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11/02/2021

चतुर/चालाक कैसे बने?

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chatur chalak kaise bane;नमस्कार दोस्तों मैं हूँ कैलाश मीणा और स्वागत करता हैं आपका हमारी इस पोस्ट में जहाँ मैं आपको बताऊँगा की चतुर चालक कैसे बने?

चतुर चालाक कैसे बने?

चालक या चतुर बननें का यहाँ हमारा अर्थ यह बिल्कुल भी नही हैं की आप किसी को ठग लें या किसी की मजबूरी का फायदा उठाए, या फिर लोगों को बेबकूफ बनाएं। चालक या चतुर बननें का अर्थ यह हैं की कोई आपको ठग न सकें, कोई आपको बेबकूफ न बना सकें। वैसें कीसी का सीधा-सदा या भोला-भाला होना कोई बुरी बात नही हैं। लेकिन जो लोग सीधे स्वाभाव हैं के होते हैं उनको न कहना नही आता जिसकी वजह से यह लोग कई बार ऐसी जिम्मेदारियाँ ले लेते हैं जिनके कारण यह आगे चलकर परेशानी और तनाव का शिकार हो जाते हैं। 

इसलिए आज के बदलतें तौर में आपका चतुर-चालक होना बहुत जरूरी हैं। यदि आप चतुर चालक नही हैं तो आप खुद के काम से तो परेशान रहेंगें ही और दुसरों के कारण भी आप परेशान रहेंगें। क्योंकी आज के तौर में भोले-भाले लोगों को हर कोई बेबकूफ बना देता हैं और उनका जमकर फायदा उठता हैं। अक्सर  ऐसा देखने को मिलता हैं कि जो लोग चतुर चालक नही होते यानि की जो लोग सीधे-साधे होते हैं वह दुसरों से कई बार ऐसी जिम्मेदारी ले लेते हैं जिसका उनसे कोई लेना-देना नही होता। इस पोस्ट में हमने आपको चतुर चालक बनने के 11 नियम बताए हैं, यदि आप उनको फाॅलों करते हैं तो निश्चित ही आपको कभी कोई बेबकूफ नही बना पाएंगा और आपको सभी जगह पर इज्ज़त मिलेंगी। चालक बनने के इन 11 नियम को जानने से पहले हम यह जानेंगे की आखिर चतुर और चालक व्यक्ति किसे कहते हैं? और चतुर चालक होने के फायदे क्या हैं?

चुतर और चालक व्यक्ति कौन होता हैं? 

चतुर और चालक लोग होशियार लोगों को कहा जाता हैं। ऐसा व्यक्ति जो अपनी होशियारी का लोहा मनवाते हैं। ऐसे व्यक्ति जो सही समय पर सही निर्णय लेते हैं। लोगों के वहकावे में कभी नही आतें। 

वैसे अगर सच कहूँ तो चालक-चतुर और भोलेपन जैसा कुछ नही होता हैं। जिन्ह लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती हैं यानि की जिन लोगों को खुद पर विश्वास नही होता वही सीधे-साधे या भोले-भाले होते हैं और जिन्ह लोगों मे आत्मविश्वास होता हैं यानि की जिन्हें खुद की काबिलियत पर विश्वास होता हैं वही चतुर और चालक कहें जाते हैं।

चतुर चालक होने के फायदे 

चतुर चालक होने के अनेक फायदे हैं, जिनमें से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं--

1. चतुर चालक लोगों को मुर्ख बनाना आसान नही होता। जबकि जो लोग सीधे-साधे होते हैं उन्हें कुछ बुरे लोग अक्सर ठग लिया करते हैं।

2. चतुर-चालक लोग अपनी फील्ड में कम अनुभव होने के कारण भी अन्य लोगों से आगे निकल जाते हैं। वहीं जो लोग सीधे-साधे होते हैं वह अपनी फील्ड में बहुत अच्छे और टैलेंटेड होने के बाद भी वो अपने आप को उस तरह प्रेजेंट नहीं कर पाते जिस तरह होना चाहिए। इस कारण वह वहाँ नही पहुंच पाते जहाँ होने वास्‍तव में होना चाहिए।

