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4/23/2021

वायु प्रदूषण क्या है? स्त्रोत/कारण, दुष्प्रभाव

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वायु प्रदूषण क्या है? (vayu pradushan ka arth)

vayu pradushan arth karan prabhav;जीवमंडल मे वायु का सभी जीवधारियों के लिये अत्यधिक महत्व है। मानव जीवन वायु के बिना संभव ही नही है, क्योंकि मनुष्य आहार के बिना कुछ सप्ताह तक अथवा बिना जल के कुछ दिन तक जीवित रह सकता है। परन्तु वायु के बिना कुछ मिनट तक भी जीवित नही रह सकता है। 

वायु के भौतिक, रासायनिक या जैविक रूप मे ऐसा कोई अवांछनीय परिवर्तन जिसके द्वारा स्वयं मनुष्य के जीवन या अन्य जीवों, जीवन परिस्थितियों, हमारे औद्योगिक प्रक्रमों तथा हमारी सांस्कृतिक संपदा को हानि पहुँचे, उसे वायु प्रदूषण कहा जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार," वायुमण्डल मे विद्यमान अवांछित तत्वों की मात्रा का बढ़ जाना जिसके कारण मनुष्य तथा उसका पर्यावरण हानिकारक रूप से घातक हो सकता है, वायु प्रदूषण कहलाता है।" 

वायु प्रदूषण के स्त्रोत अथवा कारण (vayu pradushan ke karan)

वायु प्रदूषण के दो मुख्य स्त्रोत है जो इस प्रकार हैं---

1. प्राकृतिक स्त्रोत या कारण

कुछ प्राकृतिक क्रियाओं से भी वायु प्रदूषण होता है। ज्वालामुखी उद्गार, राख, चट्टानों के टुकड़ों आदि से वायुमण्डल प्रदूषित होता है। यह सब उद्गार की शक्ति पर निर्भर करता है। परन्तु इन सब का सीमित प्रभाव होता है। वनों मे आग लगना भी वायु प्रदूषण का कभी-कभी कारण बन जाता है। समुद्री लवण के कण, खनिज के कंण आदि भी वायु प्रदूषण मे योगदान करते है। दलदली प्रदेशों मे प्रदार्थों के सड़ने से मिश्रित गैस प्रदूषण फैलाती है। कुछ पौधों से उत्पन्न हाइड्रोजन के यौगिक तथा परागकण भी प्रदूषण का कारण है। कोहरा प्रदूषण का एक मुख्य कारण बनता है। प्राकृतिक स्त्रोतों से होने वाला प्रदूषण वायुमंडल पर सीमित एवं कम हानि कारक होता है क्योंकि प्रकृति स्वयं विभिन्न क्रियाओं से इसमे संतुलन बनाए रखती है।

2. मानवीय स्त्रोत या कारण

मावन ने अपनी विभिन्न क्रियाओं से वायुमण्डल को काफी हद तक प्रदूषित किया है और यह क्रय निरंतर बढ़ता जा रहा है। मानवीय स्त्रोत इस प्रकार है--

(अ) दहन द्वारा 

(A) घरेलू कार्यों मे दहन 

ग्रामीण क्षेत्रों मे जलाऊ लड़की का उपयोग तथा शहरी क्षेत्रों मे ईंटो के भट्टों, खाना पकाने व विभिन्न उद्योगों मे जलाऊ लकड़ी का उपयोग, वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। 

(B) परिवहन के साधनो मे दहन 

परिवहन के साधनो मे वायुयान, जेट विमान, जल, जहाज, रेलगाड़ियाँ, ट्रक, बस, कारें, तिपहिया तथा दुपहिया आदि वाहन शामिल किये जाते है। ये सभी पेट्रोल या डीजल से चलते है। डीजल के जलने पर कार्बन के सूक्ष्म कण, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन व सल्फर के ऑक्साइड उत्पन्न होता है। पेट्रोल चालित वाहन प्रमुख वायु-प्रदूषकों के साथ-साथ लैड भी वातावरण मे मुक्त करते है जो सार्वाधिक घातक है।

(C) ताप विद्युत ऊर्जा हेतु दहन

भारत मे विद्युत उत्पादन मुख्य रूप से कोयले को जलाकर किया जाता है। यह वायू-प्रदूषण का एक स्त्रोत है।

(ब) उद्योगों द्वारा 

उद्योगों द्वारा वायु प्रदूषण समस्या उत्पन्न करना एक गंभीर समस्या है। औद्योगिकरण वायु प्रदूषण एक मुख्य कारण है। मावन की बढ़ती आवश्यकताओं ने औद्योगिकरण की दर को चरम स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। औद्योगीकरण के फलस्वरूप जीवाश्म ईंधनों, कोयला, पेट्रोल आदि का उपयोग काफी बढ़ गया है।

