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10/24/2021

कला का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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कला का अर्थ (kalaa kya hai)

Kalaa arth paribhasha visheshta;कला शब्द 'कल' धातु से बना हैं। कला का शब्दिक अर्थ हैं, जो सुन्दर यानि जो आनंद प्रदान करती हो अथवा जिसके द्वारा सुन्दरता आती हैं, वही कला हैं। कला से तात्पर्य रेखा आकृति, रंग, ताल तथा शब्द, जैसे-- रेखाचित्र, रंजनकला, मूर्तिकला, नृत्य, संगीत, कविता एवं साहित्य के रूप में मानव की प्रवृत्तियों का बाहारी अभिव्यक्ति हैं। 

कला न ज्ञान हैं, न शिल्प हैं, न ही विद्या हैं, बल्कि जिसके द्वारा हमारी आत्म परमानन्द का अनुभव करती हैं, वही कला हैं। कुछ लोग कला शब्द का अर्थ 'सुन्दर' 'कोमल' 'मधुर' या 'सुख' लाने वाला मानते हैं। कुछ इसे 'कल्' धातु अर्थात् (शब्द करना, गाना-बजना,  गिनना से संबंधित मानते हैं। कुछ अन्य लोग इसे 'कड्' धातु (मदमस्त करना, प्रसन्न करना से जोड़ने के पक्ष में हैं। 

इस प्रकार से देखे तो कला का अर्थ एक ऐसी कलात्मक शिल्प या कौशल की प्रक्रिया से युक्त अनुभूति से हैं जो सृजनात्मक, सुन्दर एवं सुख प्रदान करने वाली हो, वही कला हैं।

कला की परिभाषा (kalaa ki paribhasha)

विभिन्न विद्वानों द्वारा समय-समय पर कला की अनेक परिभाषायें दी गई हैं। उनमें से कुछ मुख्य परिभाषाएं निम्नलिखित हैं-- 

एक साहित्यिक उक्ति के अनुसार," प्राण तत्व 'रस' से परिपूर्ण रचना ही कला हैं।" 

महात्मा गाँधी के अनुसार," कला आत्मा का ईश्वरीय संगीत हैं।" 

रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार," कला में मनुष्य स्वयं अपनी अभिव्यक्त करता हैं।" 

जयशंकर प्रसाद के अनुसार," ईश्वर की कर्तव्य शक्ति का संकुचित रूप जो हमको भाव-बोध के लिये मिलता हैं- कला हैं।" 

डाॅ. भोला शंकर तिवारी के अनुसार," कला में मनुष्य अपनी अभिव्यक्ति करता हैं।" 

फ्रायड के अनुसार," कला में मानव अपनी दमित वासनाओं तथा कुण्ठाओं की अभिव्यक्ति करता हैं।" 

रस्किन के अनुसार," कला, ईश्वरीय कृति के प्रति मानव के आलाद की अभिव्यक्ति हैं।" 

टाॅलस्टाय के अनुसार," कला एक मानवीय क्रिया हैं जिसमें एक व्यक्ति जागरूक अवस्था में वाद्य प्रतीकों के माध्यम से, अपनी उन भावनाओं को जिनमें वह जी रहा होता हैं, दूसरों को संचारित करता है तथा दूसरे व्यक्ति भी उन भावनाओं से प्रभावित होते हैं एवं उनका अनुभव करते हैं।" 

शापेनहावर के अनुसार," सृष्टि एक दिव्य रचना है और कला पवित्रता की अभिव्यक्ति हैं।" 

बेनी दीती क्रोचे के अनुसार," कला वही है जैसा हर एक उसे जानता हैं।" 

एरिस्टाटिल के अनुसार," कला अनुकरणीय हैं।" 

प्लेटो के अनुसार," कला सत्य की अनुकृति हैं।"

कला की विशेषताएं (kalaa ki visheshta)

कला की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-- 

1. कला एक क्रिया हैं 

कला एक क्रिया हैं, जिस प्रकार से प्रकृति प्रति क्षण विभिन्न क्रियाएं करती हैं। जैसे-- चन्द्रमा का घटना-बढ़ना, फूलो का खिलना, सूर्य का निकलना, बादलों का बरसना, बिजली का चमकना, इन्द्र धनुष का बनना आदि। 

इसी प्रकार से मानव भी अनेक क्रियाएँ करता हैं जिनमे से कुछ विशेष कार्य जो कुशलता पूर्वक किये जाते हैं दूसरों को आकर्षित करते हैं। 

