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12/25/2020

पूंजी निर्माण का अर्थ, परिभाषा, प्रभावित करने वाले तत्व या कारक

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पूंजी निर्माण का अर्थ (punji nirman kya hai)

Punji nirman ka arth paribhasha prabhavit karne wale karak;पूंजी निर्माण का अर्थ है कि समाज समस्त वर्तमान उत्पादन को वर्तमान उत्पादन को वर्तमान उपभोग के लिए प्रयुक्त नही करता अपितु इसके कुछ भाग का उपयोग पूंजी के समान जैसे,  औजार, मशीनें, यातायात सुविधाएं एवं अन्य सामान के बनाने मे करता है। संक्षेप मे पूंजी निर्माण होने का अर्थ है कि प्रति वर्ष पूंजीगत वस्तुओं के स्टाक मे वृद्धि रहती है। 

दूसरे शब्दों मे, जब समाज समस्त वर्तमान उत्पादन को वर्तमान उपभोग के लिए उपयोग नही करता बल्कि उसमे से कुछ भाग को पूंजी संचय हेतु प्रयुक्त करता है, तो इसे पूंजी निर्माण कहा जाता है।

पूंजी निर्माण की परिभाषा (punji nirman ki paribhasha)

प्रो. नर्कसे के अनुसार," पूंजी निर्माण का अर्थ है कि समाज अपनी वर्तमान उत्पादन क्षमता को पूर्णतः उपभोग एवं तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति मे नही जुटाता है, वरन् उसके एक भाग को पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण मे लगाता है अर्थात् औजार, उपकरण, मशीन, परिवहन सुविधाओं, संयंत्र एवं साज-सज्जा आदि के निर्माण मे लगा देता है।

प्रो. कुजनेट्स के अनुसार," पूंजी निर्माण मे केवल उपकरणों एवं नवीन वस्तुओं के निर्माण को ही सम्मानित नही करते है, अपितु व्यय, जैसे शिक्षा, मनोरंजन, स्वास्थ्य पर खर्च आदि को भी सम्मानित करते है।

पूंजी निर्माण को प्रभावित करने वाले तत्व या कारक (punji nirman ko prabhavit karne wale karak)

टाॅसिंग के अनुसार," पूंजी बनाई जाती है अथवा निर्मित की जाती है, परन्तु पूंजी बचत और संचय द्वारा भी उत्पन्न होती है।"

किसी भी देश मे पूंजी को निम्म तीन बाते प्रभावित करती है--

(अ) बचत करने की इच्छा 

व्यक्ति की बचत करने की इच्छा अनेक उद्देश्यों को लेकर की जाती है, जो इस प्रकार है-- 

1. सामाजिक प्रतिष्ठा 

व्यक्ति सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए भी बचत करता है, क्योंकि आज के आधुनिक युग मे जिस व्यक्ति के पास जितना अधिक धन होगा, उसकी समाज मे उतनी ही प्रतिष्ठा होगी। 

2. आदत 

कुछ व्यक्तियों की बचत करने की आदत होती है, जबकि कुछ व्यक्ति बहुत ही अधिक अनावश्यक धन खर्च करते है।

3. सामाजिक सुरक्षा 

यदि व्यक्ति इस बात से आशवस्त हो कि वृद्धवस्था की पेंशन दुर्घटना पर क्षतिपूर्ति आदि की पर्याप्त व्यवस्था है तो वह कम बचत करेगा।

4. पारिवारिक स्नेह

अपने परिवारजनों से स्नेह के कारण भी व्यक्ति बचत करता है, ताकि उसकी मृत्यु के बाद उसके परिवार के पास अवश्य धन हो।

5. दुरदर्शिता 

प्रत्येक व्यक्ति यह समझता है कि मनुष्य का भविष्य अनिश्चित है। वर्तमान की आवश्यकताओं के साथ भावी आवश्यकताओं का भी ध्यान रखता है जैसे बुढ़ापा, बीमारी आदि के लिए धन बचाता है।

(ब) बचत करने की शक्ति 

बचत करने की शक्ति निम्म बातों पर निर्भर है--

1. धन का वितरण 

जिस देश मे धन का वितरण असमान होता है वहां बचत करने की शक्ति अधिक होती है। उसी प्रकार जहाँ धन का समान वितरण होता है वहां बचत करने की शक्ति कम होती है।

2. व्यय करने का ढंग 

यदि कोई व्यक्ति अपनी आय को विवेकपूर्ण ढंग से खर्च करता है तो उसकी बचत करने की शक्ति अधिक होगी।

3. प्राकृतिक साधन 

किसी भी देश की राष्ट्रीय आय उसके प्राकृतिक साधनों पर निर्भर है। यदि प्राकृतिक साधन प्रचुर मात्रा मे होगे तो राष्ट्रीय आय अधिक होगी।

4. आय व्यय 

यदि व्यक्ति की आय अधिक होगी तो बचत करने की शक्ति भी अधिक होगी जबकि यदि कम आय होगी तो बचत करने की शक्ति भी कम होगी।

(स) बचत करने की सुविधा 

इसके अंतर्गत निम्म शामिल है-- 

1. मुद्रा प्रणाली मे स्थायित्व 

यदि किसी देश की मुद्रा मे स्थायित्व होता है अर्थात् मूल्य मे बहुत अधिक परिवर्तन नही होता है तो बचत अधिक होगी।

2. सरकार की भूमिका 

किसी भी देश के लोगों मे बचत प्रोत्साहन करने मे सरकार की भूमिका महत्व रखती है जैसे सरकार यदि चाहे तो विदेशी सहायता का उचित प्रयोग कर सकने की सुविधा, शिक्षा, शिक्षा का प्रचार करना, अनुचित उपभोग पर रोक लगाना आदि की सुविधा उपलब्ध करवा सकती है।

3. शांति एवं सुरक्षा 

यदि किसी देश मे शांति एवं सुरक्षा है, अर्थात् वहां पर लोगों का जीवन सुरक्षित है, किसी प्रकार की चोरी उपद्रव की आशंका नही है तो बचत अधिक होगी।

4. पूंजी के विनियोग की सुविधाएं 

यदि किसी देश मे पूंजी के विनियोग की सुविधाएं लोगों को उपलब्ध करवाई जाएं जैसे बीमा कंपनी, बैंकिंग आदि तो वहां के निवासियों की बचत अधिक होगी।

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