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6/24/2021

नगरीय समाजशास्त्र का महत्व

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नगरीय समाजशास्त्र का महत्व 

nagariya samajshastra ke adhyayan ka mahatva;प्राचीन और आधुनिक नगरों की प्रगति में जमीन-आसमान का अंतर है। आधुनिक युग विज्ञान प्रौद्योगिकी विकास और प्रगति का युग है। नगर के व्यक्तियों के सामाजिक संबंध मूल्य आदर्श मान्यताएं व्यवहार करने का ढंग, रहन-सहन और मानसिकता आदि में बहुत बदलाव आ गए हैं। इस दृष्टि से नागरिक समाजशास्त्र का महत्व लगातार बढ़ता ही जा रहा है। नगरीय समाजशास्त्र के अध्ययन के महत्व को निम्न अनुसार स्पष्ट किया जा सकता है--

1. नगरीय नियोजन मे सहायक 

वर्तमान में नगरीय नियोजन को अत्यधिक महत्व प्रदान किया जा रहा है। आधुनिक युग में नगर कई समस्याओं से ग्रसित है। इसलिए भी इनका नियोजन करना जरूरी है। नगर के नियोजन के लिए मास्टर प्लान की आवश्यकता होती है। अतः नगरों का नियोजन आधुनिक सभ्य समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आज नागरीकरण और औद्योगीकरण में तेज गति से वृद्धि हो रही है। इस वृद्धि को व्यवस्थित करने के लिए नियोजन अनिवार्य है। नियोजन के अभाव में अनेक समस्याओं का जन्म और विकास होता है। नागरिक समाज विज्ञान में नगर नियोजन का विशेष अध्ययन किया जाता है जो सभी दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

2. नगरीय समस्याओं का अध्ययन 

छोटे-छोटे ग्राम नगरों के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं। तकनीकी प्रगति से नगर की सीमाओं को और अधिक आगे बढ़ा दिया गया है। इसी के साथ नगर की आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं में भी लगातार वृद्धि होती जा रही है। इसका विस्तृत अध्ययन यह शास्त्र करता और उसके निराकरण के लिए भी एक दृष्टि और दिशा प्रदान करता है।

3. नगरीय समाज का विश्लेषण 

नगर की विभिन्न इकाइयों, संस्थाओं समूह और समुदायों का विश्लेषण करके इसका अध्ययन करता है। इस अध्ययन पद्धति से प्रत्येक नगरीय सामाजिक संस्था अथवा संगठन का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इस दृष्टि से प्रत्येक आर्थिक सामाजिक इकाई के विभिन्न पक्षों का ज्ञान प्राप्त होता है।

4. आर्थिक समस्याओं का निवारण 

नगरी जीवन में अनेक प्रकार की समस्या होती है इन समस्याओं में बेरोजगारी, निर्धनता, आवास की समस्या, आर्थिक असंतुलन की समस्या इत्यादि प्रमुख है। अतः इससे संबंधित अनेक समस्याओं को अपने आप ही उद्भव (जन्म) हो जाता है। इन समस्याओं का समाधान करना नगरीय जीवन और समाज के लिए जरूरी है। नगरीय समाज विज्ञान के ज्ञान की सहायता से अनेक आर्थिक समस्याओं का निदान किया जा सकता है।

5. अंतः संबंधो और अंतः क्रियाओं का अध्ययन 

नगर के जटिल व्यवस्था मे अंतः संबंधो और अंतः क्रियाओं को समझना सरल कार्य नहीं है। विभिन्न जाति, संप्रदाय, संगठन, धर्म और वर्ग के मध्य आज किस प्रकार के संबंध हैं और उनमें परस्पर किस प्रकार की अंतःक्रियाएं होती है इसका वैज्ञानिक अध्ययन नगरीय समाजशास्त्र ही करता है। किसी भी नगरीय समस्याओं की पृष्ठभूमि में विभिन्न वर्गों, धर्मो, जातियों और संप्रदायों की परस्पर कटु आहट में जन्मी अन्तः क्रियाओं का परिणाम होती है। जैसे सांप्रदायिक झगड़े और तनाव जातिगत झगड़े इत्यादि।

