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3/04/2021

कुतुबुद्दीन ऐबक समस्याएं, उपलब्धियां

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कुतुबुद्दीन ऐबक कौन था? (kutubuddin aibak kon tha)

kutubuddin aibak ki samasya uplabdhi;कुतुबद्दीन ऐबक भारत में तुर्क साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक था। मध्य एशिया तथा आज के तुर्किस्तान का निवासी था। बचपन से ही वह कुशाग्र बुद्धि वाला प्रतिभाशाली था, लेकिन कुरूप था। बचपन में ही उसे गुलाम बना दिया गया। कुछ ही समय में वह मुहम्मद गोरी का गुलाम हो गया। जब गोरी ने भारत पर आक्रमण किया तो ऐबक उसके साथ भारत आया था और उसके साथ समस्थ युद्धों में भाग लिया और उसे अत्यधिक सहायता दी। अतः तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद मुहम्म्द गोरी को अपने जीते हुए प्रदेशों के लिये अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया।

कुतुबुद्दीन ऐबक की समस्यांए (kutubuddin aibak ki samasya)

जिस समय कुतुबुद्दीन ऐबक स्वतंत्र शासक बना उसके सामने अनेक समस्यांए थीं, जिनका समुचित समाधान किया जाना अत्यंत आवश्यक था। कुतुबुद्दीन ऐबक की समस्याएं इस प्रकार थी--

1. अमीरों की समस्या

ऐबक जब राजगद्दी पर बैठा तो उसके सामने अमीर उसे अपना सुल्तान स्वीकार करने के लिये तैयार नही थे। यल्दौज, कुबाचा तथा खिलजी सरदार उसकी अधीनता स्वीकार करना अपमान समझते थे। इस कठिन परिस्थिति के निराकरण के लिये ऐबक को कभी संघर्ष करना पड़ा।

2. हिन्दू राज्य

हिन्दू राज्यों की बढ़ती हुई शक्ति भी ऐबक के लिये चुनौती बनी हुई थी क्येाकि उत्तर भारत के हिन्दू शासक उसे विदेशी आक्रमणीकारी मानकर उसके अधीन होने की अपेक्षा उसकी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने को तत्पर रहते थे। 

3. सीमा प्रांतों की सुरक्षा 

ऐबक के लिये आवश्यक था कि वह सीमा प्रान्तों की सुरक्षा का सही तरीके से प्रबंध करे। ख्वारिज्म के शाह ने मध्य एशिया में जिस विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी उसे देखते हुए ऐसा करना और भी जरूरी था।

4. सशक्त सामन्त व अधिकारी 

इसके शासन के अतंर्गत तुर्की सामन्तों व अधिकारियों में भी पारस्परिक वैमनस्य और संघर्ष था। ऐबक को यह आशंका होने लगी थी कि भारतीय नरेश इसका लाभ उठाकर स्वतंत्र होने का प्रयत्न करने लगेंगे।

5. आन्तरिक अशान्ति व अव्यवस्था 

सम्पूर्ण उत्तरी भारत में विद्रोही के कारण आन्तरिक-व्यवस्था, प्रशासन और कानून शिथिल हो गये थे। चतुर्दिक अशान्ति और अव्यवस्था व्याप्त थी। ऐबक के लिए स्थायी साम्राज्य करने के लिये शान्ति, कानून और व्यवस्था स्थापित करना अत्यन्त आवश्यक था। 

कुतुबुद्दीन ऐबक की उपलब्धियां (kutubuddin aibak ki uplabdhi)

कुतुबुद्दीन ऐबक की उपलब्धियां इस प्रकार है--

1. तुर्की सरदारों का सहयोग 

भारत में अपनी स्वतंत्र प्रभुत्व स्थापित करने के लियें ऐबक ने प्रमुख तुर्की सरदारों को अपने अधीन करने में सफलता प्राप्त की। वैवाहिक सम्बन्धों द्वारा भी उसकी स्थिति सुदृढ़ हुई। ऐबक इल्तुतमिश से हुआ था। उसे बदायूं का शासक बनाया गया। कुबाचा से ऐबक ने अपनी बहन का विवाह किया था। इस कारण से कुबाजा की और तत्काल कोई समस्या का सामना न करना पड़ा।

2. यल्दूज का दमन एंव गजनी से सम्बन्ध विच्छेद

मोहम्मद गौरी के तीन सेनापतियों में से एक यल्दूज जो की गजनी का शासक बनने मे सफल हो गया था, ऐबक को भी अपनी अधीनता में मानता था। 1208 में यल्दूज ने मुल्तान पर आक्रमण कर अपना अधिकार कर लिया। ऐबक और उसके सैनिकों ने प्रति गजनी निवासियों के असन्तोष का लाभ उठाकर यल्दूज गजनी वापस प्राप्त करने में सफल हो गया। गजनी पर ऐबक का कब्जा 40 दिन तक रहा। ऐबक को गजनी अभियान का सबसे बड़ा लाभ यही मिला कि भारत का गजनी से सम्बन्ध विच्छेद हो गया। याल्दूज को ऐबक की शक्ति का पता चल गया। ऐबक के स्वंतत्र अस्तित्व को भी मान्यता प्राप्त हो गई। 

3. बंगाल-अलीमर्दन द्वारा अधीनता स्वीकार

मुहम्मद बख्तियार खलजी की मृत्यु के बाद अलीमर्दन खां खलजी बंगाल का स्वतंत्र शासक बन बैठा। खलजी सरदारों के आपसी संघर्ष के फलस्वरूप अलीमर्दन भागकर ऐबक की शरण में आया। ऐबक के प्रतिनिधि कैमज रूमी की मदद से अलीमर्दन को बंगाल का सूबेदार बनाया गया। उसने ऐबक की अधीनता स्वीकार की।

4. राजपूत

गजनी तथा बंगाल की समस्याओं में अधिक व्यस्त रहने से ऐबक को राजपूतों पर दबाव डालनें का समय नहीं मिल सका। कालिंजर या ग्वालियर पुनः जीतने की योजना नहीं बन सकी।

5. निर्माण कार्य 

दिल्ली की ‘कुवत-उल-इस्लाम‘ मस्जिद तथा अजमेर की ‘अढाई दिन का झोपड़ा‘ मस्जिद के निर्माण का श्रेय कुतुबुद्दीन ऐबक को जाता है। प्रसिद्ध कुतुब मीनार के निर्माण का कार्य भी ऐबक ने शुरू किया था। तीनों इमारतों के विस्तार एंव पूरा करने का श्रेय इल्तुतमिश को है।

कुतुबुद्दीन ऐबक का मूल्यांकन

कुतुबुद्दीन ऐबक अत्यन्त साहसी, धैर्यवान व्यक्ति था। वह एक साधारण दास की स्थिति से अपनी योग्यता एंव स्वामिभक्ति के बल पर गोरी के भारतीय साम्राज्य का प्रतिनिधि तथा दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान बना। अपने प्रयत्नों से गजनी से संबंध विच्छेद कर भारत को उसके प्रभुत्व से मुक्त कर दिया। ऐबक के बारे में हसन निजामी लिखते है। ‘‘वह न्यायप्रिय शासक था। उसने जनता को शांति व समृद्धि प्रदान की।''

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