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1/31/2021

विकास प्रशासन अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, विशेषताएं, क्षेत्र

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vikas prashasan arth paribhasha uddeshya visheshta  kshera;विकास प्रशासन की अवधारणा को प्रतिपादित करने वाले एडबर्ड वीन्डनर सबसे पहले विद्वान थे। बाद मे प्रो. रिग्ज, जाॅसेफ पालोम्परा तथा एलबर्ट वाॅटसन इत्यादि विद्वानों ने इस अवधारणा के विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विकास प्रशासन मूलतः तीसरी दुनिया के देशों अफ्रीका, लेटिन अमेरिका एवं एशियाई देशों के प्रशासन से ज्यादा संबंधित है। इन देशों के समक्ष आजादी के बाद अनेक गंभीर समस्याएं जैसे-- आशिक्षा, कुपोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, अविकसित या अर्द्ध विकसित अर्थ एवं राजनीतिक व्यवस्था, संसाधनों का दोहन, प्रबंध एवं व्यवस्थाओं मे कौशल एवं तकनीक का अभाव, वैज्ञानिक सोच की कमी बढ़ती हुई जनसंख्या, सामाजिक सुधारों की कमी या आंशिक जड़वार्दिता, ग्रामीण जीवन की दुर्दशा आदि अनेक समस्याएं थी। तीसरी दुनिया के देश इन समस्याओं पर तब ही विजय पा सकते है जब वे अपने प्रशासन को न केवल गतिशील बनाएं अपितु प्रशासन मे उन तत्वों का भी समावेश करें जिनके सहयोग से समस्याओं का निराकरण संभव हो सके।

भारत के संदर्भ मे विकास प्रशासन शब्द का प्रयोग सबसे पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री यू. एल. गोस्वामी ने अपने एक आलेख मे वर्ष 1955 मे किया था। आलेख का शीर्षक था " दी स्ट्रक्चर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन इन इंडिया " जो कि इंडिया जर्नल ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नामक जर्नल मे छपा था। 

विकास प्रशासन का अर्थ (visheshta kya hai)

विकास प्रशासन दो शब्दों से मिलकर बना है विकास+प्रशासन। विकास शब्द का अर्थ है, निरन्तर आगे बढ़ना और प्रशासन का अर्थ है-- सेवा करना अथवा सेवा के लिए प्रबंध करना। शाब्दिक अर्थ मे विकास प्रशासन मे जनता की सेवा के लिए विकास कार्यों का करना शामिल है। 

अतः विकास प्रशासन का अर्थ विकास कार्यक्रमों के प्रशासन तथा विकास  संबंधी उद्देश्य के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों को क्रियान्वित करने के तरीके से है। 

विकास प्रशासन की परिभाषा (visheshta ki paribhasha)

प्रो. ए. वीडनर के अनुसार," विकास प्रशासन राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिये संगठन का मार्गदर्शन करता है। यह मुख्य रूप से एक कार्योन्मुख एवं लक्ष्योन्मुख प्रशासनिक प्रणाली पर बल देता है।" 

प्रो. माॅन्टगोमरी के अनुसार," विकास प्रशासन का तात्पर्य अर्थव्यवस्था और सामाजिक सेवाओं मे नियोजित ढंग से परिवर्तन लाना है।

प्रो. फेसनोड के अनुसार," नवीन मूल्यों एवं सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करना ही विकास प्रशासन है।" 

बी. जगन्नाथ के अनुसार," विकास प्रशासन वह प्रक्रिया है, जो पूर्व निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु क्रिया प्रेरित और अभिमुख होती है। इसके अंतर्गत नीति, योजना, कार्यक्रम परियोजनायें सभी आती है।"

प्रो. रिग्स के अनुसार," विकास प्रशासन का संबंध विकास कार्यक्रमों के प्रशासन, खासकर विकासलक्षों की उपलब्धि के लिए नीतियां और योजनाओं को क्रियान्वित करने से है।" 

