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1/14/2021

आंतरिक अंकेक्षण क्या है, परिभाषा, उद्देश्य, लाभ

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आंतरिक अंकेक्षण क्या है? (aantrik ankekshan ka arth)

aantrik ankekshan arth paribhasha uddeshya labha gun;आन्‍तरिक अंकेक्षण व्‍यावसायिक संस्‍था के लेखे और क्र‍ियाओं का पुनर्निरीक्षण है। आंतरिक अंकेक्षण से तात्पर्य ऐसे अंकेक्षण से है जिसमें व्यवसाय के लेखों की जाँच एक ऐसे व्यक्ति व उसके स्टाफ द्वारा की जाती है जो स्वंय उस व्यवसाय की सेवा में नियुक्त है। इस प्रकार के अंकेक्षण उस संस्था में अंकेक्षक के रूप में कार्य न करके एक लेखापन (Accountant) के रूप में कार्य करते हैं। इस लेखों की जांचकर उनमें पाई जाने वाली असत्यता को दूर करना तथा आन्तरिक निरीक्षण की प्रथा को प्रभावशाली बनाना है।

आन्‍तरिक अंकेक्षण के लिए यह आवश्‍यक नही है कि उनमें आन्‍तरिक अंकेक्षण का संबन्‍ध प्रमुख रूप से लेखा तथा आर्थिक मामलों में से होता है। 

आन्‍तरिक अंकेक्षण का उत्‍तरदायित्‍व रक्षात्‍मक है  वो देखता है  कि व्‍यापार  को सम्‍पत्तियों लेखे व सुरक्षा का उचित प्रबन्‍ध है। व्‍यापार में होने वाले खर्च उत्‍तरदायी अधिकारी द्वारा अधिकृत किया जाता है  प्रत्‍येक व्‍यवहार के लिए निर्धारित कि हुई  प्रक्र‍ियाओं  का पालन किया जाता है। हिसाब-किताब व्‍यवहारों का एक ही सही चित्र प्रस्‍तुत करता है। 

आन्‍तरिक अंकेक्षण की  परिभाषा (aantrik ankekshan ki paribhasha)

डिक्‍सी के शब्‍दों में,'' आन्‍तरिक अंकेक्षण नेत्‍यक हिसाब-किताब की ऐसी व्‍यवस्‍था है। जिसमें त्रुटियां एवं कपट अपने आप रूक जाते है। अथवा बुक कीपिंग के संचालन से अपने आप पकड़े जाते है।''

डी पौला के शब्‍दों में,'' आन्‍तरिक अंकेक्षण का अर्थ कर्मचारियों द्वारा किये जाने वाले लगातार आन्‍तरिक अंकेक्षण से है जिसमें एक व्‍यक्ति का काम  स्‍वतंत्रतापूर्वक स्‍टाफ अन्‍य सदस्‍यों द्वारा जांचा जाता है।''

आंतरिक अंकेक्षण के उद्देश्य (aantrik ankekshan ke uddeshya)

आन्‍तरिक अंकेक्षण के उद्धेश्‍य इस प्रकार है--

1. प्रक्रियाओं में सुधार करना 

व्‍यवहारों के लेखे के संबन्‍ध में  जो क्रियाएं है उनमें आवश्‍यक सुधार करना तथा कमजोरियों को निकालना भी इसका उद्धेश्‍य है।

2. पुनर्निरीक्षण करना 

किए गए कार्यो का कर्मचारियों के द्वारा पुनर्निरीक्षण करना भी इसका उद्धेश्‍य है।

3. योजनाबद्धता की जांच करना 

आन्‍तरिक अंकेक्षण के द्वारा यह भी देखा जाता है कि व्‍यवसाय में जो योजना बनाई गई थी तथा जो प्रक्रिया  नियत कि गई थी उन्‍ही के अनुसार कार्य किया है।

4. यह देखना व्‍यवहार आधिकृत है

यह निधारित करना व्‍यवसाय में जितने भी व्‍यवहर हुए हैं वे सब आधिकृत है।

5. छल-कपट को ढुंढना 

आन्‍तरिक अंकेक्षण का एक उद्धेश्‍य यह भी है यदि गुटबन्‍दी के द्वारा छलकपट हुए है तो वे जल्‍दी पकड़ में आ जाएं।

6. छल-कपअ को रोकना 

व्‍यवसाय के कर्मचारियों पर नैतिक प्रभाव डालकर छलकपट को रोकना भी इसका ही उद्धेश्‍य है।

7. सम्‍पत्तियों के लेखे व सुरक्षा की व्‍यवस्‍था को देखना 

अंकेक्षण के द्वारा यह भी देखा जाता है कि सम्‍पत्तियों का लेखा ठीक किया गया है। और इसका सब प्रकार की क्षतियों से रक्षा के लिए उचित प्रबन्‍ध कर लिये गये है।

