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1/21/2021

विकेन्द्रीकरण क्या है? विशेषताएं, गुण एवं दोष

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विकेन्द्रीकरण का अर्थ (vikendrikaran kya hai)

विकेन्द्रीकरण के निम्म पांच पक्ष है--

1. सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस ढंग से किया जाये कि अधीनस्थ कर्मचारियों को अपने विवेक के अनुसार काम करने के लिये अधिकाधिक क्षेत्र मिले और ऊपर मुख्य अधिकारी के पास अपेक्षाकृत कम से कम मामले निर्णय के लिये भेजे जायें। (प्रशासनिक)

2. संगठन के अंगों को अधिकाधिक शक्ति का हस्तांतरण और मुख्य दफ्तर के हाथ मे नियंत्रण के कुछ आवश्यक अधिकार ही बचे रहें। (प्रशासनिक) 

3. निर्वाचित अंगो के पास अधिक शक्ति और प्रशासन मे जनता का अधिकाधिक सहभाग हो।

4. मुख्य कार्यालय से दूर और जनता के निकटस्थ स्थानीय इकाइयों या अभिकरणों को स्वतंत्रता प्राप्त हो। (भौगोलिक) 

5. कार्य संबंधी अनेक विभागों को व्यावसायिक स्वायत्तता। (कार्यपरक) 

वर्तमान युग मे प्रशासकीय जटिलताएं इतनी बढ़ गई है कि प्रशासकीय कार्यों का एक स्थान ही स्थान पर होना संभव नही है। विकेन्द्रिकरण सत्ता, शक्ति और उत्तरदायित्व को इस आधार पर विभाजित करता है कि मुख्यालय एवं क्षेत्रीय इकाईयों को समन्वित इकाइयों की तरह कार्य करने का सहज अवसर मिलता है।

विकेन्द्रीकरण के लक्षण या विशेषताएं (vikendrikaran ki visheshta)

1. आंशिक रूप से सत्ता का हस्तांतरण क्षेत्रीय कार्यालयों को।

2. स्थानीय एवं आंचलिक समस्याओं के बारे मे क्षेत्रीय तथा स्थानीय कार्यालयों को निर्णय लेने का अधिकार।

3. जनता के सहयोग से कार्य विशेषकर स्थानीय जनता का सहयोग।

4. प्रशासकीय निर्णयों को लागू करना।

5. उत्तरदायित्व के साथ सत्ता का जुड़ाव।

एलेन के अनुसार," इस व्यवस्था मे केन्द्र के पास कुछ ही सत्ता को छोड़कर शेष सत्ता निम्न स्तर तक विभाजित कर दी जाती है। विकेन्द्रीकर मे प्रश्न सत्ता के उपयोग के साथ उत्तरदायित्व का भी रहता है।

विकेन्द्रीकरण के गुण (vikendrikaran ke gun)

जो दोष हमे केन्द्रीय शासन व्यवस्था मे देखने को मिलते है, विकेन्द्रीकरण मे स्वतः मुक्ति मिल जाती। विकेन्द्रिकृत व्यवस्था के पक्ष मे कई तर्क दिये जा सकते है।

विकेन्द्रीकरण व्यवस्था के गुण इस प्रकार है--

 1.  इस  व्यवस्था मे जनता को राजनीतिक कार्यों मे भाग लेने का अवसर मिलता है, अतएव प्रशासन की लोकप्रियता बढ़ती है। 

2. प्रशासन के नियम जनता की आवश्यकतानुसार परिवर्तित किये जा सकते है। 

3.  स्थानीय समस्याओं का जनआकांक्षाओं के अनुसार समाधान आसानी से संभव है।

4. प्रशासकीय परीक्षण आसानी से किये जा सकते है।

5. अधिकारियों के हाथों मे अनेक कार्य और शक्तियाँ होने से उनका उत्साह बढ़ा रहता है।

6. केन्द्रीय कार्यालय का कार्यभार हल्का हो जाता है।

7. लोकतंत्र व्यापक एवं वास्तविक बनता है।

8. कोई भी कार्य एकत्रित नही होता (पेंडिंग नही होत) तथा समस्याओं के निराकरण मे वास्तविकता आ जाती है।

विकेन्द्रीकरण के दोष (vikendrikaran ke dosh)

विकेन्द्रीकरण के दोष इस प्रकार है--

1. क्षेत्रीय अधिकारियों की स्वेच्छाचारिता बढ़ जाती है।

2. शासकीय कार्यों पर स्थानीय राजनीति का प्रभाव पड़ता है।

3. विभिन्न क्षेत्रों मे अलग-अलग प्रकार की प्रशासकीय इकाईयाँ होती है। इससे देश की एकता खंडित होती है।

4. क्षेत्रीय हितों के चक्कर मे कई बार कर्मचारी राष्ट्रीय हितों को भी तिलांजलि दे देता है जो घातक है।

5. उत्तरदायित्व के विभाजित होने का आशय होता है; किसी का भी उत्तदायित्व नही।

6. राजनैतिक गुटबाजी को प्रोत्साहन मिलता है।

7. धप और समय की बर्बादी होती है क्योंकि प्रशासन का दोहरापन होता है।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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