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2/14/2021

अनुपात विश्लेषण क्या है, उद्देश्य/महत्व, सीमाएं

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अनुपात विश्लेषण का अर्थ (anupat vishleshan kya hai)

anupat vishleshan arth uddeshya mahatva simaye;अनुपात विश्लेषण से तात्पर्य वित्तीय विवरणों की मदों के बीच संबंध स्थापित करके व्यवसाय के वित्तीय विश्लेषण से होता है। इसके अंतर्गत निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप वित्तीय विवरणों की किन्हीं दो या अधिक मदों के मध्य अनुपात ज्ञात करके एक निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है।

किसी वर्ष के वित्तीय विवरणों से अनेई अनुपात ज्ञात किए जा सकते है, किन्तु उनमें से केवल कुछ ही हमारे उद्देश्य के लिए सहायक होते है। अतः अनुपातों की स्थिति के अनुसार उचित चुनाव करना तथा उन्हे सही स्वरूप मे रखना ही अनुपात विश्लेषण की प्रधान समस्या है।

अनुपात विश्लेषण के उद्देश्य/महत्व/उपयोगिता

किसी भी संस्था के लाभ-हानि खाते, स्थिति विवरण तथा अन्य वित्तीय विवरणों मे प्रदत्त व्यावसायिक सूचनाओं का अपने आप मे कोई महत्व नही होता। वास्तव मे ये एक-दूसरे से संबंधित होती है। अतः उनके आधार पर तब तक कोई उचित निष्कर्ष नही निकाला जा सकता जब तक कि विभिन्न मदों के बीच अन्त:संबंध स्थापित न किया जाये। अनुपात इस अन्त: संबंध को व्यक्त करते है। अनुपात विश्लेषण के अध्ययन का महत्व इस प्रकार है--

1. व्यावसायिक कुशलता का मूल्यांकन 

अनुपातों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर व्यावसायिक कुशलता का मूल्यांकन किया जा सकता है। अनुपातों की सहायता से किसी व्यवसाय की प्रगति अथवा अलनति के संबंध मे अनेक महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकते है। इस प्रकार अनुपातों का प्रयोग व्यवसायिक कुशलता की माप के लिये किया जाता है। 

2. वित्तीय पूर्वानुमान मे सहायता

अनुपात विश्लेषण भूतकालीन अनुपात लागत, विक्रय लाभ तथा अन्य सम्बद्ध तथ्यों की आवृत्ति पर प्रकाश डालती है तथा उनके विश्लेषणात्मक अध्ययन मे सहायक होते है। यह अध्ययन वित्त प्रबन्धक को भावी घटनाओं के पूर्वानुमान मे बहुत सहायक होता है।

3. समन्वय मे सहायक

अनुपात विश्लेषण से आदर्श अनुपातों की रचना की जा सकती है और प्रमुख अनुपातों के बीच पाये गये संबंधों का प्रयोग व्यवसायिक क्रियाओं के वांछनीय समन्वय के लिये किया जा सकता है।

4. बाहरी पक्षकारों को संस्था की आर्थिक स्थिति की जानकारी 

अनुपातों के आधार पर संस्था से संबंध रखने वाले बाहरी पक्ष, यथा-- विनियोक्ता, अंशधारी, पूर्तिकर्ता तथा लेनदार आदि को संस्था की आर्थिक मजबूती अथवा कमजोरी अर्थात् सही आर्थिक स्थिति की जानकारी प्राप्त हो जाती है। अनुपातों के आधार पर बाहरी पक्षकारों को अनेक प्रकार के निर्यण लेने मे मदद मिलती है।

5. प्रबन्धक वर्ग के लिये सहायता 

प्रबन्धक वर्ग के लिए भी अनुपातों का प्रयोग उनके आधारभूत कार्यों, जैसे-- पूर्वामान, समन्वय, नियंत्रण तथा सन्देशवाहन जैसे कार्यों मे सहायता पहुँचाता है। प्रबंधकों को इनके अध्ययन से संस्था की गतिविधियों को समझने एवं कार्यकुशलता बढ़ाने मे मदद मिलती है। यदि अनुपात विश्लेषण का सही प्रकार से प्रयोग किया जाये तो वह व्यावसायिक कुशलता मे सुधार ला सकता है तथा संस्था के लाभों की वृद्धि मे सहायक हो सकता है।