3. चतुर-चालक लोग बेमतलब की उलझनों में कभी नही फंसतें जिसके कारण वह हमेशा तनाव रहित रहते हैं। 

4. चतुर-चालक लोगों को लड़कियाँ भी पसंद करती हैं, हाॅलकि हो सकता हैं कि आपके भोलेपन को देखकर लड़कियाँ आपकी इज्ज़त करें लेकिन वह एक सीधे-साधे लड़के को कभी प्यार की नज़र से नही देखती। 

5. चतुर-चालक लोगों को अपने काम का क्रेडिट हमेशा मिलता हैं, जबकि जो लोग चतुर चालक नही होते वह अपने काम का क्रेडिट भी नही ले पाते। 

चतुर/चालाक कैसे बने
तो दोस्तों आपने देखा कि चतुर-चालक होना कितना जरूरी हैं, और सीधा-साधा होना कितना नुकसानदायक हैं। जैसा की हम इस पोस्ट में पहले ही कह चुके हैं की चतुर-चालक बनने का अर्थ यह बिल्कुल भी नही हैं की आप लोगों को मुर्ख बनायें या उनका फायदा उठायें। इसलिए आज हम आपको जो भी टिप्स बता रहें हैं उनका प्रयोग किसी भी अच्छे या भोला-भाले इंसान को बेबकूफ बनाने के लिए बिल्कुल भी न करें। क्योंकि ऐसा करना अनैतिक हैं, ऐसा करना अच्छी बात नही हैं। तो आइए जातने हैं चतुर-चालक कैसे बने? चतुर-चालक बनने के तरिके या टिप्स।

चतुर-चालक बनने के 11 जबरदस्त टिप्स 

1. कभी किसी को ऐसी बातें न बताए जो आगे चलकर परेशानी का कारण बनें 

चतुर-चालक बनने का सबसे पहला नियम यह हैं कि आप हमेशा अपनी प्राइवेसी को बनाए रखें। नेटवर्क मार्केटिंग वालों की तरह अपनी कमाई (इनकम) को सबकों चिल्ला-चिल्ला कर न बताए। यदि आपकी कोई गर्लफ्रेंड या ब्याफ्रेड़ हैं तो उसका भी वेवजह कभी किसी से जिक्र न करें। 

अपने सुख या दुःखों के बारें में भी किसी को न बताए। यदि अपने सुखों का वेवजह किसी से गुनगान करेंगें तो कुछ लोग वेवजह आपसे जलेंगे और अपने दुःखों के बारें में लोगों बताएंगे तो इसमें आपकी कोई मदद नही करेंगा जो भी करना हैं आपको ही को करना हैं। इसलिए अपने दुःखों का जिक्र सिर्फ उन्हें के साथ करें जो आपकी मदद कर सकें। वेवजह हर किसी से अपने दुःखों का जिक्र न करें। ऐसा करना मुर्खों की निशानी हैं। अधिकांश लोगों को न तो किसी की खुशी से कोई मतलब होता हैं ना दुःख से। इसलिए सभी को अपने दुःखों का रोना न रोए।

अब बात आती हैं की भला हमें अपनी कमाई के बारें में लोगों को बताने में किया नुकसान हैं, इसके भी बहुत नुकसान हैं। कभी भी अपनी वास्तविक स्थिति की बारें में किसी को पता न चलनें दे। यदि आपकी कमाई ज्यादा हैं तो निश्चित ही आपने बहुत मेहनत की होगी। लेकिन यह बात कुछ लोग नही समझेंगें। उन्हें आपकी मेहनत खजाने की तरह लगेंगें। वेवजह उधार मांग-मांग वह आपको परेशान करेंगें। ऐसा में आप उनको मना भी नही कर सकतें क्योंकि आपने उन्हें अपनी इनकम के बारें में बता रखा हैं। 

