6/30/2022

नौकरशाही अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं

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naukarshahi arth paribhasha visheshta prakar;भारत मे सर्वप्रथम नौकारशी की जरूरत उस समय अनुभव की गई जब श्रीमती इंदिरा गाँधी ने देश की धीमी गति से हो रहे सामाजिक एवं आर्थिक विकास के तत्कालीन नौकरशाही को उत्तरदायी ठहराया।

जानेंगे नौकरशाही किसे कहते हैं, नौकरशाही का अर्थ, नौकरशाही की परिभाषा और नौकरशाही की विशेषताएं।

नौकरशाही का अर्थ (naukarshahi kya hai)

नौकरशाही या अधिकारी तंत्र का अर्थ उस व्यवस्था से लगाए जाते हैं जिसका पूर्णरूपेण नियंत्रण उच्च पदाधिकारियों के हाथ मे हो और वे इतने स्वेच्छाचारी हो जाएं कि उन्हें नागरिकों की निंदा करते समय भी शंका और संकोच नही होता।

नौकरशाही एक व्यंगात्मक शब्द,जो भ्रष्ट प्रशासन के लिए प्रयुक्त किया जाता हैं।

नौकरशाही अथवा अधिकारी तंत्र शब्द की उत्पत्ति फ्रांस से मानी जाती है, क्योंकि इसका पहला प्रयोग वहीं हुआ था। 

इसके बाद यह 19 वीं शताब्दी में काफी प्रचलित हो गई। नौकरशाही किसी भी शासन को चलाने तथा स्थायित्व प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है, जिससे कि समाज की जरूरतों एवं राज्य के लक्ष्यों को आसानी से पूर्ण किया जाता है। नौकरशाही से अनुभव, ज्ञान तथा उत्तरदायित्व की कामना की जाती है। लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में नौकरशाही का अपना उचित स्थान है तथा बहुत सारी जिम्मेदारियाँ एवं उम्मीदें भी इस पर टिकी हुई हैं। विस्तृत क्षेत्र का अन्वेषण करने पर पता चलता है कि नौकरशाही का उचित अथवा अनुचित इस्तेमाल सबसे ज्यादा साम्यवादी एवं अधिनायकवादी तंत्रों में किया जाता है।

नौकरशाही की उत्पत्ति सत्ता के शीर्षस्थ स्रोतों द्वारा दिए गए आदेशों के निर्धारित समय के अन्दर अनुपालन के लिए हुई है। यह सरकार के हाथ-पैर के रूप में कार्य करती है। यह अधिकारी-तंत्र भी कहलाती है, क्योंकि यह प्रचुर सत्ता सम्पन्न संस्था है तथा बहुत शक्तिशाली होती है। किन्तु इसे नियमों से बंधकर पर्दे के पीछे से कार्य करना पड़ता है तथा तटस्थता इसके लिए सर्वाधिक जरूरी समझी जाती है। अधिकारी तंत्र अथवा नौकरशाही को एक विशेष प्रकार के संगठन के रूप में देखा गया है जो कि लोक प्रशासन के संचालन के लिए एक सामान्य रूपरेखा है। 

आज का आधुनिक युग बड़ी संस्थाओं जैसे- निगम, व्यापार संघ, राजनीतिक दल, मजदूर संघ इत्यादि से भरा पड़ा है तथा इन्हें सुचारू रूप से संचालित करने के लिए एक बड़ी नौकरशाही एवं नियमों-कानूनों की आवश्यकता पड़ती है। 

अतः सरकार की कार्यपालिका के अंतर्गत एक ऐसे मशीनरी की आवश्यकता को नौकरशाही पूरा करती है जो राज्य को लोक कल्याणकारी छवि प्रदान करने में सक्षम हो।

नौकरशाही की परिभाषा (naukarshahi ki paribhasha)

आररेल्ड के अनुसार, "नौकरशाही का मतलब है अफसरों द्वारा शासन।

पिफरन के शब्दों में "अधिकारी तंत्र व्यक्तियों और कार्यों का ऐसा व्यवस्थित संगठन है जो सामूहिक प्रयास के द्वारा निश्चित लक्ष्य की सहज प्राप्ति कर सकता हैं।"