इसका स्पष्ट अर्थ यह हुआ कि कला एक व्यापक शब्द है जिसका प्रयोग प्रकृति तथा मानव जीवन के विविध क्षेत्रों में होता हैं। किन्तु प्रकृति तो ईश्वरीय कला है जो मानवीय क्रियाओं से पृथक है जबकि मानव द्वारा निर्मित कलात्मक वस्तु या चित्र के निर्माण की एक रचना प्रक्रिया होती हैं जो उसकी कलात्मकता को निश्चित करती हैं तो इस विश्लेषण से यह स्पष्ट होता हैं कि," कला वह मानवीय क्रिया है जिसका विशेष लक्षण, ध्यान से देखना, गणना अथवा संकलन, मनन, चिन्‍तन एवं स्पष्ट रूप से प्रकट करना हैं।"

2. कला एक तकनीक हैं 

कोई भी कलाकृति (चाहे वह चित्र हो, मूर्ति हो या कविता) के निर्माण के लिये उसके निर्माण मे प्रयुक्त एवं उस सामग्री के प्रयोग की तकनीक को समझना अनिवार्य हैं। बिना उस तकनीक को समझे उस कलाकृति का निर्माण नही किया जा सकता। जितना बेहतर हमें सामग्री के इस्तेमाल की तकनीक का ज्ञान होगा उतनी ही कुशलता से हम उसका प्रयोग पर पायेंगे और उतनी ही उत्कृष्ट वह कलाकृति होगी तो इस विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि," कला एक विशेष तकनीकी क्रिया है जिसमें कलाकृति के निर्माण हेतु प्रयुक्त सामग्री की प्रयोगविधि को समजना अनिवार्य हैं।"

3. कला एक प्रकार का शिल्प हैं 

किसी सामग्री को काट-छांटकर जब कोई रूप दिया जाता हैं उसे शिल्प कहते हैं। इस प्रकार वह चाहे मूर्तिकला हो या वस्तु शिल्प, धातु शिल्प हो या वस्त्र शिल्प अथवा प्लास्टिक आर्ट सभी शिल्प की श्रेणी में ही आते हैं। 

इस प्रकार स्पष्ट है कि" प्रत्येक प्रकार की कला के लिये किसी न किसी सामग्री को काट-छांट कर या तराश कर ही उसे कलाकृति का रूप दिया जा सकता है। कलाकृति निर्माण हेतु उसके लिये उपयुक्त सामग्री को काटने-छांटने या तराशने की क्रिया एवं उसकी कुशलता अनिवार्य हैं।" 

4. कला एक प्रकार का कौशल है 

यह सर्वविदित है कि कोई भी कृति तभी कलाकृति कही जा सकती है जब वह विशेष कौशल द्वारा तैयार की गई हो तथा उसमें छन्द लयात्मक व्यवस्था हो। 

कलाकार का कौशल उसे कहा जाता है जिसमे कलाकार क्रिया, शिल्प एवं तकनीक के अतिरिक्त कृति को आकर्षित बनाने के लिये अपने मानसिक चिन्तन प्रक्रिया के द्वारा नवीनता लाने के लिए अनेक युक्तियाँ खोजता हैं। 

इस विश्लेषण से स्पष्ट है कि," कलाकृति को प्रभावशाली, नवीन एवं आकर्षक बनाने हेतु मानसिक चिन्तन-मनन एक अनिवार्य प्रक्रिया हैं।"

5. कला एक अनुकृति हैं 

अनुकृति का अर्थ है-- सादृश्य। यह वास्तविकता है कि कला अनुकृति मूलक हैं। कलाकृति की श्रेष्ठता को स्पष्ट करते हुए कहा जा सकता है कि," किसी कलाकृति की श्रेष्ठता इस पर निर्भर करती है कि मूलकृति चाहे वह ईश्वरीय हो या मानव रचित उससे उस कला का कितना साम्य हैं।" 

सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो ने कहा हैं," कला सत्य की अनुकृति की अनुकृति हैं।" 

6. कला एक कल्पना हैं 

बुद्ध घोष के अनुसार," संसार भर की जितनी कलाकृतियाँ हैं सब कल्पना की उपज हैं। प्लेटो भी यही मानते है उनके अनुसार कलाकृति में दैवीय प्रेरणा की ही भूमिका होती हैं। कलाकार अनेक ऐसे काल्पनिक चित्रों या मूर्तियों का निर्माण करता है जिनका अस्तित्व ही संसार में नही होता। देवता, ईश्वरीय अवतार, राक्षस, स्वर्ग, ये सब कल्पना ही तो हैं। यूरोपीय विद्वान भी यही मानते थे कि कलाकार नवीन कलाकृतियों का सृजन करके अनपी कल्पना को सन्तुष्ट करता हैं। 

लेकिन महान चित्रकार "लियानार्दों द विन्ची" (सबसे चर्चित कृति मोनालिसा) का विचार था कि कलाकार संसार के अनुभव के आधार पर ही कलाकृतियाँ बनाता है पर वह सृष्टि नही करता केवल पुनः सृष्टि मात्र करता है। वह इसी संसार से सामग्री लेता है जो ईश्वर द्वारा निर्मित हैं। 

