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6/28/2021

स्थानीय स्वशासन का महत्व

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स्थानीय स्वशासन का महत्व 

स्थानीय स्वशासन का महत्व निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट किया जा सकता है--

1. स्थानीय समस्याओं का समाधान 

नगरीय समाज की समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है केंद्रीय अथवा राज्य सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि वह छोटे बड़े नगरों की असंख्या समस्याओं का समाधान कर सके। इसके अतिरिक्त वह विभिन्न नगरों की समस्याओं से परिचित भी नहीं होती है। अस्तु उसके लिए उन समस्याओं का समाधान ढूंढना भी दुरूह कार्य है। स्वशासन मे स्थानीय प्रतिनिधि होते हैं, वे अपने क्षेत्र की समस्याओं में से भली-भांति परिचित होते हैं। अस्तु वे इनके निराकरण का रास्ता भी निकाल लेते हैं। इससे स्थानीय समस्याओं का समाधान सरल हो जाता है।

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2. सरकार के उत्तरदायित्व मे कमी

स्थानीय स्वशासन के कारण केंद्रीय और राज्य सरकार की ऊर्जा स्थानीय समस्याओं के निराकरण में नष्ट नहीं होती है। क्योंकि स्थानीय स्वशासन स्वतः अपनी अनेक समस्याओं का निराकरण कर लेता है। इससे सरकार के स्थानीय उत्तरदायित्व का बोझ कम हो जाता है।

3. स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति 

स्थानीय स्वशासन अपने नगर की विभिन्न आवश्यकताओं को पूर्ण करने का प्रयास करता है। यह उसका पुनीत दायित्व भी है क्योंकि यदि यह स्थानीय समस्याओं का हल नहीं ढूंढ पाता है तो नगर विशेष की प्रगति नहीं हो पाती है।

4. राष्ट्रीय स्वशासन की नींव 

स्थानीय स्वशासन की स्थापना करने का अर्थ है राष्ट्रीय स्वशासन की नींव डालना। पराधीन देश की स्वतंत्रता का आरंभ स्थानीय स्वशासन से होता है। जब जनता में स्वशासन की भावना उत्पन्न हो जाती है, तो वह राष्ट्रीय स्वशासन को प्राप्त करने के लिए यथासंभव प्रयास करती है।

5. न्याय की दृष्टि से महत्वपूर्ण 

स्थानीय समस्याओं का शीघ्र और उचित रूप से निराकरण हो सके और स्थानीय जनता के साथ न्याय किया जाए। इस दृष्टि से स्थानीय स्वशासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति का यह अधिकार है कि उसे अपनी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के लिए अवसर प्राप्त हो स्थानीय स्वशासन के अभाव में व्यक्ति को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार के सम्मुख गिड़गिड़ाना पड़ेगा और उसका कार्य अति शीघ्र ना हो सकेगा। अस्तु स्थानीय समस्याओं के निराकरण के लिए स्थानीय स्वशासन आवश्यक है। वह विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए तत्पर रहता वह बिना किसी पक्षपात के स्थानीय समस्याओं का समाधान करता है।

6. लोकतंत्रात्मक सरकार का आधार

निःसंदेह स्थानीय प्रशासन लोकतंत्र का आधार है। स्थानीय संस्था वह पाठशाला है जहां व्यक्ति को आरंभिक रूप में प्रशासन का प्रशिक्षण प्राप्त होता है। वह अपने अधिकार और कर्तव्य से भी परिचित होता है। यह प्रजातंत्र के शासन की आधार और नींव है।

7. मितव्ययिता 

स्थानीय स्वशासन में जनता के अनेक प्रतिनिधि बिना किसी आर्थिक लाभ के कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य अपने नगर की विभिन्न समस्याओं का निराकरण करना है। स्थानीय संस्थाएं स्थानीय जनता के विभिन्न कार्यों को पूर्ण करने हेतु कुछ कर भी लगाती हैं। इसलिए स्थानीय व्यक्ति अत्यधिक जागरूक होता है वह चाहता है कि उसके धन का दुरुपयोग ना किया जाए। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन व्यर्थ में जनता का धन नष्ट नहीं करता।

8. नौकरशाही पर दबाव और स्वावलम्बन की भावना 

स्थानीय प्रशासन में जनता के चुने हुए व्यक्ति होते हैं वे अधिकारियों पर निरंतर दबाव बनाए रखते हैं की जनता की समस्याओं का निराकरण निर्धारित समय पर ही किया जाए। जनता के धन को व्यर्थ में नष्ट ना किया जाए। इन कार्यों से जनता में स्वाबलंबन की भावना उत्पन्न होती है।

महात्मा गांधी कहा करते थे, कि दिल्ली का शासन संपूर्ण देश की समस्याओं का निराकरण नहीं कर सकता। अतः शक्ति और सत्ता का विकेंद्रीकरण देश की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दृष्टि से स्थानीय प्रशासन का अपना महत्व है।

डी. टाकविल ने इस संदर्भ में लिखा है कि नागरिकों की स्थानीय सभाएं स्वतंत्र राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। नगर सभाएं स्वतंत्रता के लिए इतनी जरूरी है जितनी की आरंभिक पाठशाला है। विज्ञान के लिए वे स्वतंत्रता को व्यक्तियों तक पहुंचाती है। वे उनको सिखाती है कि स्वतंत्रता का आनंद किस प्रकार उठाया जाए। एक राष्ट्र भले ही सरकार की पद्धति को स्थापित कर ले। किंतु स्थानीय संस्थाओं के बिना इसमें स्वतंत्रता की भावना नहीं आ सकती

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