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3/25/2021

तैमूर का भारत पर आक्रमण, उद्देश्य, प्रभाव

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तैमूर के भारत पर आक्रमण के उद्देश्‍य 

taimur ka aakraman ka uddeshya;तैमूर भारत पर विजय प्राप्‍त करके भारत पर आक्रमण करने वाले वीरों में अपनी गणना करना चाहता था, इसके अलावा वह महमूद गजनवी तथा मुहम्‍मद गौरी के समान भारत पर आक्रमण करके भारत का धन लूटना चाहता था। वह काफिरों पर विजय प्राप्‍त करना चाहता था। तैमूर के इस प्रकार विचारों के साथ इस समय भारत के अनेक ऐसे कारण उपस्थित हो गये, जिनमें तैमूर को भारत पर आक्रमण करने के उद्देश्‍य से सफलता प्राप्‍त हुई। 

1. भारत में अराजकता 

फिरोज तुगलक के बाद भारत में अराजकता फैली और इसमें वृद्धि होती गई, जो उसके अयोग्‍य उत्तराधिकारी के वंश की बात नहीं थी। ऐसे समय में तैमूर ने समय का लाभ उठाने की बात सोची और भारत पर आक्रमण कर दिया। 

2. धार्मिक कट्टरता

तैमूर इस्‍लाम धर्म को मानता था। वह एक कट्टर मुसलमान था। इसी कारण वह काफिरों पर विजय प्राप्‍त करना चाहता था और स्‍वंय मुजाहिद की उपाधि प्राप्‍त करना चाहता था। 

3. तत्‍कालीन कारण

तैमूर के आक्रमण का तत्‍कालीन कारण तैमूर के पोते पीर मुहम्‍मद सुल्‍तान के शासन सरंगखां के मध्‍य संघर्ष था। पीर मुहम्‍मद काबूल का गवर्नर था, वह सरंगखां से कर लेना चाहता था, जिसे सरंग मना कर चुका था। सरंग द्वारा कर न देने के प्रश्‍न पर तैमूर व उसके पोते ने 1309 ई. में भारत पर आक्रमण कर दिया। 

4. धन का लालच 

तैमूर के आक्रमण का एक कारण यह भी था कि वह भारतीय  राज्‍यों का धन लूटना चाहता था क्‍योकिं उसका स्‍वंय का राजकोष भी रिक्‍त हो चुका था। 

तैमूर का भारत पर आक्रमण (taimur ka bharat pr aakraman)

तैमूर का भारत पर आक्रमण इस प्रकार है--

1. तुलम्‍बा का हत्‍याकाण्‍ड

तैमूर अप्रैल, 1398 में समरकंद से भारत आक्रमण के लिए रवाना हुआ। नौकाओं का एक पुल बनाकर 21 सितम्‍बर, 1398 को उसने सिन्‍ध नदी को पार कर लिया। एक स्‍थानीय शासक शहाबुद्दीन मुबारक शाह को पराजित कर तैमूर आगे बढ़ा। झेलम नदी को पार कर तैमूर सेना ने तुलम्‍बा के सामने डेरा डाल दिया। तुलम्‍बा के नागरिकों द्वारा निश्‍चित धन‍राशि देने की स्थिति में नगर और नागरिकों को नुकसान न पहुंचाने का आश्‍वासन दिया गया। इस आश्‍वासन के बावजूद, जब सुरक्षा धन एकत्रित किया जा रहा था, सैनिकों ने तैमूर के आदेश पर नगर में प्रवेश कर शहर को लूटा, जलाया, कत्‍लेआम कियाय और लोगों को बन्‍दी बनाया। 20 अक्‍टूबर को तैमूर तुलम्‍बा से रवाना हो गया। दो दिन बाद जसरथ खोखर के सैनिकों ने प्रतिरोध की कोशिश की परंतु सबके सब मारे गए। इसके शाहनवाज नामक कस्‍बे के ढेर सारे अनाज को जब साथ न ले जा सके तो उसे तैमूर के आदेश पर जला दिया गया। 

2. पाक पाटन और दीपालपुर की लूट

26 अक्‍टुबर,1398 को तैमूर का पौत्र पीर मोहम्‍मद भी उससे आ मिला। भारत आक्रमण के युद्धों में तैमूर सेना के दक्षिण  पक्ष का संचालन और नेतृत्‍व पीर मोहम्‍मद के पास रहा। व्‍यास नदी को नौकाओं के पूल से और तैरकर पार किया गया। पाक पाटन तथा दीपालपुर के नागरिकों ने भी अपने प्रतिरोध का परिणाम भुगता। दोनो नगरों ने लूट और नर संहार के भंयकर नजारें देखें यहां काफी स्‍त्री-बच्‍चे बन्‍दी बना लिए गए। काफी लोगों ने भागकर भटनेर के किलों में शरण ली। 

