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4/04/2021

कृषक समाज की विशेषताएं

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krishak samaj ki visheshtayen;राबर्ट रेडफील्ड के अनुसार," वे ग्रामीण लोग जो जीवन निर्वाह के लिए अपनी भूमि पर नियंत्रण बनाये रखते है और उसे जोतते है तथा कृषि जिनके जीवन के परम्परागत तरीके का एक भाग है और जो कुलीन वर्ग या नगरीय लोगों की ओर देखते है और उनसे प्रभावित होते है, जिनके जीवन का ढंग उनसे कुछ सभ्य होता है, कृषक समाज कहलाता है। 

राॅबर्ड रेडफील्ड द्वारा दी गई गई उक्त परिभाषा से स्पष्ट होता है कि कृषक समाज की आवधारणा मे दो महत्वपूर्ण तत्व होते है--

1. ग्रामीणों के जीवन निर्वाह का ढंग,

2. अन्य स्तर के लोगो के साथ उनके संबंधो की प्रकृति।

रेडफील्ड के विचारो से स्पष्ट होता है कि कृषक समाज (Peasant society) के अंतर्गत केवल उन्ही छोटे उत्पादनकर्ताओं को सम्मिलित किया जा सकता है जो अपनी आजीविका के लिए उत्पादन करते है। रेडफील्ड ने उन व्यक्तियों को किसान कहा है जो बाजार के लिए उत्पादन करते है।

कृषक समाज की विशेषताएं (krishak samaj ki visheshta)

रेडफील्ड ने कृषक समाज की निन्म विशेषताएं बताइए है--

1. कृषक समाज तुलनात्मक रूप से एक समरूप समाज है।

2. कृषक समाज के सदस्यों की आजीविका का मुख्य साधन भूमि पर नियंत्रण रखना तथा भूमि को जोतना है।

3. कृषक समाज एक अविभेदीकत और अस्तरीकृत समुदाय है।

4. कृषक समाज नगरों अथवा कस्बों के कुलीन वर्ग से भिन्न होता है। यद्यपि यह उसने अनेक क्षेत्रों मे प्रभावित होता है।

5. कृषक समाज को आर्थिक आधार पर अन्य समाजों से स्पष्ट रूप से पृथक किया जा सकता है।

थियोडोर शनीन के द्वारा कृषक समाज की निम्न विशेषताएं बताइए गई है--

1. कृषक परिवार का खेत बहुआयामी संगठन की मौलिक इकाई है अर्थात एक कृषक परिवार उपभोग एवं उत्पादन की इकाई के रूप मे कार्य करता है और इसी आधार पर कृषक के जीवन का ढंग औद्योगिक जीवन ढंग से अलग हो जाता है। एक कृषक का खेत ही उसकी सम्पत्ति, समाजीकरण, मित्रता तथा कल्याणकारी कार्यों की मौलिक इकाई होता है।

2. भूमि की आजीविका का प्रमुख साधन है, जो एक कृषक की उपभोग की आवश्यकताओं की अधिकतम भाग की पूर्ति करती है।

3. कृषक समाज की अपनी एक परम्परागत विशिष्ट संस्कृति होती है, यह संस्कृति लघु समुदाय के जीवन के ढंग से विशेष संबंधित होती है। (यहां पर यह उल्लेखनीय है कि "लघुसमुदाय" की अवधारणा राॅबर्ड रेडफील्ड ने अपनी पुस्तक "लिटिल कम्युनिटी" मे प्रस्तुत की है। जिसमे लघु समुदाय की चार मौलिक विशेषताओं, विशिष्टता, लघुता, समरूपता, आत्मनिर्भरता का उल्लेख किया है) 

4. कृषक समाज की आर्थिक स्थिति निम्न होती है तथा इन पर बाहरी समूहों का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है।

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