4/26/2022

विनियोग प्रबंध क्या हैं? महत्व

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विनियोग प्रबंध क्या हैं? (viniyog prabandh kise kahte hai)

‘विनियोग‘से आशय वित्तीय सम्‍पत्तियों अथवा मूर्त सम्‍पत्तियों से है जिनमें पूंजी लगाने के बाद एक निश्चित रकम की प्राप्ति की आशा हो। ‘प्रबन्‍ध‘ का अर्थ पूर्वनिर्धारित लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिये मानवीय क्रियाओं को नियोजित, संगठित, निर्देशित, उत्‍प्रेरित, समन्वित तथा नियन्त्रित करने की कला तथा विज्ञान है। विनियोग प्रबन्‍ध को अन्‍य शब्‍दों में परिभाषित करते हुये कहा जा सकता है कि, ‘आय में से उपभोग करने के उपरान्‍त बचाये गये धन को इस प्रकार नियोजित, संगठित, निर्देशित, उत्‍प्रेरित, समन्वित तथा नियंत्रित करने की कला तथा विज्ञान है ताकि उस धन से अतिरिक्‍त आय प्राप्‍त हो सके तथा उसके वास्‍तविक मूल्‍य में वृद्धि का निर्धारित लक्ष्‍य प्राप्‍त किया जा सके।‘

हैनरी सावैन के अनुसार, ‘‘प्रबन्‍ध का आशय इच्छित परिणाम की प्राप्ति हेतु किये गये उद्देश्‍यपूर्ण कार्य से है। कुछ स्थितियों में प्राप्‍त लक्ष्‍यों का निर्णय करने तथा परिभाषित करने का कार्य विनियोग प्रबन्‍धकों के लिए सबसे कठिन कार्य है। जब यह कार्य सम्‍पन्‍न हो जाता है तब दूसरा प्रश्‍न होता है कि किस प्रकार हम अपने उद्देश्‍यों की प्राप्ति हेतु सर्वोत्‍तम विधि से आगे बडे़? इस प्रश्‍न का सम्‍पूर्ण उत्‍तर है-एक विनियोग कार्यक्रम या विनियोग नीतियों का समूह जिसमे यह बताया गया है कि अभी क्‍या करना है तथा भविष्‍य में विभिन्‍न परिस्थितियों में क्‍या किया जाता है। विनियोग प्रबन्‍ध का तीसरा भाग है। विनियोग नीतियों के अनुरूप विशेष प्रतिभूतियों का चयन करके नीतियों का क्रियान्‍वयन है। इन नीतियों के क्रियान्‍वयन के लिए समयानुसार विभिन्‍न प्रतिभूतियों का क्रय एवं विक्रय किया जाता है।"

ऊपर दी गयी परिभाषायों के अनुसार विनियोग प्रबन्‍ध के निम्‍नांकित तत्‍व स्‍पष्‍ट होते है--

1. इच्छित लक्ष्‍यों का निर्णय करना तथा उन्‍हें परिभाषित करना, 

2. लक्ष्‍यों की प्राप्ति हेतु विनियोग कार्यक्रम बनाना तथा विनियोग को नीतियों का निश्‍चय करना तथा

3. विनियोग नीतियों का क्रियान्‍वयन करना तथा उसके अनुरूप प्रतिभूतियों का क्रय एवं विक्रय करना। 

विनियोग प्रबंध का महत्त्व (viniyog prabandh ka mahatva)

वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में विनियोग प्रबन्‍ध अधिक महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है। इसके बढ़ते हुए महत्त्व को देखते हुए प्रत्‍येक विनियोक्‍ता अपने-अपने उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए विनियोग करता है। विनियोग प्रबन्‍ध का महत्त्व निम्‍नानुसार है--