जार्ज वर्नाड शाॅ के अनुसार," सत्ता के उपासक उच्च पदाधिकारियों की समंतशाही का दूसरा नाम ही अधिकारी राज्य है।" 

जाॅ ए. वी के अनुसार," नौकरशाही का विकृत अर्थ काम मे घपता, मनमानी, अपव्यय तथा हस्तक्षेप माना जाने लगा है।" 

नौकरशाही की उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि यह वह व्यवस्था है जहां सरकारी कार्यों का संचालन ऐसे व्यक्तियों के हाथो मे होता है जो विशेष प्रशिक्षण प्राप्त, कानूनों का अक्षरशः पालन करने वाले, विधानमंडल द्वारा पारित नियमों को श्रेष्ठ समझने वाले तथा जो जनहित से परे रहते है। यह ऐसी व्यवस्था है जहां एक अधिकारी जनता के प्रति अपने को उत्तरदायी न समझकर स्वयं को अपने से बड़े अधिकारी के प्रति उत्तरदायी मानता है। जहां प्रशासन एक निर्जीव मशीन की भांति पदसोपान पद्धति द्वारा चलता है। भावनात्मक पृष्ठभूमि से दूर यह ऐसी व्यवस्था एवं कर्मचारियों का संगठन है जो शीघ्र कार्य करने की बजाय कागजी घोड़े दौड़ने मे ज्यादा विश्वास करता है, जो मितव्ययिता से दूर रहकर सार्वजनिक धन एवं समय का दुरुपयोग करते है।

व्यापक अर्थ

नौकरशाही का गलत अर्थ ही लिया जाता हो, ऐसा सही नही है। ऐसे अनेक विद्वानों है जो वर्तमान प्रशासन मे नौकरशाही को ह्रदय की संज्ञा देते है। उनके अनुसार नौकरशाही अनुभव, ज्ञान तथा उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

विलोवी के अनुसार," अपने व्यापक अर्थ मे नौकरशाही एक ऐसी प्रणाली है जहां कर्मचारियों को विभिन्न वर्गीय सोपानों, जैसे- सेक्शन, डिवीजन, ब्यूरो, डिपार्टमेंट मे बाँटा जाता है।" 

पाॅल. एच. एपेलवी के अनुसार," नौकरशाही तकनीकी दृष्टि से कुशल कर्मचारियों का एक व्यावसायिक वर्ग है जिसका संगठन पदसोपान के आधार पर किया जाता है और जो निष्पक्ष होकर राज्य का कार्य करते है।

डिमाॅक के अनुसार," यह एक ऐसी स्थिति है जहां श्रम विभाजन, विशिष्टीकरण, संगठन, पदसोपान, नियोजन एवं कार्यशीलता दिखाई देती है।

ग्लेडन के अनुसार," नौकरशाही वेतनभोगी कर्मचारियों का ऐसा संगठन है जो प्रशासन मे दक्षता लाते है। 

मेक्सवेबर के अनुसार," नौकरशाही प्रशासन का वह तंत्र है जिसकी और मानवता का अभाव है।

इन परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि नौकरशाही अर्थात् कानून का शासन। नौकरशाही का अर्थ निष्पक्षता से भी लिया जाता है। यह ऐसे अधिकारियों का समूह होता है जो अनुभव, ज्ञान और उत्तरदायित्व की भावना से युक्त होते है।

नौकरशाही के प्रकार (naukarshahi  ke prakar)

एफ. एम. मार्क्स ने नौकरशाही के चार रूपों की चर्चा की है--

1. अभिभावक नौकरशाही 

इस धारणा को मानने वाले वे लोग है जो यह मानकर चलते है कि राष्ट्र के नागरिकों का यदि कोई कल्याण कर सकता है तो वे ही कर सकते है। दूसरे लोगों के हाथों मे सत्ता जाने का अर्थ होगा देश का अहित। ऐसी नौकरशाही के विरूद्ध यदि जनता कुछ कहती है तो इनका कहना है कि जनति अज्ञानी है तथा जो उसे अपने भले-बूरे की समझ नही है। यह समझ केवल उसके पास है। ऐसी नौकरशाही भ्रष्ट एवं अकुशल तो नही होती पर जनता के प्रति उत्तरदायी भी नही होती। 

