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4/19/2021

समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व/आवश्यकता, सीमाएं/दोष, प्रकृति

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समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व अथवा आवश्यकता 

samasti arthashastra mahatva;व्यापक/समष्टि अर्थशास्त्र का प्रयोग एवं महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। सूक्ष्य अर्थशास्त्र की कमियों एवं सीमाओं के कारण व्यापक अर्थशास्त्र की उपयोगिता और भी अधिक बढ़ती जा रही है। संक्षेप मे इसके महत्व को निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है--

1. अर्थव्यवस्था के संचालन को समझने के लिए 

हमारी मुख्य आर्थिक समस्याएं कुल आय, कुल उत्पादन, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विदेशी विनिमय आदि से संबंधित है। इन सबके लिए व्यापक अर्थशास्त्र की जरूरत है, कारण कि व्यापक अर्थशास्त्र मे समूची अर्थव्यवस्था तथा उससे संबंधित बड़े योगों एवं औसत का अध्ययन किया जाता है।

2. जटिलताओं को कम करना

समष्टिगत विश्लेषण के द्वारा अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को सरलता से समझा जा सकता है। विभिन्न आर्थिक घटकों के पारस्परिक संबंधो को समझने की यह विधि सबसे सरल है।

3. आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए 

आर्थिक नीतियों का संबंध व्यक्ति विशेष से न होकर सम्पूर्ण समुदाय या समूची अर्थव्यवस्था से होता है। सरकार का मुख्य दायित्व अति- जनसंख्या, सामान्य कीमतें, राष्ट्रीय आय, व्यापार के सामान्य स्तर, कुल रोजगार आदि को नियन्त्रित करना है। कोई भी सरकार इन समस्याओं को व्यक्तिगत स्तर पर हल नही कर सकती है। इसके व्यापक आर्थिक विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

3. समस्याओं का समाधान 

समष्टिगत विश्लेषण न केवल समस्याओं को समझने के लिये उपयुक्त है, बल्कि राष्ट्रीय आय, रोजगार, पूंजी निर्माण, आर्थिक विकास, जनसंख्या आदि से संबंधित विभिन्न समस्याओं का समाधान करने मे भी योगदान देता है।

4. सामान्य बेकारी दूर करने के लिए 

कीन्स के रोजगार सिद्धांत के अनुसार रोजगार का स्तर प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर होता है। प्रभावपूर्ण उन तत्वों पर निर्भर होती है जो कुल मांग एवं कुल पूर्ति को प्रभावित करते है। इसलिए प्रभावपूर्ण मांग की वृद्धि करने के लिए विनियोग, कुल उत्पादन, कुल आय एवं कुल उपभोग को बढ़ाना जरूरी है। अतः बेरोजगारी के कारणों, प्रभावों एवं उपचारों को व्यापक आर्थिक विश्लेषण द्वारा ही समझा जा सकता है।

6. आर्थिक विकास के लिए

आर्थिक विकास के स्तर को ऊँचा करने के लिए अर्थव्यवस्था के साधनों का अनुमान लगाकर, उनका उपभोक्ता वस्तुओं एवं पूंजीगत वस्तुओं के बीच उचित वितरण करने के लिए उससे संबंधित समस्याओं का अध्ययन व्यापक अर्थशास्त्र मे ही किया जा सकता है।

7. मौद्रिक समस्याएं हल करने के लिए 

मुद्रा संबंधी समस्याओं-- मुद्रा प्रसार, मुद्रा संकुचन का विश्लेषण एवं समझना व्यापक आर्थिक विश्लेषण से ही संभव है।

8. राष्ट्रीय आय की गणना एवं सामाजिक लेखांकन 

समष्टिगत विश्लेषण के द्वारा ही राष्ट्रीय आय की गणना संभव है। राष्ट्रीय आय के क्षेत्रानुसार वर्गीकरण के द्वारा ही यह जानकारी मिलती है कि विभिन्न क्षेत्रों का योगदान कितना है? सामाजिक लेखांकन-विधि समष्टिगत विश्लेषण पर ही आधारित है।

9. व्यापार चक्र रोकने के लिए 

एक गतिशील अर्थव्यवस्था की प्रमुख समस्याओं, जैसे-- आर्थिक उच्चावचन राष्ट्रीय आय आदि के विश्लेषण, समाधान ढूंढने एवं उनके संबंध मे व्यावहारिक नीति के निर्देश मे व्यापक आर्थिक विश्लेषण की विधि बड़ी सहायक है।

10. मुद्रा स्फीति एवं संकुचन के प्रभावों का अध्ययन 

समष्टि विश्लेषण के द्वारा ही अर्थव्यवस्था मे होने वाली मुद्रा-स्फीति एवं संकुचन के प्रभावों का अध्ययन किया जा सकता है तथा बुरे प्रभावों से बचने के उपाय खोजे जा सकते है।

11. सूक्ष्म अर्थशास्त्र के विकास मे सहायक

सूक्ष्म अर्थशास्त्र विभिन्न नियमों एवं सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है, किन्तु ऐसा करने मे उसे व्यापक अर्थशास्त्र की सहायता लेनी पड़ती है। उदाहरण के लिए-- उपयोगिता ह्रास नियम व्यक्तियों के समूहों के व्यवहार की विवेचना से ही प्रतिपादित किया जा सकता है। एक फर्म के सिद्धांत का निर्माण बहुत-सी फर्मों के व्यवहार का सामूहिक रूप से अध्ययन करके ही किया जा सकता है।

