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6/30/2021

भिक्षावृत्ति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं

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भिक्षावृत्ति का अर्थ (bhikshavriti kya hai)

bhikshavriti arth paribhasha visheshta;भिक्षावृत्ति जीवन यापन का एक ऐसा ढंग और व्यवसाय है जिसमे व्यक्ति काम करने योग्य होते हुए भी किसी प्रकार का कार्य नही करता बल्कि बिना किसी परिश्रम के भीख माँगकर अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करता है।

भिक्षावृत्ति किसी भी देश के लिये कैंसर और कोढ़ की बीमारी के समान है। सम्पूर्ण आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था को जर्जर और कलंकित करने का बहुत कुछ श्रेय इसे ही जाता है। भारत देश में लाखों लोग इसके शिकार है। अपनी जीविका पार्जन करने योग्य होते हुए भी यह लोग समाज पर बोझ बनकर भीख माँगते नजर आते है। ये बिना परिश्रम के हजारों रूपये प्रतिमाह कमा लेते है। इनका एक विशेष समूह होता है जो इन्हें भीख मांगने के प्रशिक्षण देता है। इन्हें नयी-नयी तरह की शब्दावली सिखायी जाती है जिससे कि मनोवैज्ञानिक दबाव और प्रभाव व्यक्ति और समाज पर पड़ सके और इन्हें सरलता से अधिक भीख मिल सके।  

भिक्षावृत्ति की परिभाषा (bhikshavriti ki paribhasha)

बाम्बे भिक्षावृत्ति कानून-1945 के अनुसार," एक व्यक्ति जिसके जीवन-यापन का कोई साधन नही है और इधर-उधर घूमता रहता है या सार्वजनिक स्थानों पर पाया जाता है अथवा भीख मांगने के लिए अपना प्रदर्शन स्वीकार करता है।" 

मैसूर भिक्षावृत्ति अधिनियम-1944 के अनुसार," भिक्षावृत्ति अर्थात् भीख मांगने के लिए दर-दर घूमना, घावों, शारीरिक पीड़ाओं अथवा दोषों का प्रदर्शन करना, अथवा भिक्षा प्राप्ति के लिए दया उत्पादन करने के लिये उनके झूठे बहाने बनाना सम्मिलित है।" 

भिक्षावृत्ति की विशेषताएं (bhikshavriti ki visheshta)

भिक्षावृत्ति की विशेषताएं इस प्रकार है--

1. भिक्षावृत्ति मे जो व्यक्ति सम्मिलित है वह सामान्यतया शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है।

2. भिखारी इस प्रकार के ढ़ोंग और रूपक करते है कि जिससे व्यक्ति दया करके उन्हें भीख देते है।

3. भिक्षुक स्वावलम्बन न बनकर परावलम्बी होता है। वह सदैव समाज पर निर्भर रहता है।

4. भिक्षावृत्ति मे मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने की कला विद्यमान होती है। भिक्षुक इस प्रकार के नाटक करता है अथवा ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है जिसके प्रभाव से व्यक्ति दया करके इन्हें भिक्षा देता है।

5. भिक्षावृत्ति मे स्वास्थ्य-प्रयोजन का पूर्णतया अभाव होता है। अच्छे काम के लिए जब भिक्षा माँगी जाती है तो उसे हम भिक्षावृत्ति की श्रेणी मे नही रखते है।

6. स्वास्थ्य व्यक्ति भी किसी प्रकार का बहाना, या छल-कपट करके अपने दुखों का प्रदर्शन करके भीख माँगता है।

भीख मांगने के तरीके 

भीख मांगना आज कला है। सरलता से कोई व्यक्ति किसी को भीख नही देता। इसलिए भीख मांगने के लिए नयी-नयी प्रकार की पद्धतियों को अपनाया जाता है। भीख कैसे और किस प्रकार माँगी जाय इसे आज सुनियोजित ढंग से अनेक संगठन चला रहे है। निम्न तरीके से भीख माँगते हुए अनेक भिक्षुकों को सरलता से देखा जा सकता है--

1. अपाहिज भिखारी जिन्हें अत्यधिक दयनीय रूप मे प्रस्तुत कर भीख मांगी जाती। 

2. साधु के वेश मे भीख माँगना।

3. यज्ञ और हवन कराने का ढोंग करके समूह में भीख मांगना।

4. किसी देवी अथवा पवित्र स्थान पर भन्डारा करने के लिए भीख मांगना।

5. बाढ़, सूखा, पाला आदि का बहाना बनाकर भीख मांगना।

6. परिवार मे किसी की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए भीख माँगना।

7. कुछ स्त्रियाँ गूँगी बनकर अपनी सहायता के लिए प्रमाण-पत्र लेकर भीख मांगती है। 

8. रेल गाड़ी पर किसी युवती को साथ लेकर उसके विवाह के लिए भीख माँगना।

9. रेलगाड़ी पर भजन, गीत गाकर, अथवा किसी देवी-देवता की मूर्ति रखकर भीख माँगना।

10. किसी बच्चे अथवा नवयुवक को अन्धा, अपंग अथवा अपाहिज बनाकर भीख मांगना।

11. टोलियों मे भजन, कीर्तन अथवा किसी और बहाने से भीख माँगना।

12. धार्मिक तीज-त्यौहार, स्नान अथवा धार्मिक स्थानों पर भिक्षा माँगने वालों की एक बड़ी पंक्ति है जिसमें अपाहिज, रोग ग्रस्त, साधु-संन्यासी विधवा, बेकार, आश्रयहीन अनाथ जैसे अनेक व्यक्ति होते है जो जीवन-पर्यन्त उसी स्थान पर रहकर भिक्षा मांगते है। ये वे स्थान है जहाँ दान की भावना के वशीभूत होकर व्यक्ति भिक्षा देते है।

इस तरह स्थान-स्थान पर भीख माँगने के तरीकों मे अंतर देखने को मिलता है। ये भिखारी इस तथ्य से परिचित है कि किस स्थान पर किस प्रकार से भीख अधिक प्राप्त हो सकती है और ये उसी के अनुरूप अपने को ढाल कर भीख माँगते है।

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