सामाजिक अनुसंधानओं को संपादित करने का एकमात्र उद्देश्य यह है कि जो निष्कर्ष निकाले जाएं वह पक्षपात रहित हो। अर्थात यह निष्कर्ष शोधकर्ता के व्यक्तिगत विचारों और दृष्टिकोण से प्रभावित ना हो। पक्षपात रहित निष्कर्ष की प्राप्ति के लिए अध्ययन में वस्तुनिष्ठता अनिवार्य है।

2. मौलिक तथ्यों की प्राप्ति 

मौलिक तथ्यों की प्राप्ति के लिए भी सामाजिक अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता जरूरी है। अध्ययन के द्वारा प्राप्त तथ्यों को सार्वभौमिक सत्य माना जाए इसके लिए यह जरूरी है की सामाजिक अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता को स्थान दिया जाए।

3. वास्तविक अध्ययन 

एक ही वस्तु या घटना का अध्ययन जब अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किया जाए तो इस अध्ययन को वस्तुपरक अध्ययन कहा जाता है। किंतु जब एक ही घटना के बाद में अलग-अलग निष्कर्ष निकाले जाते हैं तो इसका तात्पर्य होता है कि अध्ययन में वास्तविकता की उपेक्षा की गई है। इसलिए सामाजिक अनुसंधान में घटना और तथ्यों में वास्तविकता लाने के लिए वस्तुनिष्ठता अनिवार्य है।

4. सत्यापन के लिए

विज्ञान की मौलिक विशेषता यह है कि उसकी सहायता से जो निष्कर्ष निकाले जाएं वे सत्य तो हो ही इसके साथ ही उनकी कभी भी परीक्षा और पुनः परीक्षा की जा सके। वस्तुनिष्ठ अध्ययन वैज्ञानिक एवं नियमबद्ध होता है। किसी भी वस्तुनिष्ठ अध्ययन को निश्चित नियमों एवं पद्धति के द्वारा दोहरा कर सत्यापित किया जा सकता है। अतः निश्चित एवं सत्यापित निष्कर्ष प्राप्त करने के लिए वस्तुनिष्ठता बहुत जरूरी है।

5. वैज्ञानिक पद्धति का सफल प्रयोग 

सामाजिक अनुसंधान में वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है। वैज्ञानिक पद्धति में वस्तुनिष्ठ नहीं है तब तक उस पद्धति को वैज्ञानिक नहीं कहा जा सकता। अतः वैज्ञानिक पद्धति के सफल प्रयोग के लिए वस्तुनिष्ठता होना जरूरी है

6. नए अनुसंधानों के लिए

वस्तुनिष्ठ अध्ययन से नए-नए अनुसंधान की संभावनाएं प्रकाश में आती है। वस्तुनिष्ठ अध्ययन से संबंधित विषय का विस्तृत अध्ययन करते समय कई ऐसे पक्षो का पता चलता है जिनके  विषय में स्वतंत्र रूप से अध्ययन करना असंभव होता है। इसलिए नए अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता का अत्यंत महत्व है।

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