6. परिवर्तन का अध्ययन 

नगरों और महानगरों में तेजी से बदलाव आ रहा है। नगरी व्यक्ति के मूल्य और मानसिकता में अत्यधिक परिवर्तन देखा जा सकता है। सभ्यता और संस्कृति के सुखदाई दर्शन से संपूर्ण भारतीय संस्कृति के मापदंडों को ही बदल दिया है इन परिवर्तनों का नागरिक समाजशास्त्र व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन करता है।

6. नगरवाद से उपजी चीजों का अध्ययन 

वर्तमान में नगरवाद व्यक्ति के जीवन पद्धति की शैली बन गई है। इसके आकर्षण से नगरों की जनसंख्या के घनत्व में जहां वृद्धि की है। वहीं कई बहुआयामी समस्याओं को भी जन्म दिया है। जैसे रहने की समस्या, गंदी बस्तियां, बेकारी, झगड़े और तनाव भ्रष्टाचार, अनैतिकता, विभिन्न बीमारियाँ एवं रोग इत्यादि।

7. नगरीय विकास मे सहायक 

नगरीय नियोजन का मूल उद्देश्य नगरीय विकास करना होता है। उदाहरणार्थ, ऐसे कार्यक्रमों को संचालित और निर्देशित करना जिनकी सहायता से नगरीय समुदाय के विकास को गति प्रदान की जा सके। ऐसा करने के लिए नगरीय समाज विज्ञान का ज्ञान महत्वपूर्ण है। इसका कारण यह है की नगरीय विकास और उसकी उत्पत्ति करना है। नगरीय समाजशास्त्र के मूल में है, नगरीय समाज विज्ञान के अंतर्गत नगरीय सामाजिक जीवन का सर्वांगीण अध्ययन किया जाता है। यही कारण है कि आधुनिक युग में नगरीय समाज विज्ञान के महत्व में वृद्धि होती जा रही है। यदि गंभीरता से विचार किया जाए तो नागरिक समाज विज्ञान के ज्ञान के अभाव में सामाजिक संगठन का पूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि सभी देशों ने नगरीय समाज विज्ञान की महत्ता को स्वीकार किया है।

9. सामाजिक विघटन के तत्वों का अध्ययन 

नगरी समाज की अपनी विशेषताएं हैं यहां का व्यक्ति व्यक्तिवादी और महत्वकांक्षी है। अपने स्वार्थ को पूरा करने में किसी भी तरह का कार्य कर सकता है। परिणामस्वरुप समाज में वैयक्तिक विघटन, वेश्यावृत्ति, मद्यपान, अनैतिकता, व्यापार, आत्महत्या, अपराध और बाल अपराध में लगातार वृद्धि हो रही है। यह सारे तथ्य समाज को विघटित कर रहे हैं। नगरीय समाजशास्त्र इन सभी का अध्ययन करता है और इनको दूर करने के लिए ठोस सुझाव भी प्रस्तुत करता है।

10. सामाजिक पुनर्निर्माण मे सहायक 

नगरीय समाजशास्त्र नगर की अनेक समस्याओं का अध्ययन करता है। उनके निराकरण के लिए एक दृष्टि और दिशा प्रदान करता है। समाज का पुनर्निर्माण कैसे किया जाए इसके लिए मार्ग का निर्माण करता है और उस मार्ग पर चलने के लिए योजनाओं का निर्माण करता है। इसलिए नागरिक समाजशास्त्र में पुनर्निर्माण के सिद्धांतों की व्याख्या की गई है।

11. ज्ञान की शाखा के रूप मे

कोई भी शास्त्र ज्ञान की एक शाखा होती है वह समाज को नया ज्ञान देती है। एक नई दृष्टि और सोच प्रदान करती है इस दृष्टि से उपयुक्त तथ्य इस बात के प्रमाण हैं कि नगरीय समाजशास्त्र नगर से जुड़ी अनेक आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक चीजों का अध्ययन करता है और समाज को अपने अध्ययन में एक नई जानकारी प्रदान करता है। इसी दृष्टि से नगरीय समाजशास्त्र सामाजिक विज्ञान में ज्ञान की आधुनिकतम शाखा है। 

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