4/15/2022

प्रक्रिया लागत विधि क्या हैं? उद्देश्‍य, विशेषताएं, सिद्धांत

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प्रक्रिया लागत प्रणाली का अर्थ एवं परिभाषा (prakriya lagat vidhi kya hai)

प्रक्रिया लागत विधि से मतलब लागत की उस प्रणाली से होता है। जहां किसी वस्‍तु को अन्तिम निर्माण की स्थिति में लाने के लिये कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। बहुधा इस विधि का प्रयोग रासा‍यनिक पदार्थ, सा‍बुन, वनस्‍पति घी, तेल व वार्निश आदि वस्‍तुओं के उत्‍पादन में किया जाता है। इस प्रकार की वस्‍तुओं का उत्‍पादन किसी एक ही प्रक्रिया द्वारा पुरा करना सम्‍भव नहीं है। उक्‍त विधि के अन्‍तर्गत पहली प्रक्रिया का निर्मित माल दूसरी प्रक्रिया के लिये कच्‍ची सामग्री का कार्य करता है तथा दूसरी प्रक्रिया का निर्मित माल तीसरी प्रक्रिया के लिये कच्‍ची सामग्री का कार्य करता है। इस प्रकार विभिन्‍न प्रक्रियाओं के माध्‍यम से उत्‍पादन-कार्य पुरा किया जाता है। 

शार्ल्‍स के अनुसार, ‘‘प्रक्रिया लागत-लेखा विधि उन उद्योगो में प्रयोग की जाती है, जिनमें ऐसी वस्‍तु का निर्माण होता है, जो विभिन्‍न विधियों से होकर गुजरती है और जिनमें प्रत्‍येक विधि की लागत जानना आवश्‍यक होता है। इस प्रकार एक सामग्री विभिन्‍न प्रक्रियाओं में से निकलकर अन्तिम प्रक्रिया में पहुंचती है, जहां पर निर्माण-कार्य सम्‍पन्‍न होता है तथा वस्‍तु विक्रय-योग्‍य बन जाती है"

प्रक्रिया लागत विधि उद्देश्‍य (prakriya lagat vidhi ke uddeshya)

प्रक्रिया लागत-लेखा-विधि को अपनाने के निम्‍नलिखित उद्देश्‍य होते है---

1. प्रत्‍येक प्रक्रिया की लागत ज्ञात करना

इस पद्धति को इसलिये अपनाया जाता है, जिससे प्रत्‍येक प्रक्रिया की लागत ज्ञात की जा सके। 

2. प्रत्‍येक प्रक्रिया के अन्‍तर्गत क्षय को ज्ञात करना 

उत्‍पादन प्रक्रियाओं में माल के भार में क्षय तथा अन्‍य प्रकार की बरबादी होती है। इस सम्‍बंध में पूर्ण जानकारी के उद्देश्‍य से प्रक्रिया लागत विधि अपनायी जाती है। 

3. उपोत्‍पाद का मूल्‍य ज्ञात करना

वस्‍तुओं के निर्माण में कुछ वस्‍तुयें ऐसी भी होती हैं जिनमें मुख्‍य उत्‍पादनों के साथ-साथ कुछ सहायक वस्‍तुओं का उत्‍पादन स्‍वयं ही होता रहता है। जैसे- चीनी के उत्‍पादन में खोई तथा शीरा, कपास से रूई निकालने में बिनौला, तेल निकालने में खल आदि। ऐसी वस्‍तुओं को उपोत्‍पाद कहते है, जिनका मूल्‍यांकन इस विधि द्वारा किया जा सकता है। 

4. प्रत्‍येक प्रक्रिया पर होने वाले लाभ-हानि को ज्ञात करना

उत्‍पादन की विभिन्‍न प्रक्रियाओं के अन्‍तर्गत होने वाले लाभ-हानि को ज्ञात करने के उद्देश्‍य से भी प्रक्रिया लागत-लेखा-विधि को अपनाया जाता है। 

प्रक्रिया लागत विधि किन उद्योगों में उपयोग की जाती हैं?

प्रक्रिया लागत निम्‍न उद्योगों में उपयोग किया जाता है--

1. निर्माण उद्योग

आयरन एवं स्‍टील, सीमेंट व चूना उद्योग, कागज व रबड़, उद्योग, ओटोमोबाइल प्‍लांट्स, सैरामिक, बर्फ व रोगन कारखाने आदि। 

2. रसायन उद्योग 

रसायन निर्माण में साबुन, तेल, दवाओं, के कारखाने आदि। 

3. खान-उद्योग 

खनिज तेल, कोयला, गंधक, सोना, लोहा, जस्‍ता आदि। 

4. जन-उपयोगी कार्य 

विद्युत उत्‍पादन, गैस उत्‍पादन आदि। 

5. जन-उपयोगी कार्य 

विद्युत उत्‍पादन, गैस उत्‍पादन आदि। 

प्रक्रिया लागत प्रणाली की विशेषताएं (prakriya lagat vidhi ki visheshta)

प्रक्रिया लागत प्रणाली की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-- 

1. उत्‍पादन कार्य एक से अधिक प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है, इस स्थिति में प्रत्‍येक प्रक्रिया का प्‍लांट एक उत्‍पादन का निर्माण करता है। 

2. उत्‍पादन मानक होता है व प्रक्रिया भी मानक होती है। 

3. एक प्रक्रिया का निर्मित माल दूसरी प्रक्रिया में कच्‍ची सामग्री के रूप में प्रयोग आता है और उत्‍पादन के पूर्ण होने तक यह कम चलता रहता है। 

4. उत्‍पादन कार्य संपन्‍न करने के लिए प्रक्रियाओं का क्रम निश्चित होता है तथा प्रत्‍येक प्रक्रिया की क्रियाएं भी निश्चित होती है। 

5. उत्‍पादन सजातीय व सदृश्‍य होता है तथा एक प्रक्रिया की इकाईयां एक ही प्रकार की होती हैं। उदाहरणतया, कोई उत्‍पाद अ, ब, स तीन प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है। अतः अ प्रक्रिया का उत्‍पादन स से अलग होगा एवं ब प्रक्रिया का उत्‍पादन स से अलग होगा। अतः ये उत्‍पादन स्‍वयं की प्रक्रिया में एक ही प्रकार की होती है। 

प्रक्रिया लागत के सिद्धांत (prakriya lagat ke siddhant)

प्रक्रिया लागत विधि के अन्‍तर्गत सामान्‍य सिद्धांत निम्‍नलिखित हैं--

1. सामग्री, श्रम, प्रत्‍यक्ष व्‍यय व उपरिव्‍यय की प्रक्रियाओं के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है। 

2. उत्‍पादन सम्‍बंधी लेखे इस प्रकार से रखे जाते हैं कि प्रत्‍येक प्रक्रिया की उत्‍पादन मात्रा तथा उस प्रक्रिया का क्षय अथवा अवशेष ठीक प्रकार से ज्ञात हो सके। 

3. प्रत्‍येक प्रक्रिया की लागत को उत्‍पादित इकाईयों से विभाजित करके प्रति इकाई की लागत ज्ञात की जाती है। 

4. अवधि के अन्‍त में शेष चालू-कार्य की इकाईयों को तुल्‍य-उत्‍पादन इकाईयों के रूप में दिखाया जाता है।

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