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12/30/2020

व्यावसायिक नीतिशास्त्र की विशेषताएं, महत्व या आवश्यकता

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व्यावसायिक नीतिशास्त्र की विशेषताएं (vyavsayik niti shastra ki visheshta)

व्यावसायिक नीतिशास्त्र की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. सामाजिक कल्याण से प्रेरित 

व्यावसायिक नीतिशास्त्र समाज के कल्याण, प्रगति तथा समृद्धि एवं सामाजिक हित की भावना से प्रेरित है। यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य मे व्यवसाय एवं मानवीय उद्देश्यो के आपसी संबंध को निर्धारित एवं प्रभावित करता है। 

पढ़ना न भूलें; व्यावसायिक नीतिशास्त्र क्या है? परिभाषा, मान्यताएं

2. लक्ष्य एवं साधनों की नैतिकता पर बल 

व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यवसाय मे पवित्र लक्ष्यो तथा उनकी पूर्ति के लिए पवित्र साधनो पर बल देता है। लक्ष्य एवं साधन दोनों का नैतिक होना आवश्यक है।

3. यह एक गतिशील दर्शन है 

यह समाज के परिवर्तनशील नैतिक मानदण्डों व आचरण के आदर्शो को समाहित करता है तथा परिवर्तनशील पर्यावरण से उपजे नये दायित्वों को स्वीकार करता है तथा इनका समावेश करता है। यह व्यवसाय के गतिशील परिवेश का एक आधारभूत दर्शन है।

4. सामाजिक सांस्कृतिक मूल्यों से प्रभावित 

व्यावसायिक नीतिकता सामाजिक व्यवस्थाओं, मानकों, मूल्यों तथा संस्कृति के मुख्य आधारों पर मूल्यो से बहुत अधिक प्रभावित रहता है। विभिन्न समाजो एवं संस्कृतियों के लोगों की आश्थाओं, विश्वासों, संस्कारों, परम्पराओं तथा रीति-रिवाजों का व्यावसायिक नीतिशास्त्र पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

5. एक सार्वभौमिक दर्शन 

व्यवसायिक नीतिशास्त्र का दर्शन सार्वभौमिक है। इसका संबंध सत्य, सद-आचरण एवं उच्च चरित्र को बनाये रखने से है। व्यवसाय एक मानवीय संगठन है और व्यवसाय की समस्याएं भी मानवीय है, अतः जहाँ भी व्यावसायिक क्रियाएं होगी वहां पर व्यावसायिक नीतिशास्त्र संबंधी प्रश्नों पर विचार करना आवश्यक होगा।

6. नैतिक मूल्यों का पालन 

व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यावसायिक प्रक्रियाओं तथा आचरण मे उच्च नैतिक मूल्यों, आदर्शों व धारणाओं को बनाए रखने पर बल देता है। यह नैतिकता के उच्च स्तरों को स्वीकार करता है। व्यवसाय संचालन मे ईमानदारी, सत्य कथन, स्पष्टवादिता तथा पारदर्शिता आदि नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए।

7. सामाजिक कल्याण से प्रेरित 

व्यावसायिक नीतिशास्त्र सामाजिक कल्याण, प्रगति व समृद्धि व सामाजिक हित की भावना से प्रेरित है। यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य मे व्यवसाय एवं मानवीय उद्देश्यो के आपसी संबंध को निर्धारित करता है। यह जनहित की दृष्टि के व्यवसाय के आचरण के नियम निर्धारित करता है।

व्यावसायिक नीतिशास्त्र का महत्व एवं आवश्यकता (vyavsayik niti shastra ka mahatva)

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे नैतिक मूल्यों का योगदान होता है। व्यवसाय मे नैतिक मूल्यों एवं एक नीतिशास्त्र की आवश्यकता व्यवसाय की शुरुआत के साथ ही अनुभव की गई। लेकिन विगत कुछ वर्षों मे व्यावसायिक नीतिशास्त्र पर अधिकाधिक बल दिया जाने लगा है। आजकल यह माना जाने लगा है कि किसी भी व्यवसाय की दीर्घकालीन सफलता का संबंध व्यावसायिक नीतिशास्त्र से होता है। 

व्यवसाय एवं समाज मे व्यावसायिक नीतिशास्त्र का महत्व या आवश्यकता इस प्रकार से है-- 

1. नैतिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने वाले व्यवसाय मे सेवा नियोजकों, कर्मचारियों तथा श्रमिक संघो मे मधुर संबंध स्थापित होते है। परिणामस्वरूप श्रमिक अधिक उत्पादन करने मे सहयोग करते है और व्यवसायियों की संपत्तियों का लाभकारी विनियोग होता है।

2. व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यवसायी को श्रेष्ठ सामाजिक लक्ष्यों की स्थापना करके उनकी पूर्ति के लिए नैतिक व पवित्र साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

3. नैतिक मानको व सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने वाले व्यवसायी को समाज का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है तथा व्यवसायी को भी मनोवैज्ञानिक दृष्टि से सन्तुष्टि प्राप्त होती है।

4. व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यवसाय मे उच्च नैतिक मानदण्डों व आदर्शों की स्थापना करता है। नीतिशास्त्र ही व्यवसाय मे अच्छे और बूरे, सही और गलत निर्णयों, कार्यों व साधनों की व्याख्या करता है तथा व्यवसाय का मार्गदर्शन करता है।

5. व्यावसायिक नीतिशास्त्र मूल्यों व आदर्शों का पालन करने की राह दिखाने के माध्यम से व्यक्तियों एवं समाज के विकास मे सहायक होता है। यह व्यवसाय को व्यक्ति एवं समाज के जीवन के सम्पूर्ण ढाँचे को व्यवस्थित करता है।

6. व्यावसायिक नीतिशास्त्र के सिद्धांतों का पालन किये जाने से व्यवसायियों के विक्रय मे वृद्धि होती है तथा ग्राहक नियमित रूप से वस्तुएं एवं सेवाएं क्रय करते है और नये ग्राहकों का सृजन होता है।

7. व्यावसायिक नैतिकता व्यवसायी की क्रियाओं व आचरण को सामाजिक हितों व लक्ष्यों के अनुरूप बनाता है तथा समाज एवं इसके विभिन्न वर्गों व संस्थाओं के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाये रखने का प्रयास करता है।

8. व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यवसायी के कार्य शैली व उसकी जीवन पद्धति मे सुधार लाता है।

9. व्यावसायिक नीतिशास्त्र व्यवसायी वर्ग उत्तम भावनाओं, आकांक्षाओं, कामनाओं का संचार करता है, जागृत करता है तथा अनेक व्यवहारों को विवेकपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित करता है।

10. नैतिक मानकों व सिद्धांतों का जिन व्यावसायिक संस्थाओं मे पालन किया जाता है उनकी साख मे वृद्धि होती है तथा एक अच्छी छवि बनती है। ऐसी संस्थाओं का कार्य अधिक सुचारू रूप से चलता है, कार्यकुशलता मे वृद्धि होती है तथा सामाजिक लागतों मे कमी आती है।

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