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12/26/2020

अपूर्ण प्रतियोगिता क्या है? अर्थ, परिभाषा

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अपूर्ण प्रतियोगिता क्या है? अपूर्ण प्रतियोगिता का अर्थ 

apurn pratiyogita kise kahate hain;पूर्ण प्रतियोगिता एवं पूर्ण एकाधिकार दो परस्पर भिन्न काल्पनिक बाजार दशाएं है। वास्तविक जीवन मे दोनो का मिलना जटिल है। क्योंकि प्रतियोगिता न तो पूर्ण होती है और न ही पूर्णतः लुप्त होती है। व्यावहारिक रूप मे इन दोनों के मध्य की अवस्था पायी जाती है। मध्य की इस अवस्था को ही अपूर्ण प्रतियोगिता कहते है। 

अपूर्ण प्रतियोगिता को श्रीमति जाॅन राबिन्स ने " अपूर्ण प्रतियोगिता " एवं प्रो. एडवर्ड चेम्बरलिन "एकाधिकारी प्रतियोगिता " के नाम से पुकारते है। इस प्रकार " अपूर्ण प्रतियोगिता तब होती है जब विक्रेता का वस्तु मांग-वक्र गिरती हुई स्थिति मे होता है।" अर्थात् जब पूर्ण प्रतियोगिता की विभिन्न दशाओं मे से किसी एक दशा का अभाव होता है तब अपूर्ण प्रतियोगिता जन्म लेती है।

अपूर्ण प्रतियोगिता की परिभाषा (apurn pratiyogita ki paribhasha)

प्रो. लर्नर के अनुसार, " अपूर्ण प्रतियोगिता तब पायी जाती है, जबकि एक विक्रेता अपनी वस्तु के लिये एक गिरती हुई मांग-रेखा का सामना करता है।" 

प्रो. जे. के. मेहता के अनुसार," विनिमय की प्रत्येक दशा अपूर्ण एकाधिकार की दशा है और अपूर्ण एकाधिकार दूसरे दृष्टिकोण से अपूर्ण प्रतियोगिता ही है। ऐसी प्रत्येक दशा एकाधिकारी प्रतियोगिता के तत्वों का मिश्रण होती है।

प्रो. फेयर चाइल्ड के शब्दों मे," इस प्रकार यदि बाजार अच्छे ढंग से आयोजित नही है, यदि क्रेताओं और विक्रेताओं को एक-दूसरे के संपर्क मे आने मे कठिनाई है और वे दूसरों के द्वारा खरीदी गई वस्तुओं या प्रदत्त कीमतों की तुलना करने मे असमर्थ है तो हम इसे अपूर्ण प्रतियोगिता की संज्ञा देते है।" 

निष्कर्ष रूप मे कहा जा सकता है कि अपूर्ण प्रतियोगिता वह दशा है जिसमे क्रेता और विक्रेता थोड़ी संख्या मे होते है तथा उनके बीच प्रतियोगिता नही होती जिसके फलस्वरूप प्रत्येक व्यक्तिगत क्रेता या विक्रेता वस्तु के मूल्य को प्रभावित कर पाता है। अपूर्ण प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषताएं निम्नोक्त होती है-- 

1. क्रेताओं और विक्रेताओं की कम संख्या।

2. प्रत्येक व्यक्ति (क्रेता या विक्रेता) मे वस्तु की बड़ी मात्रा मे मांग या पूर्ति द्वारा मूल्य को प्रभावित कर सकने की क्षमता का होना।

3. उत्पादक या विक्रेता द्वारा वस्तु के प्रकार या गुण मे वास्तविक या काल्पनिक भेद करना।

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