6. संदेशवाहन मे सहायक 

जो पक्षकार संस्था मे रूचि रखते है उन्हें समय-समय पर आवश्यक सूचनाएँ देने मे भी अनुपातों का प्रयोग किया जाता है। अनुपातों मे विभिन्न पक्षकारों को एक अवधि के बीच हुए परिवर्तनों की सूचना मिलती रहती है जिसके आधार पर उन्हें अपनी भावी नीति निर्धारित करने मे सहायता मिलती है। 

7. आर्दश या मानक अनुपातों का निर्धारण 

अपनी संस्था के तथा अन्य विभिन्न संस्थाओं के अनुभवों के आधार पर आर्दश या मानक अनुपातों की रचना की जा सकती है। इन्ही आदर्श या मानक अनुपातों के आसपास संस्था की गतिविधियों को केन्द्रित करने का प्रयास किया जाता है। अन्य शब्दों मे, यह भी कहा जा सकता है कि इन मानक अनुपातों के अनुरूप व्यवसाय की गतिविधियों मे संतुलन एवं समन्वय रखा जा सकता है।

8. वित्तीय निष्पादन का मूल्यांकन 

अनुपात विश्लेषण का प्रयोग वित्तीय कुशलता का मूल्यांकन करने के लिये भी किया जा सकता है।

9. प्रभावी नियंत्रण मे सहायक 

विक्रय नियंत्रण व लागत नियंत्रण मे भी अनुपातों की सहायता ली जा सकती है। प्रभावी नियंत्रण मानक अनुपातों एवं वास्तविक अनुपातों की तुलना से संभव होता है।

10. अन्य उपयोग 

अनुपात विश्लेषण वित्तीय प्रबंध को संस्था के वित्तीय स्वास्थ्य के निदान मे सहायता देता है। ऐसा व्यवसाय की तरलता, शोधन क्षमता, लाभप्रद, पूंजी दन्तिकरण आदि महत्वपूर्ण पहलुओं के मूल्यांकन द्वारा किया जा सकता है।

अनुपात विश्लेषण की सीमाएं 

यद्यपि यह सत्य है कि अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों के निर्वचन एवं निष्कर्ष की एक अमूल्य तकनीक है। अनुपातों के आधार पर यह विश्लेषण अंकों की सतह तक पहुंच सकता है, किन्तु इसके साथ-साथ हमे यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अनुपात विश्लेषण एक ऐसा शस्त्र है, जिसका प्रयोग यदि एक अकुशल व्यक्ति के द्वारा किया जाए, तो वह प्रयोग करने वाले के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। अतः अनुपात विश्लेषण का महत्व इनके उचित प्रयोग पर निर्भर करता है। इनका त्रुटिपूर्ण प्रयोग प्रबन्धकों या प्रयोगकर्ता को गुमराह भी कर सकता है। अनुपात विश्लेषण का प्रयोग करते समय इसकी कमजोरियों एवं इसकी सीमाओं का ध्यान भी नितान्त आवश्यक है।

अतः अनुपातों के आधार पर वित्तीय विश्लेषण करते समय निम्म सीमाओं को ध्यान मे रखना आवश्यक है--

1. तुलनात्मक अध्ययन आवश्यक 

व्यवसाय की कुशलता की समीक्षा मे अनुपात तब ही उपयोगी होते है जबकि उनकी तुलना पिछले परिणामों से या उसी प्रकार के अन्य व्यवसायों के परिणामों से की जाए। 

कॅनेडी एवं मॅकमूलर ने भी कहा है," एक अकेला अनुपात अपने मे अर्थहीन होता है, यह सम्पूर्ण चित्र प्रस्तुत नही करता है।" एक अकेले अनुपात की किसी से तुलना करना संभव नही होता है।

2. वित्तीय विवरणों की सीमाएं

अनुपात वित्तीय विवरणों द्वारा अभिलेखित की गई सूचनाओं व तथ्यों पर आधारित होते है, अतः वित्तीय विवरणों की जो सीमाएं है अनुपातों को भी उन्ही सीमाओं का सामना करना पड़ता है, उदाहरणार्थ, कई व्यावसायिक तथ्यों का अभिलेखन वित्तीय विवरणों मे नही किया जाता है और अनुपात केवल वित्तीय विवरण मे प्रदर्शित समंकों के आधार पर ज्ञात किए जाते है, अतः इनसे व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध मे सही पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है।

3. लेखांकन पद्धतियों मे भिन्नता 

यदि दो संस्थाओं की लेखांकन पद्धति मे एकरूपता का अभाव हो तो अनुपातों के आधार पर उनकी तुलना करना अत्यंत कठिन हो जाता है। उदाहरणार्थ, यदि कोई संस्था विज्ञापन व विकास व्ययों को पूंजीगत मानकर भविष्य के अनेक वर्षों मे उसे अपलिखित करने का निर्णय करती है और दूसरी कोई संस्था इन व्ययों को संबंधित वर्ष का ही आगम व्यय मानती है तो ऐसी स्थिति मे दोनो के लाभदायक अनुपात मे एकरूपता का अभाव होगा तथा उनकी तुलना करना संभव नही होगा।