फेयोल ने विकास प्रशासन की परिभाषा देते हुये कहा है कि, विकास प्रशासन नवीन मूल्यों को लाने वाला है। इसमे वे सभी नये कार्य सम्मिलित होते है, जो विकासशील देशों मे आधुनिकीकरण तथा औद्योगीकरण के मार्ग पर चलने के लिये अपने हाथों मे लिये है। 

साधारणतया विकास प्रशासन मे संगठन और साधन सम्मिलित है जो नियोजन, आर्थिक विकास तथा राष्ट्रीय आय का प्रसार करने के लिये साधनों को जुटाने और बांटने के लिये स्थापित किये जाते है।

विकास प्रशासन की उपर्युक्त परिभाषाओं मे यद्यपि संकुचित व विस्तृत दोनों ही रूप देखने को मिलते है, परन्तु इस बात से सभी सहमत है, कि यह (विकास प्रशासन) लक्ष्योन्मुख तथा कार्योंन्मुखी है। सामान्यता विकास प्रशासन को एक निश्चित और निर्धारित कार्यक्रम की पूर्ति के लिए अपनाया जाता है, न कि प्रतिदिन के प्रशासन कार्यों को निबटाने के लिये।

विकास प्रशासन के तत्व (vikas prashasan ke tatva)

विकास प्रशासन की उपर्युक्त परिभाषाओं के विश्लेषण से विकास प्रशासन की समुचित तथा विस्तृत दोनों ही अवधारणाएं स्पष्ट होती है। परिभाषाओं के उपर्युक्त विश्लेषण के पश्चात विकास के संबंध मे निम्म तत्व उभरकर सामने आते है--

1. विकास प्रशासन उच्चतर स्थिति की तरफ अग्रसर होने की प्रक्रिया है।

2. विकास प्रशासन निरंतर और गतिशील प्रक्रिया है।

3. विकास प्रशासन निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक संयुक्त प्रयास है।

4. विकास प्रशासन एक कार्योन्मुखी और लक्ष्योन्मुख प्रशासनिक व्यवस्था है।

5. विकास प्रशासन तीसरी दुनिया की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने हेतु महत्वपूर्ण साधन और यंत्र है। विकास कार्यक्रमों के प्रशासन तथा विकास संबंधी उद्देश्यों के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों को क्रियान्वित करने के तरीके से है।

विकास प्रशासन के उद्देश्य (vikas prashasan ke uddeshya)

विकास प्रशासन के उद्देश्य इस प्रकार है--

1. विकास संबंधी नीतियों और लक्ष्यों का सूत्रीकरण करना।

2. कार्यक्रम और परियोजना का प्रबंध करना।

3. प्रशासनिक संगठन और प्रक्रिया का पुनर्गठन करना।

4. विकास कार्यों मे जनता की सहभागिता प्राप्त करने का प्रयास।

5. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना की प्रगति करना।

6. परिणामों का मूल्यांकन करना।

7. आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी साधनों का प्रयोग।

विकास प्रशासन के इन उद्देश्यों की प्राप्तियों मे राजस्व, कानून और व्यवस्था तथा विकास अभिकरण सहयोग प्रदान करते है।

विकास प्रशासन की विशेषताएं (vikas prashasan ki visheshta)

1. परिवर्तनोन्मुखी 

विकास प्रशासन का प्रमुख केन्द्र बिन्दु सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन है। विकास प्रशासन की यही विशेषता विकास प्रशासन को परंपरागत प्रशासन से अलग करती है। जहां प्रशासन का मुख्य ध्यये यथास्थिति को कायम रखना है, वहीं विकास प्रशासन का लक्ष्य सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों मे परिवर्तन लाना है। इसी लिए यह परिवर्तनोन्मुखी प्रशासन कहलाता है।

