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3/20/2021

सीमा शुल्क के प्रकार

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seema shulk ke prakar;यह सामान्यतः धारणा है कि आयातित माल पर केन्द्र सरकार द्वारा  एक निर्धारित दर से आयात कर वसूल किया जाता है; लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार द्वारा केवल मूल सीमा शुल्क ही वसूला नही जाता, बल्कि आयाति माल पर उत्पाद शुल्क एवं विक्रय कर की प्रतिपूर्ति के लिए अतिरिक्त सीमा शुल्क भी लगाया जाता है।

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इसके अलावा कुछ विलासिता की वस्तुओं पर विशेष शुल्क लगाया जाता है, तो कई बार देशी उद्योगों को संरक्षण देने के लिए आयातित माल पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाई जाती है। विभिन्न प्रकार के सीमा शुल्क क्या है और किस प्रकार लगाए जाते है, इसका विस्तृत विवेचन निम्न प्रकार है--

सीमा शुल्क के प्रकार (sima shulk ke prakar)

भारत सरकार द्वारा विदेशों से वस्तुओं मे आयात-निर्यात पर जो सीमा शुल्क लगाया जाता है, उसके विविध प्रकार प्रचलित रहे है। सीमा शुल्क के प्रकारों को दो भागों मे बांटा जा सकता है--

(अ) सीमा शुल्क के प्रमुख प्रकार 

(ब) परिस्थिति अनुसार अन्य विशिष्ट प्रकार 

इनका विवेचन इस प्रकार से है--

(अ) सीमा शुल्क के मुख्य प्रकार 

इसके अंतर्गत सीमा शुल्क के ऐसे प्रकार आते है, जो सामान्यतः प्रत्येक आयातित माल पर देय होते है। ऐसे मुख्य प्रकार निम्नलिखित है--

1. मूल सीमा शुल्क 

मूल सीमा शुल्क, माल के मूल्य के आधार पर लगाया जाता है। इसकी उच्चतम दर वित्त अधिनियम, 2005 के अनुसार 15% थी, जिसे 2007-2008 के बजट मे 1 मार्च 2007 से घटाकर 10% कर दिया गया था। इस समय (2017) इसकी दर 10% है।

2. सामाजिक कल्याण अधिभार 

आयातित माल पर देय सीमा शुल्क की राशि पर 10% की दर से सामाजिक कल्याण अधिभार (Sws)  2 फरवरी 2018 से जोड़ा जाता है। जैसे यदि आयातित करयोग्य माल का मूल्य 5 लाख रूपये है और सीमा शुल्क की मूल दर 10% है तो मूल सीमा शुल्क की राशि 50,000 पर 10% की दर से 5,000 रूपये सामाजिक कल्याण अधिभार और जोड़ेगे इस प्रकार कुल शुल्क 55,000 रूपये हो जाएगा।

3. एकीकृत जीएसटी 

जीएसटी लागू होने के बाद अब आयात किये गये माल पर जीएसटी की प्रभावी दर (3%, 5%, 12%, 18% या 28%) जो लागू हो, एकीकृत जीएसटी देय होगा। पिछले उदाहरण मे यदि एकीकृत जीएसटी की दर 5% हो तो 55,000 कर की राशि पर 55,000×5/100=2,750 रूपये जीएसटी लगेगा। इस प्रकार कुल तटकर होगा 55,000+2,750=57,750 रूपये।

4. जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 

भारत मे जिन वस्तुओं पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर लगता है उन वस्तुओं के आयात पर भी क्षतिपूर्ति उपकर लगेगा। जैसे भारत मे मोटर कार, तम्बाकू निर्मित पदार्थ तथा पान-मसाल आदि पर क्षतिपूर्ति उपकर लगता है तो ऐसे आयातित माल पर भी यह कर लगेंगा।

(ब) सीमा शुल्क के अन्य प्रकार 

इसके अंतर्गत सीमा शुल्क के ऐसे प्रकार आते है, जो सामान्यता सभी आयातित माल पर नही लगाए जाते, बल्कि कुछ विशिष्ट वस्तुओं पर विशिष्ट परिस्थितियों मे लगाए जाते है। ऐसे अन्य प्रकार निम्नलिखित है--

1. संरक्षण शुल्क 

यदि भारतीय उद्योगों के हित रक्षम के लिए टैरिफ कमीशन संरक्षण ड्यूटी लगाने की अनुशंसा करता है एवं केन्द्रीय सरकार इससे संतुष्ट होती है, तो किसी वस्तु विशेष पर अधिसूचना जारी करके ऐसी छुट्टी लगाई जा सकती है। जैसे-- चीन से आयात होने वाले सस्ते सामान मे भारतीय उद्योगों को संरक्षण देने के लिए इस प्रकार का संरक्षण शुल्क लगाया गया है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के समझौते के अंतर्गत ऐसी ड्यूटी लगाना संगत नही है। 

