2/14/2022

प्रत्यक्ष निर्वाचन क्या हैं? गुण एवं दोष

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प्रश्न; प्रत्यक्ष निर्वाचन किसे कहते हैं? इसके गुण और दोषों का वर्णन कीजिए। 

अथवा" प्रत्यक्ष निर्वाचन की व्याख्या कीजिए। इसके गुण-दोषों का विवेचन कीजिए। 

उत्तर--

प्रत्यक्ष निर्वाचन क्या हैं? (pratyaksh nirvachan pranali ka arth)

लोकतंत्रात्मक शासन पद्धित का प्रमुख आधार निर्वाचन और मतदान होता हैं। इसमें जनता स्वयं अपने शासक का निर्वाचन करती है। किन्तु निर्वाचन की अनेक पद्धितियाँ होती हैं, प्रत्यक्ष निर्वाचन उन पद्धतियों में से एक प्रमुख पद्धित हैं। 

प्रत्यक्ष निर्वाचन का तात्पर्य ऐसी पद्धित से होता है जिसमें जनता स्वयं अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती हैं, जिस पद्धित में जनता अपने प्रतिनिधियों को स्वयं चुनती हैं, उसे प्रत्यक्ष निर्वाचन कहते हैं। व्यवस्थापिका के सदस्यों तथा मुख्य कार्यपालिका का चुनाव स्वयं जनता ही करती हैं। 

डाॅ. ओम नागपाल के अनुसार," प्रत्यक्ष निर्वाचन का सिद्धांत एकदम सरल और स्पष्ट हैं-- हमें जो भी पदाधिकारी चुनना हैं, उसे हम स्वयं चूनें, हमारे नाम पर कोई और नहीं। जब राष्ट्रपति का निर्वाचन सीधे-सीधे जनता के मतों द्वारा हों, तो उस राष्ट्रपति को प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति कहते है और संसद के सदस्य कौन हों, इसका निर्धारण भी स्वयं जनता करे तो उसे प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित संसद कहते हैं।" 

भारत व इंग्लैण्ड में निम्न सदन का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से ही होता है तथा अमेरिका में भी प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट के सदस्यों का निर्वाचन जनता प्रत्यक्ष रूप से करती हैं। प्रजातांत्रिक देशों में चूँकि निम्न सदन प्रायः प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुना जाता हैं, अतः उसे लोकप्रिय सदन भी कहा जाता हैं। फ्रांस में मुख्य कार्यपालिका अर्थात् राष्ट्रपति का चुनाव जनता प्रत्यक्ष रूप से करती है और यदि किसी प्रत्याशी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नही होता है, तो पुनः जनता द्वारा मतदान किया जाता है और स्पष्ट बहुमत प्राप्त होने पर ही वह निर्वाचित घोषित होता हैं। वैसे प्रत्यक्ष निर्वाचन का श्रेष्ठ उदाहरण स्विट्जरलैंड के कुछ कैंटीन हैं। वहाँ सभी मतदाता एक जगह एकत्रित होकर अपनी सरकार तथा अधिकारियों का चुनाव करते हैं। 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के गुण (pratyaksh nirvachan pranali ke gun)

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के निम्नलिखित गुण हैं-- 

1. अधिक प्रजातांत्रिक 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली अधिक प्रजातांत्रिक होती हैं, क्योंकि इसमें जनता को अपने प्रतिनिधियों का सीधा निर्वाचन करने का अवसर प्राप्त होता हैं। इसमें व्यवस्थापिका और मुख्य कार्यपालिका को स्वयं जनता ही चुनती हैं। 

2. जनभावनाओं को उचित प्रतिनिधित्व 

प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को मतदाता अपने में से ही चुनते हैं। जनता उन्हें अच्छी तरह जानती हैं। अतः इस पद्धित द्वारा लोगों को वास्तविक प्रतिनिधित्व प्राप्त होता हैं। वे प्रतिनिधि क्योंकि उन्हीं में से होते है इसलिए जनता की इच्छाओं व भावनाओं को ठीक से समझते हैं और उसके अनुरूप ही शासन करते हैं। 

3. राजनीतिक रूचि उत्पन्न 

प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धित में चूँकि जनता को स्वयं अपने प्रतिनिधियों को चुनना होता हैं, अतः वह राजनीति में भी रूचि लेने लगती हैं। समाचार-पत्रों के माध्यम से लोग राजनीतिक गतिविधियों को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। 

4. नागरिकों में जागरूकता 

इस पद्धित में चूँकि जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचन करती हैं, अतः वह अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो जाती है। मतदाता अपने शासकों द्वारा बनाई गई नीतियों तथा उसके क्रियान्वयन के प्रति सजग रहती है और अधिकारों पर आँच आने पर विरोध का प्रदर्शन भी करते हैं। 

