1/06/2020

विदेश नीति का अर्थ, निर्धारक तत्व और सिद्धांत

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भारतीय विदेश नीति

भू-भाग की दृष्टि से भारत विश्व में सात नम्बर और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर आता हैं। इसलिए भारत की विदेश नीति विश्व की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ता हैं। स्वतंत्रता से पूर्व भारत की कोई विदेश नीति नही थी, क्योंकि भारत ब्रिटिश सरकार के अधीन था। भारत अब एक स्वतंत्र और प्रजातांत्रिक राष्ट्र हैं।
2 सितम्बर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण मे भारत की विदेश नीति के लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि "हम संसार के अन्य राष्टों से निकट और प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने तथा सहयोग और शांति कायम रखने के लिए बड़े उत्सुक हैं।"  आज हम विदेश नीति क्या है, विदेश नीति का अर्थ, भारत की विदेश नीति के निर्धारक तत्व और भारतीय विदेश नीति के सिद्धांत जानेंगे।

विदेश नीति का अर्थ 

विदेश नीति वह नीति या दृष्टिकोण है, जिसके द्वारा कोई राष्ट्र विश्व के अन्य राष्टों के साथ व्यवहार करता है जिसमें संबंधों का निर्माण या उनसे दूरी अथवा अनुकूलता या प्रतिकूलता बनायी जाती हैं। यदि देखा जाये तो विदेश नीति वह कला है जो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का शुद्ध आधार प्रस्तुत करती हैं। एक राष्ट्र के क्या-क्या राष्ट्रीय हित है वह किस प्रकार उन्हें सुरक्षित रखना व विकसित करना चाहता हैं।
भारत की विदेश नीति
जाॅर्ज मोडलेस्की के अनुसार "विदेश नीति एक राज्य की गतिविधियों का सुव्यवस्थित व विकासशील रूप है, जिसके द्वारा एक राज्य अन्य राज्यों के व्यवहार को अपने अनुकूल बनाने अथवा यदि ऐसा न हो पाये तो अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण के अनुसार बदलने का प्रयास करता है।"

भारत की विदेश नीति के निर्धारक तत्व 

1. राष्ट्रीय हित
विदेश नीति मे राष्ट्र हित सबसे महत्वपूर्ण होता हैं। प्रत्येक देश अपने देश को शक्तिशाली बनाने के लिए प्रयास करता हैं कि उसके राष्ट्रीय स्वार्थ सुरक्षित रह पायें। ये हित हमेशा एक से नहीं रहते। समय-समय पर यह आवश्यकतानुसार परिवर्तित होते हैं।
2. अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा 
भारत की विदेश नीति का निर्धारक तत्व अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा मे वृद्धि करना है।
3.राष्ट्रों के मध्य न्यायपूर्ण तथा सम्मानजनक संबंध बनाए रखना
भारत की विदेश नीति का आर्दश राष्ट्रों के मध्य न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध बनाए रखना हैं।
4. राष्ट्र की प्रतिष्ठा और आर्दश
एक शांतिप्रिय तथा नैतिकता से पूर्ण मनोवृत्ति वाला राज्य अपनी शक्ति का प्रयोग यकायक नही करता है। वह संघर्ष शांतिपूर्ण तरीकों से ही हल करने मे रूचि लेता है और उन सभी राष्ट्रों के साथ सहयोग करता है, जो विश्व शांति मे अपनी रूचि रखते है। इसके विपरीत जो राष्ट्र आतंकवादी है, युद्धप्रिय हैं वे अपनी विदेश नीति में उग्रता रखते हैं और युद्धों को अपना साधन मानकर दूसरे राष्ट्रों पर हावी होकर उन्हें प्रभावित करते हैं।
5. सांस्कृतिक कारक 
विदेश नीति को निर्धारित करने मे सांस्कृतिक कारकों का महत्व होता हैं। अपनी परंपराएं सामाजिक आदर्शों तथा मूल्यों को ध्यान मे रखकर विदेशनीति का निर्माण करते हैं।
6. भौगोलिक स्थिति
यह दो तरह से प्रभावित करती हैं।
1. स्थित 2. देश के अंदर संसाधन तथा उसका उपयोग।
यदि कोई राष्ट्र बहुत महत्वपूर्ण राजनैतिक स्थित मे है तो अपनी प्रकार विश्व बाजार मे उपयोग दे सकता है अथवा किस प्रकार उसका राजनीतिक उपयोग हो सकता है आदि को ध्यान मे रखकर विदेश नीति बनायी जाती हैं।


भारत की विदेश नीति के सिद्धांत (आर्दश)

1. तटस्थता अथवा असंलग्नता
भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि इसने किसी भी सैनिक गुट मे सम्मिलित न होकर तटस्थता अथवा असंलग्नयता की नीति अपनाई है। लेकिन तटस्थता का यह अर्थ बिल्कुल भी नही है कि भारत विश्व की मे घटित विभिन्न घटनाओं को अनदेखा करगा और ना ही विश्व से अगल अपने को निष्क्रिय रखना हैं।
2. अन्तर्राष्ट्रीय सद्भाव, सहयोग एवं मित्रता को बनाए रखना
भारत की विदेश नीति का एक आर्दश  अन्तर्राष्ट्रीय सद्भाव, सहयोग एवं सभी राष्ट्रों से मित्रता बनाए रखने का प्रयास करना हैं।

3. सहअस्तित्व अथवा पंचशील 
भारत ने सदैव से ही सहनशीलता के रास्ते को अपनाया है यही सहअस्तित्व आधार हैं। विभिन्न राष्ट्रों के अस्तित्व के प्रति सहनशीलता को पंचशील के नाम से जाना जाता हैं।
4. साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद एवं रंगभेदपरक असमानता का विरोध 
भारत हमेशा से ही साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद एवं रंगभेद असमानता का विरोधी रहा हैं अतः यह भारत की विदेश नीति का सिद्धांत हैं।
5. विश्व शांति को प्रोत्साहन
भारत विश्व शांति मे विश्वास रखता है। भारत विश्व शांति के लिए हमेशा प्रयासरत रहता हैं। भारत की विदेश नीति का एक सिद्धांत विश्व शांति को प्रोत्साहन देना हैं।
6. आन्तरिक मामलो मे विदेशी हस्तक्षेप का विरोध 
भारत की विदेश नीति का सिद्धांत आन्तरिक मामलो मे विदेशी हस्तक्षेप का भारत विरोधी हैं भारत इसका विरोध करता हैं।
आशा करते हैं आपको विदेश नीति क्या है, भारतीय विदेश नीति के निर्धारक तत्व और सिद्धांतों समझने मैं किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है आई होगी। अगर आपका कोई सवाल हैं तो नीचे comment  कर जरूर पहुंचिए।

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