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12/22/2020

मांग की लोच मापने की विधियां

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मांग की लोच मापने की विधियां

मांग की लोच मापने की विधियां इस प्रकार से है--

1. इकाई रीति 

यह रीति मार्शल द्वारा प्रतिपादित है। इस विधि के अनुसार, मांग और मूल्य के सापेक्षिक परिवर्तन से लोच की इकाई तय की जाती है। मांग मे अनुपात से अधिक वृद्धि पर लोच " इकाई से अधिक " तथा अनुपात से कम वृद्धि होने पर लोच " इकाई से कम " मानी जाती है। 

(अ) मांग की लोक इकाई के बराबर 

जब किसी वस्तु की मांग मे ठीक उसी अनुपात मे परिवर्तन हो, जिस अनुपात मे उसके मूल्य मे परिवर्तन हुआ है, तब उस वस्तु की मांग लोच " इकाई के बारबर " कही जाती है। उदाहरणार्थ, यदि वस्तु का मूल्य दुगुना हो जाये, तब मांग आधी हो जाती है। ऐसी अवस्था मे जितना रूपया वस्तु खरीदने मे खर्च किया जाता है। (प्रति इकाई मूल्य + खरीदी जाने वाली इकाइयों की कुल मात्रा) वह सदैव समान रहती है, चाहे वस्तु के मूल्य मे कितनी वृद्धि या कमी क्यों न हो। प्रायः सुखकर वस्तुओं की मांग लोचदार होती है इसका मापन संकेत लोच = 1 होता है। 

(ब) मांग की लोच इकाई से अधिक 

जब मूल्य मे उपस्थित परिवर्तन से अधिक परिवर्तन वस्तु की मांग मे होता है, तब वस्तु की मांग की लोच को इकाई से अधिक कहा जाता है। उदाहरण के लिए, मूल्य मे 20 प्रतिशत कमी होने पर मांग मे 50 प्रतिशत वृद्धि हो जाये या वस्तु मे 20 प्रतिशत वृद्धि होने पर मांग मे 50 प्रतिशत कमी हो जाये। ऐसी दशा मे वस्तु के खरीदने मे जितना रूपया खर्च किया जाता है वह मूल्य के बढ़ने पर घट जाता है तथा मूल्य घटने पर बढ़ जाता है। प्रायः विलास-वस्तुओं की मांग अधिक लोचदार होती है। इस प्रकार की लोच का मापन संकेत लोच > 1 होता है।

(स) मांग की लोच इकाई से कम 

जब मूल्य मे उपस्थित परिवर्तन से कम परिवर्तन वस्तु की मांग से होता है, तब वस्तु की मांग की लोच इकाई से कम कही जाती है। उदाहरण के लिए मूल्य मे 50 प्रतिशत की कमी होने पर मांग मे केवल 20 प्रतिशत ही वृद्धि हो या मूल्य मे 50 प्रतिशत की वृद्धि हो जाने पर मांग मे केवल 20 प्रतिशत की कमी हो। ऐसी अवस्था मे वस्तु के खरीदने मे जो रूपया खर्च किया जाता है, वह मूल्य के बढ़ने पर बढ़ जाता है और मूल्य के घटने पर घट जाता है। प्रायः आवश्यक वस्तुओं की मांग कम लोचदार होती है। इसका मापन-संकेत लोच < 1 होता है।

2. प्रतिशत रीति या आनुपातिक विधि 

मांग की लोच मापने की दूसरी विधि के प्रतिपादक फ्लक्स है। फ्लक्स ने भी मांग की लोच को इकाई के बराबर इकाई से अधिक तथा इकाई से कम तीन श्रेणियों मे विभाजित किया है, किन्तु उनका आधार भिन्न रखा है। उनकी रीति के अनुसार पहले यह देखना होता है कि मूल्य मे जो परिवर्तन हुआ है, वह पहले मूल्य का कितना प्रतिशत है इसके बाद मांग मे जो परिवर्तन हुआ है, वह पिछली मांग का कितना प्रतिशत है। आनुपातिक या प्रतिशत विधि के अनुसार माँग की लोच ज्ञात करने का सूत्र इस प्रकार से है-- 

 मांग गई मात्रा मे प्रतिशत परिवर्तन 

मांग की लोच = ---------------------------

कीमत मे प्रतिशत परिवर्तन 

मांगी गई मात्रा मे परिवर्तन/मांगी गई मात्रा (प्रारम्भिक) 

=    --------------------------------

कीमत मे परिवर्तन/कीमत (प्रारम्भिक) 

3. बिन्दु रीति या रेखागणितीय विधि 

बोल्डिंग ने मांग की लोच मापने के लिये एक और ढंग बताया है। इस विधि के अंतर्गत मांग-- रेखा के किसी भी बिन्दु पर मांग की लोच जानने के लिये मांग-रेखा के उस बिन्दु से नीचे वाले अंश को, उस बिन्दु के ऊपर वाले अंश से भाग दिया जाता है।

4. चाप विधि 

यद्यपि मांग की लोच मापने के लिये बिन्दु- पद्धति पर्याप्त सन्तोषजनक है, तथापि इस पद्धति द्वारा मांग की लोओ मापना कठिन है; क्योंकि व्यावहारिक जगत मे मूल्य तथा मांगी गई मात्रा मे सूक्ष्म परिवर्तनों की मांग सारणियां बहुत कम उपलब्ध होती है, जिसमे मांग तथा मूल्य मे पर्याप्त घट-बढ होती है। उदाहरण के लिये, वस्तु का मूल्य एक रूपये से बढ़कर दो रूपये हो जाता है। प्रारंभिक मूल्य मे 100 प्रतिशत की वृद्धि मूल्य मे पर्याप्त बड़ा परिवर्तन है। ऐसी स्थिति मे मांग की लोच मापने के लिए मूल्य एवं मांग की पुरानी तथा नई संख्याओं के मध्य बिन्दुओं का प्रयोग किया जाना चाहिए। इस प्रकार की माप-विधि " चाप लोच " के नाम से प्रसिद्ध है। चाप दो बिन्दुओं के मध्य मांग - वक्र के भाग स्पष्ट करता है। इसे ज्ञात करने का सूत्र इस प्रकार से है-- 

वस्तु की मांगी गई मात्रा मे परिवर्तन 

मांग की लोच =    -----------------------------------------

प्रारम्भिक मांग मात्रा + मूल्य परिवर्तन के पश्चात नई मांग-मात्रा

मूल्य मे परिवर्तन

----------------------

प्रारम्भिक मूल्य + परिवर्तन के पश्चात नया मूल्य

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