Har din kuch naya sikhe

Learn Something New Every Day.

2/02/2021

नौकरशाही के कार्य, गुण एवं दोष

By:   Last Updated: in: ,

नौकरशाही के कार्य (naukarshahi ke karya)

नौकरशाही के कार्य इस प्रकार है--

1. नीति निर्माण संबंधी 

नीति निर्माण का कार्य मुख्यतः राजनीतिक नेतृत्व का होता है, लेकिन इसमें नौकरशाही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राजनीतिक नेतृत्व नीति निर्माण से पूर्व नौकरशाही द्वारा एकत्रित सूचनाओं, आंकड़ों एवं तथ्यों का अवलोकन कर अधिकारियों से परामर्श करता है। इस परामर्श के बाद ही निर्णय लिया जाता है। 

पढ़ना न भूलें; नौकरशाही अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

2. विधि निर्माण मे महत्वपूर्ण भूमिका 

अधिकारी तंत्र विधेयक का प्रारूप तैयार करता है। इस तैयार किये गये विधि के प्रारूप पर व्यवस्थापिका सिर्फ अंतिम स्वीकृति प्रदान करने का कार्य करती है। इस तरह विधि निर्माण मे सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका नौकरशाही की होती है।

3. शासन के निर्णयों का पालन करवाना 

शासन द्वारा लिये गये सभी निर्णयों का पालन नौकरशाही के माध्यम से होता है। कर वसूल करना, शांति व्यवस्था बनाये रखना, शासन द्वारा स्वीकृत योजनाओं को क्रियान्वित करवाना, शासन द्वारा पारित कानूनों का पालन करवाना आदि सभी कार्य अधिकारी तंत्र ही करता है। इस तरह शासन के सभी कार्यों की सफलता के लिए अधिकारी तंत्र ही प्रमुख भूमिका अदा करता है।

4. प्रशासन को सुसंगठित बनाना 

संगठन जितना व्यवस्थित होगा, प्रशासन उतनी ही कुशलता चल सकेगा। इसलिए अधिकारी तंत्र प्रशासन को सक्षम बनाने के लिए समय-समय पर आवश्यक निर्णय लेता रहता है। इस तरह संगठन को सुसंगठित करने मे नौकरशाही महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। 

5.  सामाजिक परिवर्तन हेतु तैयारी 

प्रजातंत्रीय सरकार का सच्चा मापदंड बदलती हुई सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को पहचानना तथा उनके अनुसार कार्य करना होता है। चूंकि जनता के संपर्क मे नौकरशाही ही आती है, अतः वही समाज के विभिन्न वर्गों के कार्य करती है तथा जनकल्याण के लिए पहल करती है।

6. प्रतिद्वंदी, हितों के बीच समायोजन 

चूंकि नौकरशाही जनता के बीच मे कार्य करती है। इस कारण उसकी पकड़ जनता की नब्ज पर होती है। प्रशासन मे अनेक बार ऐसे अवसर आते है जब विभिन्न वर्गों व विभिन्न हितों मे परस्पर संघर्ष की स्थिति बन जाती है। ऐसी अवस्था मे नौकरशाही ही विभिन्न हितों के बीच सामंजस्य स्थापित करती है। उदाहरण के लिए हमारे देश मे यदि किसी स्थान पर साम्प्रदायिकता उपद्रव इत्यादि है तो प्रशासन संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर उनके बीच सहयोग तथा सद्भावना का वातावरण तैयार करता है। 

नौकरशाही के गुण (naukarshahi ke gun)

नौकरशाही के गुण इस प्रकार है--

1. उन साधनों का पता लगाना जिससे कि लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके 

संगठन द्वारा निर्धारित उद्देश्यों को सामने रखकर उन साधनों का पता लगाना जिससे कि उन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। लक्ष्य निर्धारित करना सरल कार्य है लेकिन उसे प्राप्त करना एक कठिन कार्य होता है। नौकरशाही तंत्र द्वारा इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती है।

2. वैषयिकता को प्रोत्साहन 

नौकरशाही तंत्र मे प्रत्येक कार्य नियमानुसार तथा नियमित रूप से किया जाता है इस कारण साधारणतया संगठन के सभी लोग संगठन के कार्यों से संतुष्ट रहते है। जो कार्य नियम के अनुसार होते है उसी मे वैषयिकता संभव हो सकती है। चूंकि नौकरशाही मे प्रत्येक कार्य नियमानुसार होते है इसलिए इसमे वैषयिकता की वृद्धि होती है।