5. राजनीतिक शिक्षा का प्रसार 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में जिस तरह चुनाव अभियान चलाया जाता हैं, नागरिक मतदान मे भाग लेते हैं, उससे लोगों को राजनीतिक शिक्षा मिलती हैं। 

6. जनता से सीधा संपर्क 

इस पद्धित में शासकों से जनता का सीधा संपर्क बना रहता है। वह सीधे अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन करती हैं। शासक जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा नहीं चुने जाते हैं, अतः वे जनसंपर्क बनाये रखते हैं। 

7. जनता का विश्वास 

प्रत्यक्ष निर्वाचन में जनता यह समझती है कि उसके प्रतिनिधि स्वयं उसके द्वारा ही चुने गये हैं, अतः उस शासन में उसका विश्वास बना रहता हैं। 

8. शक्तिशाली व दृढ़ शासन 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के कारण शासक अपने कार्यों व नीतियों का दृढ़तापूर्वक क्रियान्वयन करते हैं। इसके लिए वे किसी निर्वाचक मण्डल के प्रति उत्तरदायी न होकर जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। यदि वे ठीक प्रकार से शासन व्यवस्था नहीं चलाते हैं तो जनता उन्हें पद त्यागने को मजबूर कर सकती हैं तथा नये चुनाव के लिए जनमत का निर्माण करती हैं। अतः शासक सुचारू रूप से शासन करते हैं। 

इस प्रकार प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धित में कई गुण हैं। यह वास्तविक प्रजातंत्र का मुख्य आधार हैं। किन्तु इन लाभों के अतिरिक्त प्रत्यक्ष चुनाव पद्धित में कई दोष भी हैं। 

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के दोष (pratyaksh nirvachan pranali ke dosh)

प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धित में निम्नलिखित दोष पाये जाते हैं-- 

1. बड़े राज्यों में संभव नहीं 

प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धित छोटे-छोटे राज्यों के लिए तो उपयुक्त हैं, किन्तु विशाल राज्यों के लिए यह व्यावहारिक नहीं हैं। बड़े-बड़े राज्यों में यह संभव नहीं हैं कि जनता अपने प्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष रूप से चुने। इसी कारण आधुनिक युग में प्रतिनिधियों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष पद्धित से किया जाता हैं। 

2. सही चुनाव का अभाव 

जहाँ पर जनता अशिक्षित या कम समझदार हो, वहाँ मतदाता उपयुक्त प्रत्याशी चुनने में समर्थ रहते हैं। अज्ञानता के कारण वह अच्छे या बुरे प्रत्याशी में भेद नही कर पाते और कई बार उनके द्वारा किया गया चुनाव गलत प्रतिनिधि के पक्ष में हो जाता हैं। 

3. दूषित वातावरण 

प्रत्यक्ष मतदान पद्धित में वातावरण में कभी-कभी अत्यधिक उत्तेजना आ जाती हैं। विभिन्न प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच कई बार संघर्ष की-सी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती हैं। इस प्रकार इस पद्धित से निर्वाचन के समय वातावरण अत्यधिक दूषित हो जाता है। 

4. योग्य व्यक्तियों का अभाव

दूषित वातावरण के कारण योग्य व्यक्ति निर्वाचन मे भाग लेने से कतराने लगते हैं। अतः शासन में योग्यता व अनुभव का अभाव पाया जाता हैं। इसके अतिरिक्त दल पद्धित के कारण भी योग्यता के आधार पर चुनाव नही होते हैं। जनता, दल को वोट देती हैं, व्यक्ति को नहीं। 

5. अल्पमत की उपेक्षा

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में बहुमत वर्ग को तो पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त हो जाता हैं, किन्तु अल्पमतों की पूर्ण रूप से उपेक्षा होती हैं। प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा विजयी घोषित प्रतिनिधि सबका प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। कई बार 30-40 प्रतिशत मत प्राप्त करके ही वे सत्ता में आ जाते हैं। 

6. निष्पक्ष चुनाव की सम्भावना कम 

इस प्रणाली में उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए तरह-तरह के लालच देते हैं। भोली जनता उनके बहकावे में आकर उन्हीं को मत दे देती हैं या फिर शक्ति के बल पर भी निर्वाचन में जीता जा सकता हैं। अतः प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली निष्पक्ष नहीं रहती। 

इस प्रकार प्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धित में गुणों के साथ कई दोष अथवा कमियाँ भी हैं। किन्तु इन कमियों को दूर किया जा सकता हैं, जैसा कि फ्रांस के राष्ट्रपति के चुनाव में किया गया हैं। वहाँ कम से कम स्पष्ट बहुमत प्राप्त होने पर ही शासन सत्ता प्राप्त की जा सकती हैं।

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