ध्यान दे, यहाँ पर मेरा मतलब यह बिल्कुल भी नही हैं की आप मुसीबत के वक्त किसी की मदद न करें। यदि आप सक्षम हैं  तो अपने दोस्त-दुश्मन सभी की मुसीबत के वक्त मदद जरूरी करें।

यदि आपकी इनकम कम है तो कहना तो नही चाहिए लेकिन लोग आपकी इज्ज़त कम करेगें, जी हाँ कुछ लोग आर्थिक स्थिति को देखकर ही लोगों की रिस्पेक्ट करते हैं जो सही नही हैं लेकिन आज के तौर में यह एक सामान्य सी बात हैं। 

इसलिए हमेशा अपनी प्राइवेसी को बनाए रखें लोगों के साथ अपनी सभी बात शेयर न करें।

2. अपने दुःख या सुख का किसी से जिक्र न करें 

चतुर-चालक बनने का दूसरा नियम यह हैं की आप किसी को वेवजह बेमतलब ना तो अपने सुखों का गुणगान करें और ना ही अपने दुःखों का रोना रोए। अपने चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखें, और लोगों को हमेशा खुश दिखें लेकिन अपने सुखों का वेवजह गुनगान न करें। जहाँ तक दुःखों की बात हैं तो सिर्फ उन्ही को बताए जिनके पास आपके दुःखों का हल हों। हमेशा अपने दुःखों का रोना रोने वाले लोगों को कोई भी पसंद नही करता चाहें वो हम या आप ही क्यों न हों? 

अधिकांश लोगों को ना तो हमारें सुखों से कोई मतलब होता हैं और ना ही दुःखों से। थोड़े-बहुत लोग ही ऐसे होते हैं जिन्हें हमारी खुशी में खुशी मिलती हैं दुःखों मे दुःख। वाकि कुछ लोग दुसरे की खुशी को देखकर जल उठते हैं और दुःखों को देखकर उनका मजाक बनाते हैं।

3. मना करना सीखें

शायद यह आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा और शायद आप अभी ऐसा सोच रहें होगे की किसी को ना बोलना तो सही नही हैं। 

किसी को ना बोलने का अर्थ यहाँ पर यह बिल्कुल भी नही हैं कि आप अपने दोस्तों या किसी जान-पहचान के परिचित की मदद न करें या हमेशा किसी भी काम के लिये दूसरों को मना कर दें। 

कई बार हालत ऐसे होते हैं की जहाँ पर हमारा ना बोलना जरूरी हो जाता हैं। किसी चीज के लिए हमारा हाँ कहना हमारे लिए परेशानी या तनाव का कारण बन जाता हैं।  

लोगों की मदद जरूरी करें लेकिन जिसकी आप मदद कर रहें हैं। उसके बारें में आप कुछ बातें जरूर पता होना चाहिए। जैसे-- क्या यह बंदा मदद के लायक हैं? क्या इसे वाकई मे मेरी जरूरत हैं? कहीं वह आपकी हेल्प लेकर खुद आराम तो नही करना चाहता हैं? यदि आप उसकी जगह पर होते तो क्या आप भी उसकी मदद लेतें? 

ऐसा करने पर आपको उसकी प्रॉब्लम का सही अंदाजा लग जायेगा। यानि की आपको उसकी मदद करनी चाहिए या नही। 

4. सभी को खुश करने की कोशिश न करें 

सभी को खुश करना हमारे वस की बात नही हैं। आप चाहकर भी सभी को खुश नही कर सकते कोई न कोई आपसे नाराज जरूर रहेंगें इसलिए आपको कुछ लोगों की नाराज़गी को इग्नोर तो करना ही पढ़ेगा। दुनिया की सारी प्रॉब्लम आपकी नहीं है इसलिए सुकून से जीयें, जो लोग नाराज हैं उन्हें इग्नोर करें उन पर ध्यान न दें।