3. नीतियों को लागू करना 

नौकरशाही तंत्र का सर्वप्रमुख औद्योगिक संगठन द्वारा निर्धारित नीतियों को लागू करना है। 

4. प्राविधिक कार्यकुशलता 

नौकरशाही तंत्र के प्रमुख प्रकार्य की ओर संकेत करते हुए मर्टन ने बतलाया है की," नौकरशाही तंत्र का प्रमुख गुण प्राविधिक कार्य-कुशलता है।" 

नौकरशाही तंत्र मे कार्यकुशलता मे वृद्धि हो जाती है क्योंकि कार्य की गति, नियंत्रण, निरंतरता आदि कार्यकुशलता मे वृद्धि करने वाली दशाएं उनमे विद्यमान होती है।

5. विशेषीकरण 

एक ही प्रकार के कार्यों को करते-करते अधिकारियों को उस कार्य विशेष के प्रति अधिक जानकारी प्राप्त हो जाती है। एक आदमी अपने व्यवसाय मे कुशलता प्रााप्त कर लेता है।

6. अनुशासन 

नौकरशाही का एक अन्य कार्य अपने संगठन मे अनुशासन को बनाए रखना है। साधारणतया कर्मचारियों और उनके अधिकारियों का एक संस्तरण होता है। यदि एक स्तर का कर्मचारी कोई ऐसे नियम के विरूद्ध कार्य करता है तो उसके ऊपरी स्तर का कर्मचारी उसके विरुद्ध कार्यवाही कर सके उसे ठीक प्रकार से कार्य करने पर विवश करता है। यही कारण है कि समाज तथा संगठन मे अनुशासन बना रहता है। 

7. सतर्कता 

इस प्रणाली में कार्य मे अत्यंत सतर्कता रहती है। इसमे सरकार का कर्मचारियों पर बहुत अधिक अंकुश रहता है वे नियमों से जकड़े रहते है। 

8. विचारों मे परिवर्तनशीलता 

इसका तात्पर्य लचीलापन है। इसका अर्थ यह है कि नौकरशाही मे कर्मचारियों की अपनी कोई राजनीतिक विचारधारा नही होती। जिस विचारधारा के लोग सत्ता मे आते है, कर्मचारी उसी विचारधारा मे अपने को ढाल लेते है।

9. राजनीतिक तटस्थता 

इस पद्धति मे सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के सदस्य नही हो सकते।

10. कर्तव्यनिष्ठा 

नौकरशाही मे व्यावसायिक सुरक्षा होने से व्यक्ति का मन अपने कार्य मे लगा रहता है। अवकाश ग्रहण करने के बाद पेंशन आदि की व्यवस्था, निरंतर पदोन्नति के अवसर और वेतन मे वृद्धि आदि उसे अपने निश्चित कर्तव्य के प्रति निरंतर जागरूक रखते है और वह निष्ठा और लगन के साथ एकाग्र होकर अपनी भूमिकाओं को निभाता है।

11. न्याय तथा समानता का पालन 

नौकरशाही तंत्र के अंदर व्यक्तियों को न्याय मिल तथा समानता के आधार पर सभी लोगों के स्वार्थों की पूर्ति हो सकेगी ऐसी अपेक्षा की जाती है। यही कारण है कि अधिकारियों का चुनाव नही किया जाता वरन् योग्यता के आधार पर उन्हें नियुक्ति किया जाता है। कर्मचारियों को कुछ सामान्य आदेश दिए गए होते है जिनके आधार पर वे कार्य करते है ताकि वे सामाजिक न्याय दे सकें।

नौकरशाही तंत्र के दोष (naukarshahi ke dosh)

नौकरशाही के निम्न दोष है--

1. उद्देश्यों की अवहेलना 

नियम पालन और औपचारिकता की अधिकता नौकरशाही तंत्र के कर्मचारियों को संस्था या संगठन के वास्तविक लक्ष्यों और निर्धारित उद्देश्यों के प्रति काफी सीमा तक उदासीन बना देती है।

2. अत्यधिक औपचारिकता 

नियम पालन और अनुशासन के प्रति अनावश्यक जागरूकता व्यक्तियों को अत्यधिक औपचारिक बना देती है। वे एक प्रकार से यंत्रों की तरह एक निश्चित और स्थित ढंग से कार्य करते है। व्यक्तियों की व्यावहारिकता नष्ट हो जाती है।

