11/18/2023

व्यावसायिक पूर्वानुमान के सिद्धांत

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व्यावसायिक पूर्वानुमान के सिद्धांत 

पुराने समय में व्यावसायिक पूर्वानुमान केवल अनुभव तथा कल्पनाओं के आधार पर लगाये जाते थे लेकिन वर्तमान समय में यह कार्य वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर किया जाता हैं। मुख्य रूप से निम्न बिन्दुओं पर व्यावसायिक पूर्वानुमान आधारित होते हैं-- 

1. क्रिया प्रतिक्रिया सिद्धांत 

यह सिद्धांत भौतिकशास्त्र से संबंधित न्यूटन के गति के तृतीय सिद्धांत पर आधारित हैं। इस सिद्धांत के अनुसार," प्रत्येक क्रिया की हमेशा बराबर तथा विपरीत प्रतिक्रिया होती हैं।" भौतिकशास्त्र के इस सिद्धान्त के अनुसार आर्थिक क्षेत्र में भी हर घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप दूसरी घटना देखते हैं। व्यावसायिक क्षेत्र मे भी अगर कोई परिवर्तन होता है तो उसकी कोई न कोई प्रतिक्रिया अवश्य होगी। इस तरह क्रिया और प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर हम व्यावसायिक पूर्वानुमान लगा सकते है। यह पूर्वानुमान बुद्धिमत्तापूर्ण तर्कों पर आधारित होता है अतः सत्यता के अधिक निकट होता हैं। 

उदाहरण के लिए अगर टी.वी. का मूल्य एक प्रसामान्य स्तर तक बढ़ता है तो बाद में उसका उत्पादन भी बढ़ता है। इससे उसकी पूर्ति भी बढ़ती हैं। परिणामस्वरूप उसका मूल्य घटने लगेगा। इस प्रकार के पूर्वानुमान में इस प्रसामान्य स्तर स्थिर नहीं होता हैं। यह परिवर्तनशील होता हैं। 

2. काल विलम्बना अथवा कालक्रम सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुसार व्यावसायिक परिवर्तन एक साथ न होकर एक निश्चित अनुक्रम में होते है। दूसरे शब्दों में विभिन्न व्यावसायिक परिवर्तन एक के बाद एक क्रमशः घटित होते है। अर्थात हम कह सकते है कि एक घटना का प्रभाव होने में कुछ समय लगता हैं। उदाहरण के लिए रेनाल्ड पेन कंपनी अगर अपने पेन के विज्ञापन पर कुछ धन खर्च करती है तो कुछ समय बाद पेन बिक्री में वृद्धि अवश्य दिखाई देगी। 

3. प्रतिकाट विश्लेषण सिद्धांत

लोग कहते है कि इतिहास अपने आपको दुहराता है पर यह सिद्धांत इसके विपरीत है। इस सिद्धांत के अनुसार इतिहास अपने आपको नही दुहराता। अर्थात् विगत इतिहास में जो घटनाएं हुई है, जरूरी नही है कि उनकी पुनरावृत्ति हो। सब कुछ वर्तमान स्थितियों पर ही निर्भर करता है। वर्तमान का अध्ययन कर व्यावसायिक पूर्वानुमान लगाया जाता हैं। भूतकालीन परिस्थितियों पर विचार नही किया जाता हैं। 

4. आर्थिक लय सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुयायी यह मानते है कि आर्थिक घटनाएं एक लयबद्ध क्रम में घटित होती है। यहाँ व्यावसायिक पूर्वानुमान कालश्रेणी के विश्लेषण पर आधारित होता है। दीर्घकालीन प्रवृत्ति का अनुमान लगाने हेतु यह सिद्धांत उपयुक्त हैं। 

5. विशिष्ट ऐतिहासिक सादृश्य सिद्धांत 

इस सिद्धांत के अनुयायियों का मानना है कि इतिहास की बार-बार पुनरावृत्ति होती हैं। जिन परिस्थितियों में भूतकालीन घटनाएं हुई हैं वर्तमान में वैसी ही परिस्थितियाँ होने पर भविष्य में भूतकाल वाली घटनाएं घट सकती है। व्यापार चक्रों की दशा में यह सिद्धांत उपयुक्त होता हैं।

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