2. अधिमानी दर से सीमा शुल्क 

केन्द्रीय सीमा शुल्क की प्रथम अनुसूची के अंतर्गत सामान्य (Standard) दर एवं अधिमानी दर (Preferential rate) से सीमा शुल्क का संग्रहण किया जाता है। अगर आयातक आयात करते वक्त यह दावा करता है कि वह वस्तु जिसका वह आयात कर रहा है, वह अधिमानी क्षेत्र (Preferential area) मे निर्मित की जा रही है, तो उस पर अधिमानी दर लगेगी। अधिमानी दर सामान्य दर से कम होती है। अधिमानी क्षेत्र केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करके घोषित किए गए है, जैसे-- माॅरीशस (Mauritius), सिशेल्स (Seychelles), टोंगा (Tonga)।

अगर केन्द्रीय सरकार चाहे, तो इस दर को घटा सकती है या बढ़ा सकती है या खत्म कर सकती है। अगर यह दर बढ़ायी जाती है, तो यह सामान्य दर से अधिक नही हो सकती है।

3. राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता शुल्क 

पान मसाला, तम्बाकू का गुटखा, सिगरेटें, पोलिएस्टर फिलामेन्ट यार्न, मोटर कारें, बहु-उद्देशीय वाहन, दो पहिया वाहन आदि के आयात पर 1% की दर से राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता शुल्क (NCCD) लगाया जाता है। इसकी गणना कर-योग्य मूल्य मे मूल सीमा शुल्क की राशि जोड़ने के बाद ज्ञात राशि पर की जाती है।

4. चीन से आयात पर निर्विष्ट संरक्षण शुल्क 

अगर चीन से भारत मे कोई वस्तु भारी मात्रा मे आयात हो रही हो जिससे घरेलू बाजार को खतरा उत्पन्न हो रहा हो तो सरकार अधिसूचना जारी करके संरक्षण शुल्क लगा सकती है।

5. सहायता प्राप्त वस्तुओं पर प्रति शुल्क 

यदि कोई देश या क्षेत्र अपने यहां उत्पादित या निर्मित वस्तुओं पर या उनके निर्यात के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता देता है तो ऐसी वस्तुओं के भारत मे आयात होते समय केन्द्रीय सरकार प्रति शुल्क लगा सकती है लेकिन प्रति शुल्क की राशि सहायता की राशि से अधिक नही होगी।

6. सस्ते मे बेची गई वस्तुओं पर शुल्क 

यदि कोई निर्यातक देश किसी माल का भारत को निर्यात भारतीय उत्पादन को हानि पहुँचाने या अपने Excess stock को भारत मे Dump करने के उद्देश्य से भेजता है तो भारत सरकार घरेलू उद्योग के संरक्षण के लिए तथा समान आधार उपलब्ध कराने के लिए ऐसे माल के आयात होने पर anti dumping duty लगा सकती है, परन्तु इस शुल्क की राशि उचित मूल्य एवं निर्यात मूल्य के अंतर से अधिक नही होगी।

यदि यह शुल्क वापस नही लिया जाता तो लगाने की तिथि से अधिकतम 5 वर्ष लागू रहेगा। केन्द्रीय सरकार समय-समय पर इस अवधि को बढ़ा सकती है।

यह शुल्क अन्य सीमा शुल्कों के अतिरिक्त होगा।

7. पुनः आयात शुल्क 

अगर भारत से कोई माल निर्यात किया गया था और उस माल का भारत मे पुनः आयात किया जाता है तो ऐसे माल पर उसी प्रकार आयात शुल्क लगाया जावेगा जो उस प्रकार के माल के वास्तविक आयात पर लगाया जाता है। 

8. चाय एवं चाय के अवशिष्ट पर अतिरिक्त शुल्क 

यदि भारत मे चाय एवं चाय के अवशिष्ट आयात किये जाते है तो उस पर एक रूपया प्रति किलोग्राम की दर से अधिभार के रूप मे अतिरिक्त शुल्क लगाया जायेगा, परन्तु हरी चाय पर अतिरिक्त शुल्क नही लगेंगा।

9. निर्याय शुल्क 

सामान्य रूप से वस्तुओं के निर्यात पर कोई शुल्क नही लगाया जाता है, लेकिन हड्डियां, चमड़ा एवं खालों पर 15% निर्यात शुल्क लगाया जाता है।

10. बैगेज पर शुल्क 

विदेश यात्रा से लौटकर आने वाले यात्री विदेशों से जो सामान लाते है उस पर जो शुल्क लगता है उसे बैगेज शुल्क कहते है। सामान्यतः 50,000 रूपये तक का समान शुल्क मुक्त है, लेकिन इससे अधिक सामान की दशा मे 35% की दर से आयात शुल्क लगता है। एक लेपटाॅप कम्प्यूटर बिना शुल्क चुकाए बैगेज के रूप मे लाया जा सकता है।

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