2. जातीय नौकरशाही 

इस प्रकार की नौकरशाही मे उच्च वर्ग के लोगों को ही प्रधानता दी जाती है। यह नौकरशाही उन लोगों के वर्गीय संबंधों से पैदा होती है जो नियंत्रण के मुख्य स्थानों पर रहते है। इसमे पहले से ही जो नौकरशाही से संबंधित होते है वे अपनी संतानों या नजदीकी लोगों को नए सदस्यों के रूप मे दिक्षित करते है। 

3. संरक्षक नौकरशाही 

नौकरशाही का वह स्वरूप, जहां भर्ती, योग्यता तथा प्रतिभा के स्थान पर राजनैतिक दल या सरकार मे पहुँच के कारण होती हो। इस पद्धति को लूट-प्रथा भी कह सकते है। संयुक्त राज्य अमेरिका मे अभी हजारों पद राष्ट्रपति अपने कृपा पात्रों तथा राजनैतिक समर्थकों को प्रदान करता है।

4. गुणात्मक नौकरशाही 

इस प्रणाली मे चयन का आधार प्रतियोगिता के आधार पर खुली परीक्षा होती है। यहां चयन मे प्रतिभा तथा योग्यता को प्राथमिकता दी जाती है। आजकल अधिकांश देशों मे यही प्रणाली अपनाई जाने लगी है। इस प्रणाली मे कर्मचारी या लोकसेवक किसी के प्रति दबा हुआ न रहकर सरकार के प्रति उत्तरदायी होता है तथा जन कल्याण मे रूचि ले सकता है।

नौकरशाही की विशेषताएं या लक्षण (naukarshahi ki visheshta)

नौकरशाही की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. कार्य का स्वरूप 

पर्ण विकसित कार्यलयों मे काम काज पूरा करने हेतु कर्मचारियों एवं अधिकारियों को ज्यादा कार्य करना पड़ता है। इसलिए निश्चित समय के बाद भी कर्मचारी कार्य करते है। कर्तव्य-परायणता दिखाने और बड़े अधिकारियों को खुश करने का यह सरल तरीका है जो पदोन्नति के लिए भी काम आता है।

2. अनुशासन 

इस प्रणाली मे अनुशासनबद्धता पाई जाती है।

3. पद सोपान पर आधारित संगठन

यह पद्धति पद-सोपान पर आधारित होती है। इसमे आदेश ऊपर से नीचे की ओर तथा उत्तरदायित्व नीचे से ऊपर की ओर चलता है।

4. कार्यलय का प्रबंध

कार्यालयों का प्रबंध सामान्य नियमों के अनुसार होता है जो विस्तृत तथा स्थिर होते है। इन नियमों को सीखा जा सकता है। इन नियमों को विशिष्ट तकनीकी प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त कर सकते है। 

5. भर्ती प्रणाली 

नौकरशाही मे अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भर्ती प्रतियोगी परीक्षाओं तथा साक्षात्कार के द्वारा होती है।

6. नियमों की महत्ता 

इस प्रणाली मे अधिकारियों तथा कर्मचारियों के कार्यों का निर्धारण एवं संचालन अवैयक्तिक नियमों द्धारा होता होता है। यह नियम लगभग स्थाई होते है तथा इनका निरन्तर पालन कराने की एक व्यवस्था होती है।

7. कार्यक्षेत्र विभाजन 

नौकरशाही मे अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र को निश्चित ढंग से बांट देने का सिद्धांत निहित होता है। कार्य-विभाजन कानून अथवा प्रशासकीय नियमों के आधार पर किया जाता है। नियमानुसार आवश्यक कार्यकलाप राजकीय कर्तव्य के रूप मे बाँटे जाते है। एक अधिकारी की सत्ता परिसीमित होती है। सिर्फ उन्ही व्यक्तियों को नौकर रखा जाता है जो संबंधित कार्य करने की योग्यता रखते है। कर्तव्यों के नियमित एवं निरंतर पालन करने की उचित व्यवस्था होती है।