1. मुद्रा प्रसार का प्रभाव कम करने के लिए 

पिछले कुछ वर्षो से बाजार में वस्‍तु की कीमतों में अत्‍यधिक वृद्धि होती जा रही है तथा मुद्रा की कीमत में कमी हो रही है। यदि कोई व्‍यक्ति अपनी बचत को यों ही पड़ा रहने दे तो कुछ वर्षो के उपरान्‍त मुद्रा प्रसार के प्रभाव के कारण उसके क्रय-मूल्‍य में कमी आती जायेगी। इस प्रकार यह आवश्‍यक हो जाता है। कि कठिन परिश्रम से की गयी बचत का विनियोग ऐसी जगह किया जाये जहां उसके वास्‍तविक मूल्‍य में वृद्धि हो तथा नियमित आय भी मिलती रहे। विनियोग प्रबन्‍ध का ज्ञान इस उद्देश्‍य की प्राप्ति में बहुत सहायता करता है। 

2. सेवा निवृत्ति के उपरान्‍त पर्याप्‍त धन हेतु 

एक व्‍यक्ति 55 या 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होता है। सेवा निवृत्ति के उपरान्‍त अपने शेष जीवन को सम्‍मान पूर्ण ढंग से जीने के लिए उसे कुछ धन तथा नियमित आय की आवश्‍यकता महसूस होती है। इस उद्देश्‍य की पूर्ति हेतु व्‍यक्ति अपनी आय का कुछ हिस्‍सा बचाता है। तथा उसे ऐसे उपयोगी विनियोगों में लगाता है ताकि उसके धन के वास्‍तविक मूल्‍य में वृद्धि हो सके एवं नियमित भी प्राप्‍त होती रहे। विनियोग प्रबन्‍ध उनके उस उद्देश्‍य की पूर्ति करता है।

3. करों का भार कम करने के लिए

वर्तमान में जहां एक ओर व्‍यक्तिगत करों जैसे आयकर, धनकर, उपहार कर आदि की दरों में वृद्धि हो रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ विशिष्‍ट मदों में विनियोग करने (जैसे जीवन बीमा, प्राविडेण्‍ट फण्‍ड, राष्‍ट्रीय बचत-पत्र, यूनिट आदि) पर करों में छुट भी मिलती है। एक उचित विनियोग योजना को अपनाकर व्‍यक्तिगत करों से छूट प्राप्‍त कर सकता है तथा कर का भार हल्‍का सकता है। 

4. अतिरिक्‍त आय का उचित विनियोजन

स्‍वतंत्रता प्राप्ति के उपरान्‍त रोजगार तथा शिक्षा के अवसरों में वृद्धि हुई है। समाज में महिलायें जो लगभग अशिक्षित ही रहती थीं अब ने केवल शिक्षा प्राप्‍त करती है वरन् पारिवारिक आय में वृद्धि के लिए विभिन्‍न नौकरियां में भी जाती हैं। परिवार में पुरूष तथा महिला दोनों के पास रोजगार होने के कारण आय में वृद्धि होती ही है। इस बढ़ी हुई अतिरिक्‍त आय का उचित विनियोजन करने के उद्देश्‍य की पूर्ति के विनियोग प्रबन्‍ध के ज्ञान से ही सम्‍भव हो सकती है।

5. तरलता के उद्देश्‍य की पूर्ति के लिये

प्रत्‍येक व्‍यक्ति भविष्‍य में आवश्‍यकताओं के लिये बचत तो करता ही है साथ ही वह यह भी चाहता है कि उसका ध्‍यान ऐसी जगह विनियोजित किया जाये ताकि आवश्‍यकता पड़ने पर उसे प्राप्‍त हो सके। दूसरे शब्‍दों में, वह तरलता बनाए रखना चाहता है। सम्‍पत्तियों में रोकड़ सबसे अधिक तरल सम्‍पत्ति है किन्‍तु रोकड़ को तरल रूप में रखे रहने से कोई लाभ नहीं होता है बल्कि मुद्रा प्रसार के कारण उसकी वास्‍तविक कीमत में कमी हो जाती है। इस प्रकार रोकड़ को कही-न कहीं ऐसी जगह विनियोजित करना आवश्‍यक होता है जहां तरलता भी बनी रहे तथा उससे लाभ भी कमाया जा सके। इस उद्देश्‍य की पूर्ति के लिये विभिन्‍न प्रतिभूतियों विशेष रूप से ऐसी कम्‍पनियों के अंश खरीदे जाते हैं जिन्‍हें बाजार में शीघ्र बेचकर नकदी प्राप्‍त की जा सके। 