इस प्रकार कहा जा सकता है कि," कल्पना का आधार भी सांसारिक वस्तुएँ ही होती हैं। कलाकार कल्पना के द्वारा उन्हें पुनः संयोजित कर नवीन रूप देता हैं।"

7. कला एक ज्ञान के रूप में हैं 

ज्ञान एक विशिष्ट मानसिक प्रक्रिया की वास्तविक हैं। प्राचीन भारतीय भाषाओं में चौंसठ कलाओं का वर्णन किया गया है। उच्चतम ज्ञान से भी भिन्न इन कलाओं के ज्ञान की प्रक्रिया को माना गया हैं। ज्ञान के अभाव में तकनीकी का प्रयोग भी असंभव हैं। मन और मस्तिष्क जब किसी भी तकनीकी, वस्तु, घटना, क्रिया आदि को पूर्ण विश्लेषित कर सत्य मान लेता है तभी इन क्रियाओं का ज्ञान प्राप्त होता हैं। 

8. कला एक अभिव्यक्ति हैं 

विद्वानों का मानना है कि कला एक प्रकार की भावपूर्ण भाषा है जो किसी विशेष मानसिक स्थिति को जगाने में सफल होती हैं। लियोनार्दों द विन्सी का कथन है कि कलाकार जिन आकृतियों की रचना करता है वे उसके आन्तरिक भावों पर आधारित होती हैं। इसका स्पष्ट यह हुआ कि कला के रूपों में कलाकार के मन के भावों की अभिव्यक्ति होती हैं। 

जिस प्रकार हम भाषा को माध्यम बनाकर अपने विचार दूसरों तक पहुँचाते हैं उसी प्रकार कलाकृति के द्वारा भी कलाकार अपने मन के विचारों को सम्प्रेषित करता हैं। 

कला एक प्रकार की भावपूर्ण भाषा हैं जो कलाकृतियों में अभिव्यक्त होती हैं। कला को कुछ विद्वानों ने सामाजिक स्वप्न कहा हैं। 

वस्तुतः यह कहा जा सकता है कि," कला चाहे काल्पनिक हो या वास्तविक वस्तु को सादृश्य, उसके पीछे कलाकर की भावनाओं की अभिव्यक्ति ही मूल भूमिका का निर्वाह करती हैं।"

9. कला एक प्रकार का खेल (क्रीड़ा) हैं 

कई विद्वानों ने कला को क्रीड़ा की संज्ञा दी हैं। इसी संदर्भ में हर्बट रीड कहते है कि," जब हमारी अनेक इच्छाएँ, अनुभूतियाँ विचार और संवेदनाएँ तत्काल अभिव्यक्त नही हो पाती है तो तनाव उत्पन्न होता हैं, खेल ही इस तनाव से मुक्त होने का अवसर प्रदान करता हैं।" 

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि," कलाकार अपनी संवेदनाओं एवं तनावों को दूर करने के लिए भी कला को माध्यम बनाता है और कला ही उसे स्वस्थ्य मानसिक जगत की तरफ ले जाती हैं।" 

निष्कर्ष 

कला की उपर्युक्त विशेषताओं से अवगत होने के उपरांत हम कह सकते हैं कि कला एक बहुत ही संश्लिष्ट और विश्लेषित प्रस्तुति है जिसके लिए तकनीकी की जानकारी एवं उसको ह्रदयांग करने हेतु सृष्टि में उपलब्ध वस्तुओं की अभिव्यक्ति, कल्पनाशीलता सौन्दर्यबोध, चिंतन, नवीनता एवं कलाकार के आन्तरिक विचारों की अभिव्यक्ति आवश्यक है व्यक्ति में स्वयं का व्यक्तित्व इस कार्य में बहुत बड़ी भूमिका का निर्वहन करता हैं। 

1. कला एक सहज संयमित क्रिया है प्रकृति की स्वाभाविक लगने वाली मगर यंत्रवत क्रिया से भिन्न हैं। 

2. कला समाज के उन्नयन हेतु एक उपयोगी एवं सशक्त माध्यम हैं। 

3. कला हमारे चारों ओर के वातावरण तथा वस्तुओं को प्रभावित करती हैं। 

4. रचना की क्रिया के अनुसार ही कृति का नामकरण किया जाता हैं। काष्ठ से बनी कलाकृति को काष्ठ कले का नाम दिया जायेगा और वही कलाकृति यदि पीतल से बनी है तो उसे धातु कला का नाम दिया जायेगा। 

5. कला अनुकृति एवं कल्पना का संगम हैं।

6. चिन्तन एवं अनुभव कला को उत्कृष्ट रूप प्रदान करता हैं।

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