आंतरिक अंकेक्षण के लाभ (aantrik ankekshan ke labha)

आन्‍तरिक अंकेक्षण के लाभ  इस प्रकार है--

1. कार्यक्षमता में वृद्धि

आन्‍तरिक अंकेक्षण प्रणाली में कार्यों का बंटवारा वैज्ञानिक ढंग से होता है इस प्रकार हर कर्मचारी अपने कार्य के प्रति सजग रहता है तथा इससें कर्मचारियों की कार्य क्षमता भी बढ़ती है।

2. कर्मचारियों की ईमानदारी में वृद्धि

इस प्रणाली के कारण कर्मचारियों के नैतिक स्‍तर में वृद्धि होती है।

3. अंकेक्षण के काम मे आसानी 

इस प्रणाली के अन्‍तर्गत सभी लेन-देन का लेखा जोखा कर्मचारियों के द्वारा सम्‍पन्‍न होता है साथ ही गलतियों की सम्‍भावना बहुत कम हो जाती है। इसी वजह से अंकेक्षण परीक्षण अपनी जांच से अपना कार्य पुरा  करता है।

4. कार्य शीघ्रता से होना 

इस प्रणाली के अन्‍तर्गत कार्य तुरन्‍त होता है क्‍योंकि हर कर्मचारी पर अपने-अपने कार्य को पुरा का उत्‍तरदायित्‍व होता है।

5. सभी पक्षों को लाभ 

इस प्रणाली के अन्‍तर्गत किये गए आन्‍तरिक अंकेक्षण व्‍यापार के स्‍वामी व कर्मचारियों को लाभ प्राप्‍त होता है।

6. अंतिम खातें सरलता से तैयार करना   

इस प्रणाली को अपनाने से अंतिम खाते शीघ्रता तथा सरलता से तैयार किए जा सकते है।

7. व्‍यापार का स्‍वामी अनेक चिन्‍ताओं से मुक्‍त 

व्‍यापार के मालिक को इस बात का पूरा विश्‍वास हो जाता है कि दैनिक खातों का काम सुचारू रूप से हो रहा है। इस तरह वह विभिन्‍न चिन्‍ताओं से मुक्‍त हो जाता है।

8. कपट की सम्‍भावना कम होना 

यदि आन्‍तरिक अंकेक्षण व्‍यवस्‍था में संतोषजनक है तो कपट होने  की सम्‍भावना बहुत कम रह जाती है। यदि कोई कपट या त्रुटि हो जाएं तो इसका का पता तुरन्‍त चल जाता है।

आन्‍त‍‍रिक अंकेक्षण के दोष 

आन्‍तरिक अंकेक्षण के दोष इस प्रकार है--

1. कर्मचारियों की गुटबंधी से नुकसान

जिस व्‍यापार के अन्‍दर इस प्रणाली को अपनाया जाता है। वहा कर्मचारी आपस में मिलकर छल-कपट करते है और व्‍यापार की साख को गिराते है।

2. व्‍यापार के स्‍वामी द्वारा लापरवाही 

इस प्रणाली के कारण व्‍यापार का मालिक यह समझता है कि उसके व्‍यापार के खाते ठीक है इस के लिए वह इस और से चिन्‍तामुक्‍त होकर कभी-कभी लापरवाही भी करता है जिससे अनेक बार व्‍यापार को नुकसान होता है।

3. कर्मचारी व्‍यय बढ़ जाना 

इस प्रणाली के भीतर एक कार्य को अनेक कर्मचारी मिलकर करते है इससें अधिक कर्मचारियों की आवश्‍यकता होती है। फलस्‍वरूप कर्मचारियों पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है।

4. कर्मचारियों के जल्‍दी के कारण गलतियों की सम्‍भावना 

इस प्रणाली के भीतर सभी कर्मचारी अपने कार्य को जल्‍द से जल्‍द समाप्‍त करने का प्रयास करते है और इस वजह से लेखा पुस्‍तकों में गलतियां होने की सम्‍भावना बढ़ जाती है।

5. गलत कार्य विभाजन से कर्मचारियों में संघर्ष

यदि व्‍यापार में कार्य का विभाजन सही ढ़ंग से नही होता है तो कर्मचारी आपस में लड़ने-झगड़ने लगते है कर्मचारियों में आपसी संघर्ष के कारण व्‍यापारिक कार्यों में रूकावट आती है।

6. अंकेक्षक के द्वारा कार्य में ढ़िलाई

जिस व्‍यापार के भीतर आन्‍तरिक अंकेक्षक की प्रणाली अपनाई जाती है, वहा के संबंध में अंकेक्षक को इस बात का विश्‍वास हो जाता है कि लेखों का कार्य ठीक होगा। इसी वजह से वह अंकेक्षण में ढ़िलाई दे देता है और जांच सही नही कर पता है।

शायद यह जानकारी आपके लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी

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