2. दिल्‍ली में पहली मुठभेड़, एक लाख हिन्‍दू कत्‍ल हुए

2 दिसम्‍बर, 1398 को सारी तैमूरी सेना ने कैथल से कूच किया। पानीपत होते हुए तैमूर जल्‍दी-जल्‍दी दिल्‍ली की ओर बढ़ चला। 11 दिसम्‍बर को यमुना नदी को पार कर तैमूर ने दिल्‍ली से थोड़ा बाहर जहांपनाह नामक महल में अपना निवास बनाया। 12 दिसम्‍बर, 1398 को बजीर मल्‍लू इकबाल खां ने 4 हजार घुड़सवारों और 5 हजार पैदल सेनिकों के साथ तैमूर की सेना के पिछले हिस्‍से पर आक्रमण किया। पहली ही मुठभेड़ में मल्‍लु खां पीछे खदेड दिया गया। इस पहली असफल मुठभेड़ का एकमात्र परिणाम एक भयानक हत्‍याकाण्‍ड था। तैमूर के शिविर में एक लाख हिन्‍दू कैदी थे। मल्‍लू खां द्वारा मुक्‍त किए जाने के विचार से वे बड़ी प्रसन्‍नता प्रकट कर रहे थें। तैमूर ने यह भाव देख लिया था। उसने सबकी हत्‍या करने का आदेश दे दिया। सबके सब डाले गए।   

3. दिल्‍ली सुल्‍तान की निर्णायक हार 

18 दिसम्‍बर, 1398 को दिल्‍ली के बाहर जो निर्णायक युद्ध हुआ उसमें सुल्‍तान महतूद शाह तुगलक तथा मल्‍लु इकबाल 10 हजार घुड़सवार तथा 40 हजार पैदल सैनिकों को ही मैदान में ला सके। युद्ध में तैमूर की निर्णायक विजय हुई। सुल्‍तान महमूद ने तथा मल्‍लु इकबाल ने भाग कर दिल्‍ली नगर के अन्‍दर शरण ली। दूसरे दिन सुबह होने के पहले ही महमूद शाह और मल्‍लू दिल्‍ली शहर छोड़कर भाग चुके थे। 

तैमूर के आक्रमण का प्रभाव (taimur ke aakraman ke prabhav)

1. राजनीतिक प्रभाव 

 राजनीति के क्षेत्र में तैमूर का आक्रमण अत्‍यंत प्रभावशाली साबित हुआ। तैमूर का आक्रमण तुगलक वंश पर अंतिम प्रहार था। इसके कारण यह टुट गया। 1412 ई. में एक नए वंश की स्‍थापना हुई। प्रांतपतियों ने अनेक स्‍वतंत्र राज्‍य स्‍थापित किए। जिसमें कारण तुगलक वंश छिन्‍न-भिन्‍न हो गया। ख्‍वरजा जहां ने जौनपुर में दिलावर खां ने मालवा में तथा मुजफ्फर शाह ने गुजरात में स्‍वतंत्र राज्‍य स्‍थापित किए। दक्षिण में विजयनगर और बहमनी राज्‍य स्‍थापित हुए। तैमूर के आक्रमण के कारण सल्‍तनत में अराजकता एंव अव्‍यवस्‍था फैल गई। पंजाब में खोकरों का उत्‍पात चरम सीमा पर पहुंच गया। छोटे-छोटे स्‍वतंत्र राज्‍यों में ईर्ष्‍या और कलह की भावना बढी। 

राजनैतिक दृष्टि से तैमूर के आक्रमण से भारत की राज्‍य सत्ता कमजोर हो गई। तैमूर के आक्रमण से तथा पंजाब और समरकंद के झगड़ों का प्रभाव यह पड़ा कि भारत पर विदेशियों के आक्रमण बार-बार हुए। अंत में तुगलक शासन का अंत और मुगल साम्राज्‍य की नींव पड़ी। 

2. सामाजिक प्रभाव 

उसके आक्रमण से भारतीय समाज को नुकसान हुआ। आर्थिक हानि के साथ जनसंख्‍या पर प्रभाव पड़ा। उसने हिन्‍दूओं का वध भी किया। हत्‍याओं और लूट के कारण कई घर वीरान हो गए। सामाजिक व्‍यवस्‍था नष्‍ट हो गई। समाज में असंतोष और भय फैल गया। उसका मूल उद्देश्‍य भारत में हिन्‍दूओं का संहार करना एंव इस्‍लाम का विस्‍तार करना था। उसने अनेक लोगों को दास बनाया। 

3. सांस्‍कृतिक प्रभाव  

उसने अपने आक्रमण से अनेक मंदिरों और भगवनों को नष्‍ट किया जिसके कारण सांस्‍कृतिक प्रभाव कम नहीं थे। अप्रत्‍यक्ष रूप से उसके आक्रमण का भारतीय साहित्‍य पर प्रभाव पड़ा। उसके बाद भारत में अनेक गणराज्‍य स्‍थापित हुए। गुजरात, मालवा, जौनपुर, बंगला, खानदेश, बहमनी राज्‍य, विजयनगर राज्‍यों में साहित्‍य और कला की उन्‍नति हुई। एशिया के साथ भारत का संपर्क बढ़ा।

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