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6/05/2021

भौतिक भूगोल का महत्व, प्रकृति

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भौतिक भूगोल का महत्व या अध्ययन की उपयोगिता 

bhautik bhugol ka mahatva prakriti;वह विज्ञान जो भौतिक तत्वों तथा उनसे उत्पन्न वातावरण एवं परिस्थितियों का पूर्णरूपेण ज्ञान कराये, उसकी उपयोगिता अत्यधिक होगी। भौतिक भूगोल के अध्ययन की उपयोगिता को बताने के लिये कुछ उदाहरण भी दिये जा सकते है। पृथ्वी के वह भाग जहां मौसम बहुत अनिश्चित होता है, जैसे-- पश्चिमी यूरोप- वहां कृषि, उद्योग, व्यापार आदि के लिये मौसम की भविष्यवाणी अति आवश्यक है। 

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आने वाली आँधियों, तूफानों और भूकम्पों की सूचना यदि मनुष्य को मिलती रहे, तो इससे बचाव का उपाय करके उसका जीवन सुखद बन सकता है। मनुष्य के जीवन मे भौतिक परिस्थितियों का एक और महत्वपूर्ण कार्य यह है कि ये परिस्थितियां मनुष्य को किसी न किसी संकल्प के लिये प्रेरणा भी देती है। जब शरीर को ठण्ड का अनुभव होता है, तब उसकी इच्छा ठण्ड से बचने की होती है। ठण्ड से बचने के लिये वह आवश्यक सामग्री का प्रबन्ध करता है। प्रकृति की यह उत्तेजना ही मनुष्य की उन्नति व अन्य सभी कार्यों के लिये उत्तरदायी है।

भौतिक भूगोल की प्रकृति (bhautik bhugol ki prakriti)

भूगोल विषय को स्थानों का विज्ञान माना जाता है। भूगोल मे पृथ्वी के विभिन्न भागों में मिलने वाली विभिन्नताओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। पृथ्वी पर मिलने वाली विभिन्नताओं हेतु या तो प्राकृतिक कारक उत्तरदायी होते है अथवा मानवीय क्रियाकलाप। यही कारण है कि भूगोल मे प्राकृतिक कारकों द्वारा उत्पन्न विविधताओं का अध्ययन करने हेतु भौतिक भूगोल एवं मानवीय कारकों द्वारा उत्पन्न विविधताओं का अध्ययन करने हेतु मानव भूगोल नामक दो शाखाओं का जन्म हुआ। भौतिक भूगोल मे भूसतह की भिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है। यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि भूसतह मे भूमि के सभी तत्व स्थल, जल एवं वायु समाहित है। यही नही, भू-सतह पर निवास करने वाले जीवधारियों को भी इससे अलग नही किया जा सकता।

भौतिक भूगोल को एक वैज्ञानिक विषय के रूप मे स्थापना अठारहवीं शताब्दी के मध्य मे जर्मन भूगोलवेत्ताओं के भौगोलिक अध्यापनों के साथ हुई। उन्नीसवीं शताब्दी मे भौतिक भूगोल को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने वाले भूगोलवेत्ताओं मे हम्बोल्ट, रिटर, पेशेल, रिचथोफिन एवं पेन्क नामक जर्मन भूगोलवेत्ताओं के योगदान उल्लेखनीय रहे हैं।

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