6. आय को अधिकतम करने के लिये

विनियोग प्रबन्‍ध के अध्‍ययन से विनियोक्‍ता अपनी आय अधिकतम कर सकता है। विनियोग प्रबन्‍ध का अन्तिम उद्देश्‍य या लक्ष्‍य विनियोग से प्राप्‍त होने वाली आय को अधि‍कतम ही करना होता है। बाजार में तरह-तरह की प्रतिभूतियां, अंश एवं ऋण-पत्र उपलब्‍ध होते हैं, जिनमें विनियोग किया जा सकता है। विभिन्‍न प्रकार की सम्‍पत्तियों मकान, जमीन तथा सोने में भी विनियोग किया जा सकता है। देश की अर्थव्‍यवस्‍था के अनुरूप इन विनियोगों के मूल्‍य के उतार-चढ़ाव होता रहता है। विनियोग प्रबन्‍ध का जानकार उचित समय पर इन विनियोगों को क्रय करता है तथा बेचता है। क्रय एवं विक्रय के सम्‍बन्‍ध में विनियोक्‍ता द्वारा लिये गये सही निर्णय से लाभ को अधिकतम किया जा सकता है। 

7. जोखिम तथा अनिश्चितता को कम करने के लिये

सामान्‍यतः अधिक ब्‍याज दर वाले विनियोगों में जोखिम तथा अनिश्चितता होती है जबकि कम ब्‍याज दर वाले विनियोग अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं। सरकारी प्रतिभूतियां, बांड, विभिन्‍न बचत योजनाएं तथा बैंकों में जमा किए जाने वाले धन पर ब्‍याज अपेक्षाकृत कम प्राप्‍त होता है किन्‍तु इनमें धन लगाना अधिक सुरक्षित रहता है जबकि विभिन्‍न कम्‍पनियों के अंशों, ऋण-पत्रों तथा अन्‍य योजनाओं में धन लगाने पर यद्यपि ब्‍याज तो अधिक मिलता है किन्‍तु कम्‍पनियों के डूब जाने का भी भय बना रहता है। विनियोक्‍ता कई बार अधिक ब्‍याज पाने के लालच में अपने मूलधन से भी हाथ धो बैठता है। विनियोग प्रबन्‍ध के व्‍यवस्थित अध्‍ययन से ऐसी प्रतिभूतियों का चयन करना सरल हो जाता है जिनमें जोखिम तथा अनिश्चितता कम हो तथा ब्‍याज भी ऊंची दर से नियमित रूप से प्राप्‍त होता रहे। 

8. पारिवारिक दायित्‍वों की पूर्ति करने हेतु

प्रत्‍येक व्‍यक्ति के अपने पारिवारिक दायित्‍व होते हैं। बच्‍चों की शिक्षा, विवाह, रहने के लिये मकान तथा सेवा निवृत्ति के पश्‍चात् पारिवारिक भरण-पोषण आदि के दायित्‍व ऐसे ही कुछ दायित्‍व हैं। विनियोग प्रबन्‍ध का अध्‍ययन इन दायित्‍वों की पूर्ति हेतु उचित योजना बनाने में सहायक होता है। विनियोग की उचित योजना बनाने से सही समय पर धन उपलब्‍ध हो सकता है तथा पारिवारिक दायित्‍व की पूर्ति की जा सकती है। उदाहरणार्थ बच्‍चों की शिक्षा के लिये निर्धारित अवधि के लिये बैंक की स्‍थायी जमा योजना या राष्‍ट्रीय बचत-पत्र में धन लगा सकते है।

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