12. अनेक समस्याओं का व्यष्टिगत अर्थशास्त्र द्वारा समाधान नही 

अर्थशास्त्र मे अनेक ऐसी समस्याएं है जिनका अध्ययन व्यष्टिगत या सूक्ष्म विश्लेषण के द्वारा नही हो पाता है, जैसे राजस्व, विदेशी व्यापार, मुद्रा, बैंकिंग इत्यादि। इस समस्याओं के अध्ययन हेतु समष्टिगत विश्लेषण जरूरी है।

समष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएं या दोष (samasti arthashastra ki simaye)

samasti arthashastra ki simaye;हालांकि समष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण एवं नीतियों के निर्धारण हेतु काफी महत्वपूर्ण माना जाता है फिर भी इसमे कुछ दोष व कमियां पायी जाती है जिन्हे वृहत् अर्थशास्त्र सीमाएं भी कह सकते है। इनको निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है--

1. व्यक्तिगत इकाइयों से निकाले गये निष्कर्ष सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर लागू नही होते 

ऐसे निष्कर्ष जो व्यक्तिगत इकाइयों या व्यक्तियों के छोटे समूह के अध्ययन से निकाले गये है, सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था मे लागू नही हो सकते, यदि ऐसे निष्कर्षों को अन्धाधुन्ध संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर लागू कर दिया जाये तो वे खतरनाक और हानिकारक हो सकते है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति बैंक मे अपनी जमा राशि को निकाल लेता है तो कोई विशेष बात नही है, परन्तु इस प्रवृत्ति को समस्त व्यक्ति प्रयोग मे लाते है तो बैंक फेल हो जायेगी और इसका प्रभाव अन्य बैंकों पर भी पड़ेगा।

2. समूह से निकाले गये निष्कर्ष भ्रामक होते है

समूह के अध्ययन को अत्यधिक महत्व देना खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का निर्माण व्यक्तिगत इकाइयों तथा छोटे समूह के आधार पर ही होता है।

3. समूहों मे एकरूपता न होना 

सभी समूहों मे एकरूपता एवं सजातीयता नही पाई जाती किन्तु सही निष्कर्षों पर तभी पहुंचा जा सकता है जब अध्ययन मे सम्मिलित किये गये समूह सजातीय हो।

4. परिणाम को मापने मे कठिनाई

वृहत अर्थशास्त्र मे युगों के मापने की समस्या उत्पन्न होती है अर्थात् भिन्न-भिन्न स्वभाव वाली वस्तुओं को किस प्रकार एक रूप मे व्यक्त किया जाये यह एक समस्या है।

5. समूह की अपेक्षा समूह की रचना अधिक महत्वपूर्ण होती है

समूह की अपेक्षा समूह की बनावट, रचना तथा अंगो का अधिक महत्व होता है इसलिए समस्या का समाधान तभी हो सकता है, जब हम योग अथवा समूह को अलग-अलग भागों मे तोड़कर इनकी क्रियाओं का पृथक-पृथक रूप से विश्लेषण करें।

समष्टि अर्थशास्त्र की प्रकृति

व्यापक/समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत अर्थव्यवस्था का सामूहिक रूप से अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार, इसके अंतर्गत राष्ट्रीय आय, कुल उत्पादन, कुल उपभोग, कुल बचत, कुल विनियोग जैसी यौगिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। चूंकि, इसके अंतर्गत व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन न करके कुछ योगों का अध्ययन किया जाता है इसलिए इसे सामूहिक अर्थशास्त्र या यौगिक अर्थशास्त्र भी कहते है। समष्टि अर्थशास्त्र को परिभाषित करते हुए बौल्डिंग ने लिखा है," व्यापक अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र का वह भाग है जो बड़े समूहों तथा औसतों का अध्ययन करता है, न कि विशिष्ट मदों का, और इन समूहों को उपयोगी ढंग से परिभाषित करने का प्रयास करता है तथा इसके पारस्परिक संबंधो की जांच करता है।" 

व्यापक अर्थशास्त्र को समझाते हुए प्रो. गार्डनर एक्ले लिखते है," व्यापक अर्थशास्त्र (Macro Economic) समूहों अथवा समस्त अर्थशास्त्र से संबंध रखने वाले औसतों का अध्ययन है जैसे कुल रोजगार, राष्ट्रीय आय, राष्ट्रीय उत्पाद, कुल विनियोजन, कुल उपभोग, कुल बचत, समग्र पूर्ति, समग्र मांग, सामान्य कीमत स्तर, सामान्य मजदूरी स्तर तथा सामान्य लागत ढांचा।"

प्रो. शुल्ज के अनुसार," व्यापक माॅडल (अर्थशास्त्र) कुल संबंधो की व्याख्या करता है।" 

इसी तरह लिप्से एवं क्रिस्टल ने कहा है कि " समष्टिगत अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था अथवा आर्थिक समष्टि के आचरण का अध्ययन है।" 

इस प्रकार, व्यापक अर्थशास्त्र, आर्थिक विश्लेषण की वह शाखा है जो कि समस्त अर्थव्यवस्था तथा अर्थव्यवस्था से संबंधित बड़े योगों या औसतों का, उनके पारस्परिक संबंधो का अध्ययन करता है।

यह भी पढ़ें; समष्टि अर्थशास्त्र क्या है? परिभाषा, विशेषताएं, क्षेत्र

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