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7/02/2021

भिक्षावृत्ति के कारण, रोकने के उपाय/सुझाव

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भिक्षावृत्ति के कारण 

भिक्षावृत्ति कोई ऐसी चीज नही नही जिसे करके व्यक्ति को खुशी मिलती हो। व्यक्ति अनेक कारणों से जब परेशान व दुखी हो जाता है और उसके जीवन मे आशा की कोई किरण नही दिखती तो वह भिक्षुक बन अपना और अपने परिवार का पेट भरता है। भिक्षावृत्ति की पृष्ठभूमि में जहाँ एक तरफ वैयक्तिक कारण है जैसे शारीरिक और मानसिक दोष अथवा बीमारियाँ जैसे लूला, लंगड़ा, अपाहिज, पागल, विक्षिप्त वहीं दूसरी और आर्थिक सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कारण है। प्रथम कारण इस तथ्य का घोतक है कि व्यक्ति अपने शरीर से लाचार है कि वह किसी भी प्रकार का कठिन परिश्रम नही कर सकता है। इसलिए वह भीख मांगता है और दूसरा कारण इस बात का प्रमाण है कि यह समाज व्यक्ति को नौकरी तथा जीने की सामान्य सुविधाएं नही देता और जब व्यक्ति भूखों मरने लगता है तब भीख मांगने के सिवा उसके पास कोई दूसरा विकल्प नही होता। भिक्षावृत्ति के निम्न कारण है--

1. शरीरिक कारण 

वे व्यक्ति जो शरीर से अपाहिज, लूले, लंगड़े है, वह किसी प्रकार का कठिन परिश्रम नही कर सकते। अस्तु इन्हें भिक्षुक बनकर ही जीना पड़ता है। 

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2. मानसिक कारण 

ये वे व्यक्ति है जो शरीर से स्वस्थ है पर मानसिक रूप से पूर्णतया विक्षिप्त होते है। क्या उचित? क्या अनुचित है? क्या करना चाहिए और क्या नही? इन्हें कुछ नही पता होता। जिसने जो दे दिया वह रख लिया। ये जमीन पर पड़ा फेंका हुआ समान, या जूठा भी उठाकर खा लेते है। इन्हें न खाने का होश होता है और न पहनने का। नंगे है तो ठीक और कपड़े फटे है तो भी ठीक है। 

3. धार्मिक कारण 

भारत मे भिक्षावृत्ति की पृष्ठभूमि मे धार्मिक कारणों का अपना महत्व है। धार्मिक अन्धविश्वासों पर आधारित यह समाज पाप, पुण्य, स्वर्ग, नर्क, दान आदि मे आस्था रखता है। 

4. पूंजीवादी आर्थिक ढांचा 

भारत देश यह राजाओं, महाराजाओं, जमींदारों, तालुकेदारों और साम्राज्यवादियों का देश रहा है। करोड़ों भूमिहीन, करोड़ो बेकार कुंठित व्यक्ति जिन्हें इस समाज मे किसी प्रकार का कार्य नही मिलता। ये इस पूंजीवादी व्यवस्था के दीन, दुखी, बेकार व्यक्ति है जो आंतरिक जरूरतों की पूर्ति के लिये भिक्षुक बनते है और शिक्षा पर पूर्णतया निर्भर रहते है।

5. बेकारी और दरिद्रता

इस देश मे दरिद्रता मे निरन्तर वृद्धि इसलिए हुई है क्योंकि यहां बेकारी की समस्या अत्यधिक है। व्यक्ति के पास जीविकोपार्जन के साधनों का पूर्णतया अभाव है। इसलिए बेकार और दरिद्र व्यक्ति भिक्षावृत्ति पर पूर्णतया निर्भर हो जाता है।

6. संगठित व्यवसाय 

भिक्षावृत्ति अत्यधिक सरल और लाभप्रद व्यवसाय बन गया है। भिक्षुकों को नियोजित रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है कि किन स्थानों पर किस प्रकार से व्यक्तियों को प्रभावित करके भिक्षा माँगे।

7. प्राकृतिक संकट 

भारत वह विचित्र देश है। जहाँ हर साल बाढ़, सूखा और पाले से कृषि व्यवसाय भी नष्ट होता है और लाखों व्यक्ति बेघर भी होते है। इस संकट ग्रस्त व्यक्ति छोटे-बड़े नगरों मे भीख माँगकर अपना जीवन यापन करते है।

8. संगठित व्यवसाय 

भिक्षावृत्ति अत्यधिक सरल और लाभप्रद व्यवसाय बन गया है। भिक्षु को को नियोजित ढंग से प्रशिक्षण दिया जाता है कि किन स्थानों पर किस प्रकार से व्यक्तियों को प्रभावित करके भिक्षा माँगे। नगर और महानगरों में एक-एक भिक्षुक 300 रूपये से लेकर 1000 रूपये तक प्रतिदिन भिक्षा माँग लेता है। इस तरह यह संगठन भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहित कर रहे है।

9. परम्परात्मक व्यवसाय

भिक्षुकों की भी जातियाँ है जो पूर्णतया भिक्षा पर ही निर्भर करती है। ये दूसरा कार्य नही करते। इनका कहना है कि यह हमारा पारम्परिक पेशा है और पुरखों से होता आया है। इनके परिवार के बच्चे, युवक, स्त्रियां सभी भिक्षुक होते है। इस तरह की परम्पराएँ भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहित करती है।

10. विघटित परिवार 

ऐसे परिवार जिसके कर्ता का देहान्त हो गया है अथवा किसी अपराध से सजा हो गई हो अथवा जुआरी, शराबी परिवार हो अथवा रोग ग्रस्त परिवार हो जिसमें आय कमाने का कोई निश्चित साधन न हो। इस प्रकार के परिवार के बच्चे, विधवा स्त्रियां या विवाहित स्त्री भिक्षुक बनने के लिये आकर्षित होते है।