8. सत्ता का संस्तरण 

नौकरशाही के अंतर्गत कर्मचारियों, अधिकारियों तथा उनकी सत्ता का संस्तरण पाया जाता है। पद के अनुसार सत्ता का विभाजन होता है। निम्न श्रेणी के कर्मचारियों के कार्यों की देखभाल उच्च श्रेणी के कर्मचारी करते है। निम्न पदाधिकारियों के फैसले के खिलाफ उच्च पदाधिकारियों के पास अपील हो सकती है।

9. दस्तावेजों का लिखित होना 

नौकरशाही के अंतर्गत दफ्तरों का कार्य लिखित दस्तावेजों तथा फाइलों के माध्यम से होता है। इन्हे सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी होती है। इन्हें सुरक्षित रखने हेतु क्लर्क अथवा फाइल-कीपर होते है। विभिन्न विषयों की अलग-अलग फाइल बनती है।

10. विशेषज्ञों की आवश्यकता 

आधुनिक नौकरशाही के अंतर्गत दफ्तरों का कार्य जटिल तथा विशेषित होता है। अतः कार्य को करने हेतु विशिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

11. शक्ति अर्जित करना उनका लक्ष्य  

नौकरशाही का सर्वोच्च लक्ष्य शक्ति प्राप्त करना होता है तथा इस शक्ति को बनाए रखकर इसमे वृद्धि करना उनका लक्ष्य रहता है। इस तरह वे शक्ति की राजनीति के पुजारी हो जाते है।

12. राजनैतिक तटस्थता 

नौकरशाही की एक महत्वपूर्ण विशेषता राजनीति से दूर रहना है। ये लोग दलबंदी मे भाग नही लेते। किसी भी दल की सरकार बने, उनका कार्य तो सरकार की नीतियों का क्रियान्वयन होता है।

13. पदो के एकाधिकार का अभाव

नौकरशाही मे किसी भी एक व्यक्ति का एकाधिकार नही होता। संगठन की आवश्यकतानुसार अधिकारियों का स्थानान्तरण होता रहता है। नियमों का पालन करने पर पदोन्नति तथा पालन न करने पर पदावनति की संभावनायें रहती है। इनकी वजह से भी पदों पर किसी का एकाधिकार नहो रहता। 

14. सत्ता का आधार राज्य व शासन के कानून 

नौकरशाही जो भी कार्य करती है, उसको करने का अधिकार इसे शासन से प्राप्त होता है। जब कोई व्यक्ति किसी अधिकारी के कार्य मे बाधा डालता है तो यह माना जाता है कि उसने कानून को अपने हाथ मे लिया है तथा उनका उल्लंघन किया है। यह सरकारी कर्मचारी के लिए कवच का काम करता है।

15. औपचारिकता 

नौकरशाही में कार्यालयों द्वारा कार्य संचालन औपचारिक आधार पर किया जाता है अर्थात् प्रत्येक कार्य लिखित या अन्य प्रमाणों के रूप में सुरक्षित रखना कानूनन अनिवार्य है क्योंकि प्रशासन में अनौपचारिक वक्तव्यों या कथनों का महत्त्व नहीं होता है बल्कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया तथा नियम उसे औपचारिकता का जामा पहनाते हैं। यही औपचारिकता, वैधानिकता का आधार बनती है। 

16. कार्यकुशलता 

वेबर ने आधुनिक प्रशासनिक संगठनों में प्रवर्तित नौकरशाही को कार्यकुशलता का पर्याय माना है। उनके अनुसार विशुद्ध रूप से नौकरशाही प्रतिमान का संगठन तकनीकी द ष्टि से अधिकतम कार्यकुशलता के लक्ष्य प्राप्त करने मे सक्षम होता है क्योंकि नौकरशाही में प्रत्येक कार्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है, कार्यों में निष्पक्षता रहती है तथा नियंत्रण एवं समन्वय की उचित व्यवस्था पायी जाती हैं। 

17. विशेषीकरण

आधुनिक नौकरशाही में कार्यों की जटितला तथा विशेषज्ञता दोनों में व द्धि हो रही है, अतः प्रत्येक प्रकार के पद एवं कार्य के लिए तकनीकी योग्यताओं एवं क्षमताओं से युक्त कार्मिकों का चयन किया जाता है तथा आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण भी प्रादन किया जाता है। 

