Har din kuch naya sikhe

Learn Something New Every Day.

1/05/2021

मौखिक संप्रेषण/संचार क्या है? माध्यम, लाभ, दोष

By:   Last Updated: in: ,

मौखिक संप्रेषण/संचार क्या है? (mokhik sampresad kise kahte hai)

मौखिक संप्रेषण मे संदेश देने वाला तथा संदेश प्राप्त करने वाला दोनों आमने-सामने होते है अर्थात् इसमे समाचारों का आदान-प्रदान मौखिक रूप से किया जाता है अर्थात् शब्दों व वाक्यों के सहारे जब संप्रेषण किया जाता है तो उसे मौखिक संप्रेषण या मौखिक संचार कहते है।

जब कोई संवाद या सूचना मुख से उच्चारण कर प्रेषित की जाए तो इसे मौखिक संप्रेषण कहेगें। मौखिक संदेशवाहन दोनों पक्षों के मध्य प्रत्यक्षरूप मे वार्तालाप द्वारा, टेलीफोन पर बात करके, विचारगोष्ठियों मे भाग लेकर, सम्मेलनों मे उपस्थित होकर, सूचना प्रसारण यंत्रो के माध्यम से, घंटी या सीटी बजाकर या अन्य कोई संकेत द्वारा भी किया जाता है। कभी-कभी तो मुख मुद्रा या शारीरिक अंगों के विशेष संचालन द्वारा भी भावाभिव्यक्ति की जाती है। इसे भी हम मौखिक संदेशवाहन की कोटि मे शामिल कर सकते है। 

मौखिक संप्रेषण/संचार के माध्यम 

मौखिक संप्रेषण या संचार के निम्न माध्यम है-- 

1. आमने-सामने वार्तालाप 

2. संवाद

3. बैठकें

4. सम्मेलन

5. सभायें 

6. साक्षात्कार 

7. व्याख्यान 

8. उद् घोषणायें 

9. रेडियो वार्तायें 

10. टेलीफोन या मोबाइल पर बातचीत 

11. कहानी कथन 

12. पौराणिक आख्यानों का प्रस्तुतीकरण 

13. वाद-विवाद तथा वक्तव्य प्रतियोगितायें 

14. संसदीय बहसें आदि।

मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपने मुखावयवों से विभिन्न ध्वनियों, ध्वनि प्रतीकों का निर्माण अथवा सृजन कर विभिन्न रूपों मे मौखिक संप्रेषण कर सकता है। मनुष्य के अलावा अन्य प्राणी सीमित ध्वनियों का निर्माण अथवा सृजन कर सकते है। मौखिक संप्रेषण को सफल एवं प्रभावी बनाने के लिये वक्ता मे कथ्य, विचारों की स्पष्टता, वक्ता के अनुरूप शब्द, आंगिक चेष्टायें, उच्चारण शैली, श्रोता मे दोष रहित सुनने की क्षमता और अशाब्दिक प्रतीकों की अवलोकन शक्ति एवं प्राप्त प्रतीकों को संघटित कर विचारों मे रूपान्तरण की क्षमता होना अत्यंत आवश्यक है।

मौखिक संचार/संप्रेषण के लाभ या गु (mokhik sampresad labha)

मौखिक संप्रेषण मे वे सभी गुण होते है, जो लिखित संप्रेषण के दोष होते है। इसमे मुख्य रूप से निम्म लाभों या गुणों का समावेश होता है--

1. मौखिक संप्रेषण सूचनाओं व संवादों के पारस्परिक विनिमय का एक महत्वपूर्ण व प्रभावशाली साधन है जिसमे व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से विचारों का आदान-प्रदान करता है, जिसका प्रभाव अधिक पड़ता है। 

2. इस संप्रेषण मे धन, समय और श्रम तीनों की ही बचत होती है। केवल शब्दों के उच्चारण मात्र से ही कार्य संपन्न हो जाता है।

3. यह संप्रेषण जल्दी प्रेषित करता है, क्योंकि सूचना प्रत्यक्ष रूप से भेजी जाती है और प्राप्तकर्ता भी सूचना जल्दी प्राप्त करके उसकी प्रतिपुष्टि भी तुरन्त दे देता है।

4. मौखिक संप्रेषण द्वारा प्रबन्धकों व अधिकारों के लिए अधीनस्थों व कर्मचारियों पर नियंत्रण करना आसान हो जाता है।

5. इस संप्रेषण मे प्रबन्धकों व अधीनस्थ कर्मचारी के बीच मधुर सम्बन्धों का निर्माण होता है।

6. मौखिक संप्रेषण द्वारा प्रेषक अपनी कही बात या संदेश को हाव-भाव, ध्वनि, संकेत, इशारे की सहायता से भी समझ सकता है। लिखित संप्रेषण मे वह कार्य नही कर सकता। 

7. यह संप्रेषण लोचतापूर्ण होता है। प्रेषक संवाद करते समय वातावरण को देखते हुए प्रेषण के तरीके मे परिवर्तन या संशोधन कर सकता है।

मौखिक संप्रेषण/संचार के दोष 

मौखिक संप्रेषण/संचार के दोष इस प्रकार है--

1. प्रत्यक्ष संपर्क के अभाव मे अनुपयुक्त 

मौखिक संप्रेषण के लिए यह आवश्यक है जिस समय संदेश देने वाला व्यक्ति संदेश प्रेषित करना चाहता है, उस समय संदेश प्राप्त करने वाला व्यक्ति उपलब्ध होना चाहिए अन्यथा संदेश विफल सो जाएगा।

2. अस्पष्टता 

मौखिक संप्रेषण यदि काफी बड़ा हो तो संदेश प्राप्त करने वाले के लिए इस कथन को साथ-साथ समझने मे दिक्कत होगी। कभी-कभी संदेश-प्रेषक तथा संदेश प्रापक के बौद्धिक स्तर मे अंतर होने से संदेश तुरन्त समझ मे नही आता तथा बार-बार इसका स्पष्टीकरण कराया जाता है।

3. लिखित साक्ष्य का अभाव 

मौखिक संप्रेषण की का सबसे बड़ा दोष यह है कि इस संप्रेषण का कोई लिखित प्रमाण नही रहता। सूचना प्राप्तकर्ता यदि बाद मे अपनी स्थिति से विमुख हो जाए तो उसके विरुद्ध कोई लिखित प्रमाण न होने से वैधानिक या अन्य किसी प्रकार की कार्यवाही करने मे कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।

शायद यह आपके लिए काफी उपयोगी जानकारी सिद्ध होगी

कोई टिप्पणी नहीं:
Write comment

अपने विचार comment कर बताएं हम आपके comment का इंतजार कर रहें हैं।