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6/15/2021

पद्धित का क्या अर्थ है?

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पद्धित का क्या अर्थ है?

paddhati ka arth paribhasha;पद्धति का आशय मिश्रित अर्थव्यवस्था के अनुसार अध्ययन करना पद्धति के अंतर्गत कार्य प्रणालियां और प्रविधियां आती है। साधारण भाषा में पद्धति को कार्य करने की विधि कहा जाता है।

विज्ञान हो या सामाजिक विज्ञान दोनों की अनुसंधान पद्धति की अवधारणा की विवेचना को समझने हेतु पद्धति आवश्यक है पद्धति क्या है? इसका तात्पर्य अर्थ क्या है? यह समझना जरूरी है पद्धति का अर्थ एक व्यवस्था के अंतर्गत अध्ययन मनन, चिंतन कर निष्कर्ष प्राप्त करना है। निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हमें कार्य प्रणालियों तथा फिर प्रविधियों के अनुसार कार्य करना पड़ता है।

मार्टिनडेल एवं मोनोकेसी के अनुसार," पद्धति से हमारा अभिप्राय उस ढंग से है जिसके माध्यम से विज्ञान अनुभव सिद्ध ज्ञान की प्राप्ति हेतु अपनी आधारभूत कार्य प्रणालियों को व्यवहार में लाता है एवं अपने उपकरणों तथा प्रविधियां का उपयोग करता है वैज्ञानिक पद्धति का अर्थ स्पष्ट है क्योंकि विज्ञान एक क्रमबद ज्ञान है जो सावधानीपूर्वक किए गए प्रयोगों तथा ईमानदारी से किए गए अनुसंधान प्रणाली के तथ्यों के आधार पर प्राप्त किया जाता है।

समाजिक विज्ञान में वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक व्यवस्थित पद्धति का उतना ही महत्व है जितना कि जीवन के विकास के लिए मस्तिष्क का। सामाजिक जीवन में हमें ऐसी बहुत सी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिनके फलस्वरूप किसी वैज्ञानिक निष्कर्ष तक पहुंचना जटिल हो जाता है। अध्ययनकर्ता में पक्षपात की भावना पुराने विश्वास अथवा द्वेष एवं प्रेम की भावना उसे वास्तविक स्थिति से दूर ले जाने का प्रयास करती है इन्हीं परिस्थितियों के कारण अनेक विद्वानों ने समाजशास्त्र की प्रगति को वैज्ञानिक मानने में अपनी आपत्ति प्रकट की है वास्तविकता तो यह है कि कोई तथ्य अपने आप में विज्ञान नहीं होता बल्कि उससे संबंधित पद्धति ही उसे वैज्ञानिक अथवा अवैज्ञानिक बनाती है। यह सत्य है कि समाजशास्त्री द्वारा तथ्यों का अध्ययन जिन पद्धतियों से किया जाता है वे प्राकृतिक विज्ञानों की पद्धतियों से अलग है परंतु सामाजिक और प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति एक दूसरे से अलग होने के कारण ऐसा होना स्वभाविक ही है।

लुण्डबर्ग का कथन है कि," वे लोग जो यह समझते हैं कि वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग सामाजिक अनुसंधान में नहीं हो सकता। उनके तर्क में सामाजिक घटनाओं की जटिलता, सामाजिक घटनाओं की व्यक्तिनिष्ठता तथा अमुर्तता सामाजिक घटना की गुणात्मक प्रकृति, सामाजिक घटनाक्रम की गतिशीलता पूर्वानुमान ना कर पाने की क्षमता आदि के कारण है जो वैज्ञानिक प्रणाली में बाधक माने जा सकते हैं।

वस्तुतः पद्धति शब्द का प्रयोग उन प्रविधियों (तकनीकियों) द्वारा किया जाता है जिनका प्रयोग कोई भी विशिष्ट विज्ञान तथ्यों का संकलन एवं ज्ञान प्राप्त करने के लिए करता है। पद्धति किसी तार्किक आधार पर अध्ययन करने के लिए अपनाई जाती है। इसलिए विज्ञान दर्शन के रूप में पद्धति शब्द का प्रयोग किया जाता है। समाजशास्त्री पद्धतियां अन्य उदाहरणार्थ प्राकृतिक विज्ञान पद्धति से इसलिए अलग है कि मानव समाज का रूप आंतरिक है तथा प्रगति को बाहरी रूप से देख सकते हैं। मानव जीवन के सांस्कृतिक तथा सामाजिक मूल्य प्राकृतिक विज्ञान से पूर्णता भिन्न है। अनुसंधान को मानवीय सभ्यता के चरण विकास का मूल आधार स्वीकार किया गया है इसलिए सामाजिक अनुसंधान पद्धति में वैज्ञानिक अनुसंधान की पद्धति तथा महत्व को आधार बनाया जाए तो इसका प्रयोग मानव जीवन और समाज हेतु असीमित क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। सामाजिक अनुसंधान पद्धति में सामाजिक घटनाओं एवं समस्याओं के संबंध में नवीन ज्ञान प्राप्त करने हेतु व्यवस्थित अन्वेषण कार्यप्रणाली ही पद्धति का अर्थ परिलक्षित करती है।

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