2. प्रजातांत्रिक मूल्य 

विकास प्रशासन की यह विशेषता है कि इसमे मानव अधिकारों और मानव मूल्यों के प्रति सम्मान, जनहित की भावना तथा जनता के प्रति उत्तरदायी का बोध रहता है। चूंकि विकास प्रशासन का लक्ष्य सरकारी प्रशासन द्वारा किए जाने वाले प्रयासों से है और सरकारी प्रयास जनकल्याण और प्रजातांत्रिक मूल्यों को ध्यान मे रखकर किए जाते है अतः विकास प्रशासन को प्रजातांत्रिक मूल्यों से अलग नही किया जा सकता।

5. लाचीलापन 

विकास प्रशासन नियमों से हटकर जनभागीदारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से कार्य करता है। इसलिए इसमे प्रशासकीय अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक निर्णय लेने के अधिकार सौपे जाते है।

6. एकीकरण 

विकास प्रशासन मे विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए विविध स्तरों का निर्माण किया जाता है। किन्तु इनके मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए किसी इकाई को उत्तरदायी बना दिया जाता है। साथ ही निर्धारित क्षेत्र या समूह के समग्र विकास हेतु किए जा रहे है विविध प्रयत्नों तथा उन्हें क्रियान्वित करने वाले अभिकरणों के मध्य एकीकरण पर बल दिया जाता है।

7. प्रशासन के आधार तथा क्षेत्राधिकार मे वृद्धि

विकास के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु जहाँ एक ओर नए पदों को सृजित किया जाता है। वही दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों को उन कार्यों के संदर्भ मे अनेक शक्तियां तथा अधिकार सौंपे जाते है। इस प्रकार विकास प्रशासन जहाँ एक ओर नौकरशाही के आकार मे वृद्धि करता है वहीं दूसरी ओर इसका परिणाम अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र मे वृद्धि के रूप मे देखने को मिलता है। 

विकास प्रशासन का क्षेत्र 

परंपरागत प्रशासन की तुलना मे विकास प्रशासन के दायित्वों मे वृद्धि हो गई है। साथ ही इन दायित्वों के अनुरूप ही उसके स्वरूप मे क्रांतिकारी परिवर्तन भी हुआ है। विकास प्रशासन का क्षेत्र व्यापक हुआ है। विकास प्रशासन के क्षेत्र को निम्म बिन्दुओं मे व्यक्त किया जा सकता है--

1. कानूनों का क्रियान्वित एवं शांति व्यवस्था की स्थापना 

शांति तथा व्यवस्था विकास की प्रथम आवश्यकता है। इस उद्देश्य के लिए वह कानूनों को क्रियान्वित करता है।

2. जनकल्याण 

विकास प्रशासन के क्षेत्र की दूसरी प्रमुख बात जनकल्याण है। विकास प्रशासन जन कल्याण को प्रोत्साहन देने के लिए सकारात्मक रूचि लेता है।

3. सामाजिक एवं आर्थिक विकास 

एक बार जन कल्याण को लक्ष्य मान लेने के बाद स्वभावतः ही जनता का सामाजिक एवं आर्थिक विकास, विकास प्रशासन की परिधि मे आता है।

4. वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास 

विकास का प्रशासन विज्ञान तथा तकनीकी से सीधा संबंध होता है। अतः विकास प्रशासन का यह दायित्व है कि वह प्रगतिशील विज्ञान और तकनीकी मे रूचि रखें।

5. वित्तीय सहयोग 

विकास प्रशासन के क्षेत्र मे वित्तीय सहयोग भी आता है। इसके माध्यम से ही विकास प्रशासन के कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की जनता को आगे बढ़ाने का प्रयास करते है।

6. जनतांत्रिक विकेन्द्रीकरण 

विकास प्रशासन के क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित की जाने वाली अंतिम प्रमुख बात है-- लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण, जिनमे पंचायती राज्य संस्थाओं का क्रियान्वयन भी शामिल है।

शायद यह जानकारी आपके के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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