4. आर्दश प्रमापों का अभाव 

अनुपात विश्लेषण के समक्ष आर्दश प्रमापों के अभाव की भी समस्या रहती है। व्यवहार मे विभिन्न संस्थाओं द्वारा विभिन्न शब्दों जैसे-- कार्यशील पूंजी, चालू दायित्व, विनियोजित पूंजी आदि को अलग-अलग परिभाषित किया जाता है। जैसे-- कुछ संस्थाओं मे शुद्ध चालू संपत्ति (चालू संपत्ति-चालू दायित्व) को चालू संपत्ति माना जाता है जबकि कुछ चालू संपत्तियों को ही। अतः अलग-अलग संस्थाओं मे अलग-अलग शब्दों के अलग-अलग अर्थ लिये जाते है इसलिए एक संस्था के अनुपातों की तुलना दूसरी संस्था के अनुपातों से नही की जा सकती है। 

5. कीमत स्तर मे परिवर्तन 

यदि कीमत स्तर मे परिवर्तन को ध्यान मे नही रखा जाता है तो लेखांकन अनुपात के आधार पर किया गया वित्तीय विश्लेषण भ्रमात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत करता है। उदाहरणार्थ, दो संस्थाएं जो अलग-अलग वर्षों मे स्थापित की गई है, उनकी स्थाई संपत्ति के क्रय के वर्ष भी अलग-अलग होगे, अतः उनका अनुमानित जीवनकाल भी अलग-अलग होगा। ऐसे मे उनकी आपस मे अर्थपूर्ण तुलना करना संभव नही होता है। 

6. केवल अनुपात ही पर्याप्त नही 

अनुपात तो संकेतक मात्र होते है इन्हें संस्था की अच्छी अथवा बुरी स्थिति का अंतिम सूचक नही माना जा सकता, क्योंकि इस हेतु अन्य बाते देखना भी आवश्यक होता है। उदाहरणार्थ, किसी संस्था मे उच्च चालू अनुपात सदा ही इस बात का घ्घोतक नही हो सकता कि संस्था की तरलता की स्थिति बहुत अच्छी है, हो सकता है कि चालू संपत्ति का अधिकांश हिस्सा पुराने स्कंध का हो। 

7. कृत्रिम दिखावा 

ऊपरी दिखावा अथवा विण्डो ड्रेसिंग से तात्पर्य इस प्रकार के लेखांकन से है जिसमे वास्तविक तथ्य छुपे रहे तथा वित्तीय विवरणों से संस्था की वित्तीय स्थिति सुदृढ हो। ऐसी स्थिति मे अनुपात द्वारा प्रंबध की कार्यकुशलता का सही मापन संभव नही होगा। उदाहरणार्थ, किसी स्थाई संपत्ति के क्रय को अधिक समय तक टाल कर संस्था अच्छी तरलता की स्थिति दिखा सकती है। 

8. व्यक्तिगत योग्यता व कार्य क्षमता का प्रभाव 

अनुपात वस्तुतः वित्तीय विश्लेषण का एक उपकरण मात्र होता है। अतः विश्लेषक की व्यक्तिगत योग्यता तथा कार्य क्षमता पर भी आश्रित होते है। यदि कोई विश्लेषक अनुपातों का पर्याप्त ज्ञान नही रखता है अथवा अनुपातों की गणना मे पक्षपात करता है तो उससे जो निष्कर्ष निकाले जाएंगे वे भी भ्रमात्मक होंगे।

9. गुणात्मक विश्लेषण का अभाव 

अनुपात विश्लेषण के अंतर्गत केवल परिमाणात्मक कारकों पर ही संपूर्ण ध्यान दिया जाता है। इसमे गुणात्मक कारकों पर कोई ध्यान नही दिया जाता। चाहे वे कितने ही महत्वपूर्ण क्यों न हों। उदाहरणार्थ, अनुपातों से किसी संस्था की वित्तीय स्थिति की सुदृढ़ता तथा शोधन क्षमता का अनुमान तो लगाया जा सकता है, लेकिन उस संस्था की ईमानदारी तथा चरित्र के संबंध मे अनुपात विश्लेषण मौन रहता है।

शायद यह जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी सिद्ध होंगी

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