18. योग्यता आधारित चयन 

नौकरशाही में प्रत्येक पद के लिए योग्यताएँ निर्धारित होती हैं ताकि प्रशासनिक कुशलता के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें। नौकरशाही में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थी को नियमानुसार योग्यता परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया का समाना करना होता है। कार्मिक की योग्यता से ही संगठन में उसकी प्रस्थिति निर्धारित होती है। 

19. आजीविका की व्यवस्था 

नौकरशाही के सदस्य के रूप में संगठन में कार्यरत व्यक्ति अपने रोजगार को ही आजीविका या व त्तिका (Career) बना लेता है। उस पद पर या सेवा में रहते हुए कर्मिक उच्च से उच्चतर की ओर उन्नति करना चाहता है। पदोन्नति की आशा में वह नौकरशाही में बना रहता है। पदोन्नति की व्यवस्था कार्यकुशलता में व द्धि की परिचायक मानी जाती है। स्थायी आधार पर नियुक्त कार्मिक को बिना गम्भीर त्रुटि के संगठन से नहीं निकाला जाता है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरण की भी व्यवस्था होती है। 

20. निश्चित पारिश्रमिक

प्रत्येक कार्मिक को उसके पद, योग्यता तथा अनुभव के आधार पर निश्चित वेतन के रूप में पारिश्रमिक दिया जाता है। वेतन के अतिरिक्त नौकरशाही के सदस्यों को अन्य लाभ जैसे-- पेंशन, भत्ते, चिकित्सा व्यय पुनर्भरण इत्यादि वित्तीय सुविधाएँ भी दी जाती हैं।

नौकरशाही की भर्ती के तरीके  

नौकरशाही की भर्ती के लिये मुख्यतः निम्नलिखित तरीके अपनाएं जाते हैं--

1. राजनीति पर आधारित नियुक्ति 

कुछ देशों में अधिकारियों की नियुक्ति राजनीति से प्रेरित होती है। सरकार के बदलने पर उच्च अधिकारियों को भी बदल दिया जाता है। अमेरिका में चुनाव के पश्चात् प्रत्येक नया राष्ट्रपति अपनी इच्छा से उच्च अधिकारियों की नियुक्ति करता है तथा पुराने अधिकारियों को अपने पद से हटा देता है। इन अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि राजनीति के आधार पर की जाती है इस पद्धति को लूट-खसोट पद्धति (Spoil System) कहते हैं। 

2. योग्यता के आधार पर नियुक्ति 

इस पद्धति में अधिकारियों की नियुक्ति उनके शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य निर्धारित योग्यताओं के आधार पर की जाती है। नियुक्ति ठीक ढंग से करने के लिए लोक सेवा आयोग की व्यवस्था की जाती है, जो लिखित तथा मौखिक परीक्षा के आधार पर योग्यता की सूची तैयार करती है तथा मेधाक्रम में स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस पद्धति को प्रत्यक्ष भर्ती भी कहते हैं। यह पद्धति भारत इंगलैंड जर्ममनी आदि देशों में अपनायी जाती है 

3. अप्रन्यक्ष भर्ती अथवा पदोन्नति 

लोक सेवाओं की भर्ती का एक अन्य तरीका यह है कि एक विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों को निश्चित अनुभव प्राप्त करने के पश्चात उच्च पदों पर नियुक्त कर दिया जाता है। इस प्रणाली के द्वारा अनुभवी व्यक्ति चुने जाते हैं तथा इससे कर्मचारियों का उत्साह तथा कार्यकुशलता बढ़ती है। 

4. व्यक्तिगत तथा सामूहिक भर्ती 

व्यक्तिगत भर्ती विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों की साक्षात्कार के बाद पदों पर नियुक्ति की जाती है। यदि पदों की संख्या अधिक हो और अधिक कर्मचारियों की भर्ती करनी हो तो सामूहिक भर्ती का ढंग अपनाया जाता है। सामाजिक भर्ती में विशेष योग्यता की आवयश्यकता नहीं होती है।

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