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2/27/2021

क्षतिपूर्ति और गारंटी अनुबंध के बीच अंतर

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क्षतिपूर्ति (हानिरक्षा) और गारंटी (प्रतिभूति) अनुबंध के बीच का अंतर

क्षतिपूर्ति और गारंटी के बीच अंतर इस प्रकार है--

1. क्षतिपूर्ति अनुबंध मे केवल दो पक्षकार होते है-- एक क्षतिपूर्ति कराने वाला और दूसरा क्षतिपूर्ति करने वाला। गारंटी अनुबंध मे तीन पक्षकार होते है प्रथम प्रतिभूति, दूसरा मूल ऋणी तथा तीसरा ऋणदाता।

2. क्षतिपूर्ति अनुबंध मे प्रस्तावक का उत्तरदायित्व मुख्य होता है क्योंकि प्रस्तावक वचनगृहीता को किसी ऐसी क्षति से बचाने की प्रतिज्ञा करता है जिससे उसको प्रस्तावक या अन्य व्यक्ति के आचरण से पहुंचे। प्रतिभूति अनुबंध मे जमानतदार का उत्तरदायित्व गौण रहता है इसमे प्रतिभू केवल तीसरे पक्षकार द्वारा त्रुटि करने की दशा मे उसके उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिये बाध्य होता है। 

3. क्षतिपूर्ति के अनुबंध का क्षेत्र सीमित है। इसमे गारंटी अनुबंध को सम्मालित नही किया जा सकता। जबकि प्रतिभूति का क्षेत्र विस्तृत होता है, इसमे क्षतिपूर्ति का अनुबंध सम्मिलित होता है। 

4. क्षतिपूर्ति अनुबंध मे क्षतिपूर्ति कराने वाले और क्षतिपूर्ति करने वालों के मध्य एक अनुबंध होता है। प्रतिभूति अनुबंध मे तीन अनुबंध होते है-- प्रथम मूलऋणी एवं ऋणदाता के बीच, द्धितीय ऋणदाता और प्रतिभू के बीच और तीसरा प्रतिभू और ऋणी के मध्य। 

5. क्षतिपूर्ति अनुबंध का उद्देश्य प्रभावी अनिश्चित घटना से बचना है। गारंटी का उद्देश्य दूसरे व्यक्ति के ऋण के भुगतान का उत्तरदायित्व लेना है। 

6. क्षतिपूर्ति अनुबंध मे क्षतिपूर्ति करने वाले का उत्तरदायित्व प्राथमिक होता है। गारंटी मे जमानतदार का उत्तरदायित्व द्धितीय होता है, यह ऋणी द्वारा त्रुटि करने की दशा मे उत्पन्न होता है।

7.  क्षतिपूर्ति के अनुबंध मे प्रस्तावक समर्पण को छोड़कर अन्य परिस्थितियों मे क्षतिपूर्ति करने के बाद अपने नाम मे तीसरे पक्षकार पर वाद प्रस्तुत नही कर सकता। प्रतिभूति अनुबंध मे प्रतिभू अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार मूल ऋण की देनदारी चुकाने के बाद, अपने नाम मे मूल ऋणी पर वाद प्रस्तुत कर सकता है। 

8. क्षतिपूर्ति का अनुबंध क्षति के भुगतान के लिये होता है। गारंटी अनुबंध ऋणदाता की जमानत के रूप मे होता है। 

9. क्षतिपूर्ति अनुबंध मे हानि रक्षाधारी का व्यवहार मे कुछ हित होता है। प्रतिभूति अनुबंध मे जमानतदार का कोई हित व्यवहार मे नही होता।

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