भिक्षावृत्ति रोकने/उन्मूलन के उपाय/सुझाव 

कहा जाता है कि कारण मे ही निवारण होता है। सामान्यतः जिन कारणों से भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहन प्राप्त होता है यदि उन कारणों का समाधान कर दिया जाए तो भिक्षावृत्ति की समस्या का उन्मूलन सदैव के लिए हो सकता है। भिक्षावृत्ति की समस्या को दूर करने के लिए निम्न सुझाव/उपाय प्रस्तुत किए जा सकते है--

1. भिक्षावृत्ति की पृष्ठभूमि मे बेकारी और दरिद्रता की अहम भूमिका है देश मे उत्पादन के साधनों मे वृद्धि करनी होगी। योजनाओं के माध्यम से ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे प्रत्येक कुशल और अकुशल श्रमिक को नौकरी मिल सके।

2. नगरों और महानगरों में छिपे तौर पर अनेक ऐसे संगठन कार्यरत है जो नासमझ बच्चों को पकड़कर, मार पीटकर, धमकाकर अथवा उन्हें अपंग बनाकर उनसे भीख मंगवाते है। ऐसे संगठनों का पता लगाया जाए और जो ऐसे संगठन चलाते है उन्हें कड़ी सजा दी जाए।

3. बाढ़, सूखा, पाला से अथवा किसी और कारण से जो व्यक्ति अथवा परिवार आर्थिक रूप से पतन के कगार पद पर पहुंच गए है उन्हें पुनर्स्थापित करने के लिये आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

4. हमें ऐसी व्यवस्था भी करनी होगी कि भिक्षुकों की सन्तानें भीख न माँगे। इसके लिये उनकी सन्तानों को उनसे लेकर उन्हें शिक्षित करना होगा।

5. समाज में अधिक से अधिक अनाथालयों और अपाहिजों के रहने योग्य आश्रमों की स्थापना की जाए जहाँ अपाहिज व्यक्तियों का उपचार किया जाए और अनाथ बच्चों को सार्थक एवं कुशल नागरिक बनाया जाए।

6. इस तरह का जनमत तैयार करना होगा कि अन्धविश्वासों के कारण और दान की भावना से वशीभूत होकर व्यक्ति को दान रूपी भिक्षा नही देनी चाहिए। इससे समाज में भिक्षुकों की संख्या मे निरन्तर वृद्धि होती जाती है।

7. शारीरिक और मानसिक रोग से ग्रस्त होकर जो व्यक्ति विवशता मे भिक्षुक बनते है उनका उचित रूप से उपचार किया जाए। उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिये विभिन्न कार्यों को करने का प्रशिक्षण दिया जाए जिससे उनमें आत्मविश्वास उत्पन्न हो सके और वे भिक्षावृत्ति के घिनौने कार्य में लिप्त न हो सकें।

8. अनाथ बच्चों, विधवा स्त्रियों और निर्धन परिवारों पर विशेष ध्यान देना होगा। इन्हें उनकी आयु के अनुसार विभिन्न कुटीर- उद्योगों का प्रशिक्षण देना होगा जिससे कि ये अपनी जीविका स्वयं अर्जिय कर सकें।

9. भिक्षावृत्ति को समाप्त करने के लिये सर्वप्रथम हमें पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था को समाप्त करना होगा। ऐसी व्यवस्था की स्थापना करनी होगी जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को नौकरी मिल सके अथवा जीविकोपार्जन के ऐसे साधन सुलभ कराने होंगे जिससे सरलता से व्यक्ति जीविका अर्जित कर सकें।

भिक्षावृत्ति के उन्मूलन के लिये सरकारी प्रयास

भारत के अधिकांश राज्यों में भिक्षावृत्ति को अपराध घोषित किया गया है। सन् 1959 मे भारत सरकार ने इंडियन पैनल कोड (संशोधित अधिनियम) पारित किया जिसमें भीख माँगने के लिये बालकों को विवश करना अपराध घोषित किया गया। इस अधिनियम से पहले भी भिक्षावृत्ति को रोकने के लिये अनेक अधिनियम बनाए गए जिनमें से कुछ निम्न प्रकार है--

1. The Hyderabad Prevention of Beggary Act, 1941

2. The Mysore Prevention of Beggary Act, 1945, 1954 

3. The Bombay Prevention of Beggary Act, 1945, 1962 

4. The Madras Prevention of Beggary Act, 1945

5. The Travancore Prevention of Begging Act, 1945, 1954

6. The Bhopal Prevention of Beggary Act, 1947 

7. The Bihar Prevention of Beggary Act, 1952 

8. The Maharashtra Prevention of Begging Act, 1959 

9. The Gujrat Prevention of Begging Act, 1959 

10. The Assam Prevention of Begging Act, 1964

11. The U.P. Prohibition of Begging Act, 1975 

12 The Haryana Prevention of Begging Act, 1971

उपरोक्त सभी अधिनियमों मे भिक्षावृत्ति को अपराध घोषित किया गया है। जेल तथा जुर्माने को भी निधार्रित किया गया है। महानगरों जैसे दिल्ली, कलकत्ता, मुम्बई, चेन्नई पुलिस अधिनियम मे भिक्षावृत्ति को दण्डनीय अपराध माना गया है किन्तु आश्चर्य है इन्ही स्थानों पर हजारों की संख्या मे भिखारी, सड़कों, स्टेशनों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों, कालोनी आदि मे सरलता से भीख मांगते हुए देखे जा सकते है।

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