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11/09/2020

युवा तनाव को नियंत्रित करने के उपाय

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युवा तनाव को नियंत्रित करने या युवा तनाव के निवारण हेतु उपाय 

yuva tanav ko niyantrit karne ke upay;युवा सभी समाज के कर्णधार होते है। ऐसे मे तनाव के चलते वे यदि व्याधिग्रस्त हो जाते है तो समाज की प्रगति अवरूद्ध होती है और समाज का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इसलिए हर समाज की कोशिश होती है कि उसके युवा शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ व तनावमुक्त हो। युवा तनाव या असंतोष की समस्या को नियंत्रित करने के उपाय इस प्रकार है--

1. शिक्षा प्रणाली मे सुधार 

युवा तनाव की समस्या को नियंत्रित करने के लिए शिक्षा प्रणाली मे अनेक सुधार अवश्यंभावी है। इनके अभाव मे युवा असंतोष की समस्या को नियंत्रित नही किया जा सकता। शिक्षा प्रणाली मे सुधार संबंधी प्रमुख सुझाव इस प्रकार है--

1. शिक्षा पाठ्यक्रम को रोजगार अभिमुख बनाया जावे।

2. शिक्षक तथा विद्यार्थियों के बीच परस्पर विश्वास जागृत हो।

3. विश्वविद्यालय या काॅलेज प्रशासन, सरकार तथा विद्यार्थियों के बीच परस्पर सामंजस्य हो।

4. भाषा के माध्यम के संबंध मे सरकार का दृष्टिकोण व्यावहारिक हो।

5. परीक्षा प्रणाली मे सुधार।

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2. पीढ़ियों के संघर्ष को कम करना 

युवा असंतोष का कारण पीढ़ियों के बीच द्वंद्व या संघर्ष की स्थिति का होना है। पुरानी पीढ़ी की मान्यताएं कुछ है तो नई पीढ़ी की मान्यताएं दूसरी। अतः युवा तनाव को कम करना है तो पीढ़ियों के बीच की दूरी को कम करना होगा। पुरानी पीढ़ी के लोगों को ज्यादा दृढ़ न होकर गत्यात्मकता को स्थान देना चाहिए।

3. राजनीतिक दलों से दूर रहना 

युवा असंतोष को बढ़ावा राजनीतिक दल देते है अतः प्रयत्न इस बात का होना चाहिए कि उन्हें राजनीति मे न घसीटा जाए।

4. नैतिक विकास

आध्यात्मिक तथा भौतिक विकास के साथ-साथ नैतिक विकास का प्रबंध आवश्यक है।

5. अभिभावको मे जागरूकता होनी चाहिए 

विद्यालय के समस्त छात्रों के अभिभावकों के द्वारा प्रति दो बर्ष बाद निर्वाचित अभिभावको, प्रतिनिधियों की लोकतंत्रीय संस्थाएं अर्थात् अभिभावक सलाहकार परिषदें, शिक्षण तथा प्रशिक्षण प्रक्रिया मे सक्रिय रूप से भाग लें और इस प्रकार विधार्थियों की शिक्षा दीक्षा पर उनका समुचित प्रभाव भी पड़े। इसके अतिरिक्त संस्थाएं इस तथ्य का पालन करे कि छात्रों के व्यवहार तथा परिणामों से संबंधित जिम्मेदारी मे अभिभावक भी जागरूक होकर हाथ बढ़ाएं।

6. मनोरंजन की व्यवस्था 

युवकों द्वारा ज्यादा गड़बड़ तब की जाती है जब वे अपने को खाली महसूस करते है। अतः उनके लिए उचित खेलकूद, व्यायाम, वाद-विवाद, चलचित्र, प्रदर्शन, ड्रामा आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। जो इन क्षेत्रों मे बहुत अच्छे हो उन्हें उसमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

7. रोजगार दफ्तर 

हर स्थान पर रोजगार दफ्तर हो जो युवकों को निर्देवन दें तथा उन्हें विभिन्न रोजगारों को प्राप्त करने मे मदद करे।

अंत मे यही कहा जा सकता है कि युवा वर्ग मे विशेषकर शिक्षा प्राप्त करने वाले किशोर तथा युवक विद्यार्थियों मे से जब तक हम असंतोष की भावना दूर नही करेंगे,जब तक उन्हें हम सही मार्ग पर नही डालेंगे तब तक समाज मे इस गंभीर समस्या के भयंकर दुष्परिणाम विभिन्न प्रकार से, जैसे युवा अपराध, किशोर अपराध, श्वेत वसनापराध, व्यक्तित्व विघटन इत्यादि के रूप मे निकलते ही रहेंगे और समाज निरंतर भीतर से खोखला ही होता चला जाएगा।

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