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12/23/2020

उत्पादन फलन का अर्थ, परिभाषा, मान्यताएं, विशेषताएं

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उत्पादन फलन का अर्थ (utpadan falan kya hai)

utpadan falan arth paribhasha visheshtaye manyataye;उत्पादन फलन उत्पादन सम्भावनाओं की सूची है। वस्तु का उत्पादन उत्पति के विभिन्न साधनों के परस्पर संयोग से होता है। जो वस्तु उत्पादित होती है, उसे उत्पाद (ouput) एवं साधनों द्वारा उत्पादन किया जाता है, उसे आगत (input) कहते है। किसी फर्म के उत्पादों एवं आगतों के मध्य के सम्बन्धों को उत्पादन फलन कहते है। उत्पादन फलन यह दर्शाता है कि ज्ञान और प्रबंध योग्यता की सहायता से उत्पादक आगतों के विभिन्न संयोजन से उत्पादन की अधिकतम मात्रा किस प्रकार प्राप्त की जाय। 

उत्पादन फलन की परिभाषा (utpadan falan ki paribhasha)

प्रो. लेफ्टविच के अनुसार," उत्पादन फलन शब्द उस भौतिक संबंध के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो एक फर्म के साधनों के आगत इकाइयों और प्रति इकाई समयानुसार प्राप्त वस्तुओं और सेवाओं (उत्पादों) के मध्य पाया जाता है।" 

प्रो. साइटवस्की के अनुसार, " किसी भी फर्म का उत्पादन उत्पत्ति के साधनों का फलन है और यदि गणितीय रूप मे रखा जाये तो उसे उत्पादन फलन (प्रकार्य) कहते है।" 

प्रो. सेम्युलसन के अनुसार," उत्पादन फलन वह प्राविधिक संबंध है जो यह बतलाता है कि पड़तो (उत्पत्ति के साधनों) के विशेष समूह के द्वारा कितना उत्पाद (उत्पादन) किया जा सकता है। यह किसी दी हुई प्राविधिक ज्ञान की स्थिति के लिए परिभाषित या सम्बन्धित होता है। 

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते है कि उत्पादन फलन किसी उत्पादन क्रिया मे उत्पादन तथा उत्पत्ति के साधनों का आपसी उत्पादन संबंध है।

उत्पादन फलन की मान्यताएं (utpadan falan ki manyataye)

उत्पादन फलन की मान्यताएं इस प्रकार से है--

1. तकनीकी ज्ञान की स्थिर स्थिति 

यह पूर्व मे ही मान लिया जाता है किसी समय विशेष के अंतर्गत तकनीकी ज्ञान अथवा उत्पादन कला की स्थिति मे दिये हुए समय मे कोई परिवर्तन नही होता है या वह स्थिर रहते है। 

2. कुशल प्रविधि 

उत्पादन फलन इस मान्यता पर आधारित होता है कि फर्म किसी विशेष समय मे प्राप्त उत्पादन की अधिकतम कुशल प्रविधि का प्रयोग करेगी जबकि फर्म के लिए लागत खर्च या उत्पादन खर्च दिया हुआ है। 

3. छोटी इकाईयों मे विभाजन 

उत्पादन फलन उत्पत्ति के विभिन्न साधनों को छोटी-छोटी इकाईयों मे विभाजित किया जा सकता है। 

4. भौतिक संबंधों का प्रदर्शन 

उत्पादन फलन उत्पत्ति साधनों की मात्रा एवं उनके द्वारा उत्पादित वस्तु के भौतिक संबंधों को दर्शाता है।

5. उत्पादन के साधनों मे दी हुई कीमतें 

उत्पादन के साधनों के लिए मूल्य स्थिर होते है। 

6. निश्चित समयावधि 

उत्पादन फलन केवल एक दिये हुये निम्न समय के लिये सत्य होता है, अन्य समयों के लिये नही।

7. अपरिवर्तनीय विधि 

निर्धारित समय विशेष मे उत्पादन की प्रविधि या उत्पादन कला की स्थिति मे किसी प्रकार का परिवर्तन नही होना चाहिए।

उत्पादन फलन की विशेषताएं (utpadan falan ki visheshta)

उत्पादन फलन की विशेषताएं इस प्रकार से है--

1. पारस्परिक संबंध 

उत्पादन फलन, उत्पादन तथा उत्पत्ति के साधनों का पारस्परिक संबंध बतलाता है।

2. इन्जीनिरिंग समस्या 

उत्पादन फलन, इन्जीनिरिंग समस्या है न कि आर्थिक समस्या। अतः इसका अध्ययन उत्पादन इन्जीनिरिंग मे होता है।

3. टेक्नोलोजी द्वारा निर्धारित 

प्रत्येक फर्म का उत्पादन फलन टेक्नोलोजी द्वारा निर्धारित होता है, टेक्नोलोजी मे सुधार होने पर नया उत्पादन फलन बन जाता है। नये उत्पादन फलन मे पूर्ण साधनों से अधिक उत्पादन होता है।

4. दिये हुये समय या प्रति इकाई समय मे 

उत्पादन सदा एक दिये हुये समय या प्रति इकाई समय संदर्भ मे ही व्यक्त होता है।

5. उत्पत्ति के साधन की मात्रा 

किसी भी उत्पत्ति के साधन की मात्रा को उसके कार्य करने की लम्बाई मे मापा जाता है, जैसे-- श्रम को श्रम घण्टों मे, मशीन को मशीन घण्टों मे आदि। 

उत्पादन फलन का महत्व (utpadan falan ki mahatva)

उत्पादन फलन का अध्ययन उत्पादन के क्षेत्र मे विशेष महत्वपूर्ण है। उत्पादन तथा उत्पत्ति के साधनों के बीच उत्पादन बताते हुये उतपत्ति के तीनों नियमों की जानकारी देता है। उत्पादन फलन से ज्ञात होता है कि किसी देश मे उत्पादन तकनीकी किस स्तर पर है। यदि कोई देश विश्व की कुशल तकनीक को अपनाकर उत्पादन करता है तो कम साधनों मे अधिकतम उत्पादन कर सकता है। एक फर्म का उद्देश्य अधिकतम लाभ प्राप्त करना होता है जिसके लिये उसे उत्पाद की न्यूनतम लागत करना आवश्यक होता है, इसके लिये फर्म उत्पादन फलन की सहायता लेती है। इसलिये बड़े-बड़े कारखानों मे इन्जीनिरिंग विभाग नये-नये उत्पादन फलन की सारणी बनाकर, आदर्श उत्पादन-फलन सारणी ज्ञात करके अपनी फर्म को आदर्श फर्म बनाने का प्रयत्न करते रहते है।

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