har din kuch naya sikhe

हर दिन कुछ नया सीखें।

12/21/2020

मांग का नियम क्या है? मान्यताएं

By:   Last Updated: in: ,

मांग का नियम क्या है? (mang ka niyam kaise kehte hai) 

मांग का नियम वस्तु की कीमत एवं उसकी मांगी गई मात्रा के संबंध को बतलाता है। वस्तु की कीमत मे परिवर्तन होने पर उसकी मांगी गई मात्रा मे भी परिवर्तन होता है। मांग के नियम के अनुसार वस्तु की कीमत एवं इसकी मांगी गई मात्रा के बीच विपरीत संबंध होता है। अर्थात् वस्तु की कीमत मे वृद्धि होने पर उसकी मांग घटती है तथा वस्तु की कीमत मे कमी होने पर उसकी मांग बढ़ती है। वस्तु की कीमत मे वृद्धि होने पर मांग मे कमी होने की एवं वस्तु की कीमत मे कमी होने पर मांग मे वृद्धि होने की प्रवृत्ति को अर्थशास्त्र मे मांग के नियम से जाना जाता है। 

अत्यन्त सरल शब्दों मे कहे तो," मांग और मूल्य के संबंध को ही मांग का नियम कहा जाता है। 

जैसा कि प्रतिदिन हमारे दैनिक जीवन मे देखने मे आता है कि कीमत के कम होने पर वस्तु की मांग बढ़ जाती और कीमत के बढ़ाने पर उसकी मांग घट जाती है। वास्तव मे कीमत और मांग के इस पारस्परिक एवं विपरित संबंध को ही " माँग का नियम " कहा जाता है। 

मांग के नियम से सम्बन्ध मे परिभाषाएं

सैम्युलसन के अनुसार," अन्य बातों के समान रहने पर यदि किसी वस्तु की अधिक मात्राएं बाजार मे आती है तो वे वस्तुएं कम मूल्य पर ही बेची जायेगी। 

मार्शल के शब्दों मे," मांग के नियम का सामान्य कथन यह है वस्तुओं की अधिक मात्रा की बिक्री के लिये उसके मूल्यों मे कमी होने चाहिए ताकि उस वस्तु के क्रेता अधिक हो सकें। दूसरे शब्दों में, " मूल्य के गिरने से मांग बढ़ती है और मूल्य के बढ़ने से मांग घटती है।" 

मांग के नियम की मान्यताएं या सीमाएं (mang ke niyam ki manyataye)

उक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि प्रायः सभी अर्थशास्त्रियों ने इस नियम की क्रियाशीलता के लिए " अन्य बातें समान रहें " वाक्यांश का प्रयोग किया है। इससे प्रतीत होता है कि कीमत और मूल्य का संबंध कुछ मान्यताओं पर आधारित है। मांग के नियम की मान्यताएं या सीमाएं इस प्रकार से हैं--

1. उपभोक्ता की आय मे किसी प्रकार का परिवर्तन नही होना चाहिए।

2. उपभोक्ता के स्वभाव तथा रूचि मे कोई परिवर्तन नही होना चाहिए।

3. वस्तुओं की कीमत तथा आय मे किसी प्रकार का परिवर्तन नही होना चाहिए अर्थात् वे सब समान रहे। 

4. वस्तु को क्रय करते समय उस वस्तु की स्थापन्न वस्तु को ध्यान मे नही रखा जाता है।

5. जिन वस्तुओं को क्रय किया जा रहा है वे वस्तुएं प्रतिरक्षक नही होनी चाहिए।

6. भविष्य मे वस्तु की कीमत मे और अधिक परिवर्तन की संभावना नही होना चाहिए।

7. जनसंख्या मे परिवर्तन नही होना चाहिए।

पढ़ना न भूलें; व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, प्रकार

पढ़ना न भूलें; निगमन विधि का अर्थ, गुण और दोष

पढ़ना न भूलें; आगमन विधि का अर्थ, गुण एवं दोष

पढ़ना न भूलें; मांग का नियम क्या है? मान्यताएं

पढ़ना न भूलें; मांग का अर्थ, परिभाषा, प्रकार

पढ़ना न भूलें; मांग की लोच क्या है? मांग की लोच का महत्व, प्रभावित करने वाले तत्व

पढ़ना न भूलें; मांग की लोच मापने की विधियां

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।