(स) कृषि कार्यों द्वारा 

कृषि कार्यों मे प्रयुक्त कीटनाशी, शाकनाशी, रोगनाशी, खतरपवारनाशी, रसायन धातुएं, उर्वरकों, खेतो से निकले धूल के कण 

व फसल कट जाने पर खेत की बची हुई नरवाई को चलाने व फसलो के भूसे के अतिसूक्ष्म टूकड़े वातावरण मे विसरित होते है। 

(द) विलायकों का प्रयोग 

बढ़ते वाहनो के रखखाव, घरों के रखरखाव, फर्नीचर के रखरखाव के लिए उन पर पेण्ट या वार्निश का प्रयोग किया जाता है। इप पदार्थों मे हाइड्रोकार्बन पदार्थ होते है। ये पदार्थ धीरे-धीरे वायु मे मिलते जाते है, और सान्द्रता मे वृद्धि करते है। ये सूक्ष्म कण वाष्प व नमी के साथ मिश्रित होकर अधिक घातक प्रभाव उत्पन्न करते है।

(ई) व्यक्तिगत आदतें 

धूम्रपान जैसी व्यक्तिगत आदतें कार्बन मोनो ऑक्साइड व पाॅलीसाइक्लिक एरोमेटिक यौगिक उत्पन्न करके वायु प्रदूषण उत्पन्न करने मे सहायक होती है, जिससे स्वयं व्यक्ति और आस-पास के लोगो पर प्रभाव पड़ता है।

इस सभी स्त्रोतों से वायुमंडल प्रदूषित हो रहा है। वास्तव मे मावन ने उद्योग, परिवहन, ऊर्जा आदि के स्त्रोतों मे अद्दितीय प्रगति की है परन्तु इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव वायुमंडल पर पड़ रहा है। स्टाकहोम सम्मेलन मे इस विषय मे काफी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव (vayu pradushan prabhav)

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं--

1. मावन स्वास्थ्य पर प्रभाव 

2. वनस्पति पर प्रभाव 

3. जीव-जन्तुओं पर प्रभाव 

4. जलवायू पर प्रभाव 

5. ग्रीन हाऊस प्रभाव 

कार्बन-डाई-डाइऑक्साइड मे वृद्धि, सूर्य किरणों पर प्रभाव, मौसम पर प्रभाव। 

6. अन्य प्रभाव 

जंग लगना, कागज, कपड़ा, संगमरमर आदि का क्षीण होना। 

अतः वायु प्रदूषण एक क्रमिक रूप से घुलता हुआ जहर है जो न केवल मानव जाति अपितु समस्त जीवन जगत को प्रभावित कर रहा है। भारत मे वायु (प्रदूषण पर नियंत्रण और रोक के उपाय) अधिनियम, 1981 को अधिनियमित किया गया है। इस अधिनियम का उद्देश्य वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। इस अधिनियम की उद्देशिका मे वर्णित है कि यह अधिनियम स्टाकहोम मे हुए मानवीय पर्यावरण सम्मेलन के निर्णयों की क्रियान्विति को परिलक्षित करता है। यह अधिनियम 16-5-1981 से लागू किया गया है। इस अधिनियम के निम्न रोचक पहलू है--

1. यह अधिनियम सरकार को विवेकाधिकार देता है कि वह वायु प्रदूषण की रोकथाम करे। प्रत्येक उद्योगपति को अपने संयंत्र से वायु प्रदूषण नियंत्रण करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसे उद्योगों को राज्य बोर्ड से परमिट प्राप्त करना चाहिए।

2. यह अधिनियम एक मजिस्ट्रेट को वायु प्रदूषण करने वाले को प्रतिबंधित करने का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिनियम केन्द्रीय बोर्ड एवं राज्य बोर्डो को यह शक्ति प्रदत्त करता है कि वे उद्योगों को समुचित निर्देश कर सकते है और अगर वे उद्योग उनका अनुसरण नही करते है तो बोर्ड उद्योग को बंद करने का आदेश दे सकता है या पानी और ऊर्जा शक्ति को न प्रदान करने के आदेश भी दे सकता है।

3. इस अधिनियम के अंतर्गत वायु प्रदूषण के दोषी व्यक्तियों को अधिक दण्ड या सजा देने के उपबन्ध है।

4. इस अधिनियम के तहत नागरिकों को अधिकार है कि वे इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु मुकदमे कर सकते है और उद्योगों को इस अधिनियम की अनुपालना करने को बाध्य करा सकते है। इस उद्देश्य हेतु वे संबंधित बोर्ड से आवश्यक सामग्री प्रदान करने को कह सकते है ताकि वे अपना मुकदमा ठीक प्रकार से चला सके।

यह भी पढ़ें; वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय अथवा सुझाव

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