3. निर्णय लेने की कमी

नौकरशाही तंत्र की एक कमी यह है कि इसके अंतर्गत अधिकारियों मे स्वयं निर्णय लेने की कमी होती है। वे साधारणतया लकीर के फकीर होते है।

4. कार्य संचालन मे विलंब 

साधारणतया कार्यालयों मे उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है, जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते है। इस कारण साधारण व्यक्तियों के कार्य तथा साधारण समझे जाने वाले कार्यों मे काफी विलंब हो जाता है। इस " लालफीताशाही " की प्रवृत्ति के कारण लोगों मे असंतोष व्याप्त हो जाता है। लोग अपना कार्य करने के लिए रिश्वत देने लगते है जिसके कारण कर्मचारी भ्रष्ट हो जाते है। अतः समाज मे भ्रष्टाचार का प्रारंभ नौकरशाही से ही होता है। 

5. कठोर नियमबद्धता 

नौकरशाही तंत्र का एक प्रमुख दोष यह है कि इसके अंतर्गत नियम पालन और अनुशासन पर बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। प्रत्येक मामले, नियम और पद्धति पर विचार रखा जाता है। कार्य की सफलता के लिए अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करने का प्रयत्न नही किया जाता है। नियमानुकूल काम होना चाहिए चाहे कार्य की गति कम हो जाए और चाहे वंचित उद्देश्यों की पूर्ति मे कठिनता हो।

6. अश्रद्धा 

सरकारी कर्मचारी जनता की मांग की सदा अवहेलना करते रहते है, इसके फलस्वरूप जनता की उसमे श्रद्धा नही रहती।

7. जन उत्तरदायित्व का अभाव 

सरकारी कर्मचारी अपने कार्यों के लिए सरकार के प्रति उत्तरदायी होते है, जनता के प्रति नही। वे प्रायः जनहित को ध्यान मे नही रखते। 

8. शक्ति प्रेम 

नौकरशाही मे शक्ति की भूख होती है। मंत्रियों के उत्तरदायित्व के नाम पर वे दिनों-दिन ज्यादा शक्तिशाली होते जा रहे है तथा उसी अनुपात मे लोकहित को विस्मृत करते जा रहे है।

9. श्रेष्ठता की भावना 

नौकरशाही का एक अन्य दोष है कि इस व्यवस्था मे अधिकारियों मे श्रेष्ठता की भावना आ जाती है। चूंकि सत्ता इनके हाथ मे रहती है तथा इन्हें कुछ विशेषाधिकार प्राप्त रहते है। इसलिए ये अपने आपको जनता से श्रेष्ठ एवं पृथक समझने लगते है तथा जनता के प्रति हीन-भावना रखते है।

10. कागजों मे हेरा-फेरी 

कभी-कभी अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ये लोग कागजों मे हेरा-फेरी भी कर देते है। किसी फाइल को इतना नीचे दबा देते है कि उसका निकलना कठिन हो जाता है। इसी प्रकार के और भी अनेक हथकंडे अपनाते है। 

11. निरंकुशता 

नौकरशाही के अधिकारी निरंकुशता का व्यवहार करते है।  जनता के प्रति इनका व्यवहार निरंकुश होता है। ये अपने समक्ष किसी को कुछ नही समझते है व मनमानी करते है। शासन के आदेशों को जनहित की अपेक्षा अपने मनमाने ढंग से लागू करते है। 

नौकरशाही मे सुधार हेतु सुझाव 

नौकरशाही नियमानुसार होने से एक अच्छी सेवक व्यवस्था है, लेकिन उसमे कुछ दोष पैदा गए है। इन दोषों को निम्न प्रकार दूर किया जा सकता है--

1. जनसंपर्क 

जनसंपर्क से नौकरशाही की काफी बुराइयाँ दूर हो जाती है। इसमे अधिकारी जनता के सीधे संपर्क मे आ जाते है।

2. सत्ता का विकेन्द्रीकरण 

सत्ता का विकेन्द्रीकरण तथा स्थानीय स्वायत्त शासन की स्थापना से नौकरशाही के दोष दूर हो जाते है।

3. योग्य चरित्रवान, निष्ठावान मंत्रियों की नियुक्ति 

नौकरशाही इसलिए हावी होती है, क्योंकि मंत्री अयोग्य तथा नौसिखिए होते है। यदि इस दोष को रोका जाए तो उचित होगा।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।