5. लोगों के हाव-भाव को समझें

यदि ज्ञान लेना हैं तो बुक पढ़े और यदि किसी इंसान को समझना हैं तो उसके हाव-भाव को समझे। किसी व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है यह काफी हद तक उसकी बॉडी लैंग्वेज से स्पष्ट हो जाता हैं। अगर बात करते समय सामने वाले का बॉडी ओरिएंटेशन आपकी तरफ है, तो इसका मतलब है कि वह आपको पसंद करता है। यदि कोई अपनी जिन्दगीं से जुड़ी सारी बातें आपके साथ शेयर कर रहा हैं तो निश्चित ही वह आपको काफी हेमियत देता हैं। आप उसके लिए एक खास व्यक्ति हैं।

6. अपने दोस्तों की परख करना सीखें 

अपने दोस्त को जरूर परखे कुछ लोग सिर्फ मुहँ से ही दोस्ती निभाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन जब उनकी जरूरत होती हैं तो वह धीरे से अपने कदमों को पिछे कर लेते हैं। ऐसा में एक बार आपको अपने दोस्तो को जरूर परखना चाहिए।

7. लोगों को खुद को जीनियस दिखाए 

कभी किसी को ऐसा न लगें की आप एक छोटे से काम को करने के लिए भी बहुत समय लगाते हैं। लोगों को ऐसा न लेगें की आपने एक छोटे से काम को करने में बहुत देर लगा दी बल्कि लोगों को ऐसा लगें की आपने इतने बड़े काम को इतनी आसानी से और कम समय में ही कर दिया। 

8. ज्यादा मीठा बोलने वालों से बच कर रहें 

मीठा शहद बननें वाली मधुमक्खी भी जहरिला डंक मार सकती हैं। इसलिए होशियार रहें ज्यादा मीठा बोलने वालें हमारे लिए हनी नही बल्कि हानि भी दें सकते हैं। 

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं," जो लोग आपसे मीठा बोलते हैं आप उन्हें आपना मित्र मानते हैं और जो लोग आपसे कड़वा बोलते हैं आप उन्हें अपना शत्रु मानते हैं। कभी-कभी मीठा बोलने वाला आपका शत्रु हो सकता हैं और कभी-कभी कड़वा बोलने वाला आपका मित्र हो सकता हैं। ठीक उसी भाँति जैसे मीठा सोमरस हानिकारक होता हैं और कड़वी औषधीय लाभदायक। इसलिए किसी को भी उसके शब्दों से नही उसके कर्मों से जानें।

 9. चापलूसी कम करें 

चतुर-चालक लोग लोगों की चापलूसी नही करते हैं बल्कि लोग उनकी चापलूसी करते हैं। लोग अपनी तारिफ के भूखे होते हैं आप उनकी तारिफ प्रत्यक्ष रूप से न करके अप्रत्यक्ष रूप से करें। वेवजह किसी को मक्खन न लगाए। 

10. मजाक करें लेकिन मजाक न बनाए 

हंसी-मजाक का एक अपना ही अलग महत्व होता हैं। हंसी-मजाक जरूर करें लेकिन इसका ध्यान रखें की कहीं आपके हंसानें के चक्कर में किसी और का मजाक तो नही बन रहा हैं।

11. खुश रहें 

खुश रहना चतुर-चालक लोगों की निशानी होते हैं। चतुर-चालक लोग कभी उदास नही रहतें वह हमेशा खुश रहते हैं। इसलिए अपने चहरे पर हमेशा मुस्कान रखें। मुस्कुरातें लोग सभी को पसंद होते हैं। यदि कभी कुछ बुरा हो तो याद रखे जो हो गया वो हो चुका हैं उसे भूल जाना ही बेहतर हैं। सिर्फ अपना वर्तमान देखें और भविष्य की योजना बनायें।

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