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4/25/2021

बेरोजगारी क्या है? परिणाम/प्रभाव, दूर करने के उपाय

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बेरोजगारी क्या है? (berojgari kise kahte hai)

berojgari ka arth;बेरोजगारी निर्धनता की तरह ही एक वैश्विक सामाजिक समस्या है। यद्यपि प्रत्येक देश अथवा समाज की परिस्थितियां भिन्न-भिन्न होती है अतः बेरोजगारी के कारण और स्वरूप मे भिन्नता अवश्य होती है। 

बेरोजगारी से आश्य उस स्थिति से है जिसमे व्यक्ति वर्तमान मजदूरी की दर पर काम करने को तैयार होता है परन्तु उसे काम नही मिलता। बेरोजगारी की स्थिति मे श्रम शक्ति और रोजगार के अवसरों की असमानता बढ़ती जाती है। इससे श्रमिकों की मांग की अपेक्षा पूर्ति अधिक होती है। ऐसी स्थिति मे बहुत से व्यक्ति काम करने योग्य तो है परन्तु उन्हें काम नही मिल रहा है।

अन्य शब्दों मे," जब कोई व्यक्ति काम करने योग्य हो और काम करने की इच्छा भी रखता हो लेकिन उसे काम करने का अवसर न मिले तो वह बेरोजगार कहलाता है। 

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बेरोजगारी के परिणाम अथवा प्रभाव

1. मानव शक्ति का अपव्यय 

कार्य करने योग्य व्यक्ति जब बेकार रहते है तो उनका श्रम व्यर्थ जाता है। इस तरह से बहुत से बेरोजगारो की श्रम शक्ति का उपयोग नही हो पाता।

2. आर्थिक विकास मे बाधा 

कृषि मे निहित बेरोजगारी और अन्य बेरोजगारी से बचत शुन्य हो जाती है। क्योंकि आय कम हो जाती है। पूंजी का निर्माण और विनियोग नही हो पाता है। इससे देश के आर्थिक विकास मे रूकावट आती है।

3. संसाधनों की बर्बादी 

देश मे सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा के लिये बहुत बड़ी धनराशि खर्च करती है। प्रशिक्षण पर भी खर्च होता है परन्तु बेरोजगारी के कारण ये सब व्यर्थ हो जाता है।

4. सामाजिक समस्याएं 

बेरोजगारी मानसिक और सामाजिक असंतोष को जन्म देती है। बेरोजगारी असंतुष्ट और परेशान व अभाव ग्रस्त रहते है इससे चोरी, डकैती बेईमानी, शराबखीरी, नशा, आदि बुराइयाँ समाज मे पनपने लगती है। सुरक्षा व्यवस्था नष्ट होती है। नागरिकों मे असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है। सरकार को इस हेतु बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।

5. राजनीतिक अस्थिरता 

बेरोजगारी के कारण एक बड़ा जन समूह सरकार के विरुद्ध हो जाता है। उनमे असंतोष और आक्रोश उत्पन्न हो जाता है। ये स्थिति राजनैतिक अस्थिरता को जन्म देती है। सरकार पर सदा संकट बना रहता है।

बेरोजगारी को दूर करने के उपाय/सुझाव 

बेरोजगारी दूर करने के उपाय निम्न प्रकार हैं--

1. जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण 

जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण करना चाहिए इससे श्रमिकों की पूर्ति दर मे कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ यह भी अति आवश्यक है।

2. लघु और कुटीर उद्योगों का विकास 

ये उद्योग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रो में मे स्थापित है तथा अंश कालीन रोजगार प्रदान करते है। इसमे पूंजी कम लगती है और ये परिवार के सदस्यों द्वारा ही संचालित होते है। इसके द्वारा बेकार बैठे किसान और उनके घर के सदस्य अपनी क्षमता, श्रम, कला कौशल और छोटी-छोटी जमा राशि का उपयोग कर अधिक आय और रोजगार प्राप्त कर सकते है। अतः सरकार को इनके विकास के लिये पूंजी उपलब्ध करानी चाहिए।

3. व्यवसायिक शिक्षा 

देश की शिक्षा पद्धति मे समयानुसार परिवर्तन की आवश्यकता होती है। हमे शिक्षा को रोगजार उन्मुक बनाना है। हाईस्कूल पास करने के बाद छात्रों का उनकी रूचि के अनुसार व्यवसायिक शिक्षा चुनने के लिये जोर देना चाहिए। इससे शिक्षा प्राप्त करने के बाद के व्यवसाय से जुड़ सकेंगे और देश मे बेरोजगारी की समस्या हल हो सकेगी।

4. विनियोग मे वृद्धि 

सार्वजनिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पूंजी का विनियोग कर बेरोजगारी दूर की जा सकती है। निजी क्षेत्र मे बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए जो कि श्रम प्रधान हो। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। बड़े-बड़े उद्योगो मे पूंजी गहन तकनीक पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि इनमें बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग किया जाता है और मानव श्रम क लगता है। इससे बेरोजगारी बढती है।

5. सहायक उद्योगों का विकास 

ग्रामीण क्षेत्रों मे कृषि के सहायक उद्योग जैसे दुग्ध व्यवसाय, मछली पालन, मुर्गीपालन, बागवानी, फूलों की खेती आदि का विकास करना चाहिए।

7. प्रशिक्षण सुविधाएं 

अकुशल श्रमिकों को प्रशिक्षण देने के लिये जगह-जगह प्रशिक्षण केन्द्रष खोलना चाहिए। इससे उत्पादन मे वृद्धि होगी और बेरोजगारी कम होगी। श्रमिकों की मांग और पूर्ति के अनुसार प्रशिक्षण आयोजित होने चाहिए। श्रम को गतिशीलता प्रदान करना चाहिए जिससे वे दूसरे स्थान पर जाकर नौकरी प्राप्त कर सके।

8. ग्रामीण रोजगार योजनाओं का विस्तार 

गावों मे चलने वाली विकास योजनाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। कृषि सेवा केन्द्र खोलना चाहिए। स्वरोजगार योजना, जवाहर योजना, समृद्धि योजना इत्यादि का विस्तार किया जाना चाहिए। शहरो मे प्रधानमंत्री रोजगार योजना, रोजगार गारंटी स्कीम आदि का अधिक विस्तार करना चाहिए।

9. कृषि उन्नति 

कृषि मे विभिन्न नये कार्यक्रम लागू करना चाहिए। बहुफसल योजना, उन्नत बीज, उर्वरक, कृषि यंत्रो का उपयोग नई तकनीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। कृषि हेतु समय पर ऋण उपलब्ध कराना चाहिए। सिंचाई योजनाओं का विस्तार होना चाहिए। इससे कृषि आय बढ़ेगी और रोजगार प्राप्त हो सकेंगे। कृषि उद्योग हेतु छोटी छोटी बचत की जा सकेगी।

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