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3/24/2021

कृषि आय क्या है? प्रकार

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krishi aay ka arth prakar;आयकर अधिनियम की धारा 10 (1) मे कृषि आयकर से मुक्त है। भारतीय संविधान ने "संसद" को कृषि आय पर आयकर लगाने हेतु अधिकृत नही किया है, क्योंकि कृषि आर पर आयकर राज्य सरकारों द्वारा लगाया जा सकता है, लेकिन भारत मे अभी तक किसी भी राज्य सरकार द्वारा कृषि आय पर आयकर नही लगाया गया है। कर-निर्धारण वर्ष 1974-75 से एक करदाता की कुल आय पर आयकर निकालने हेतु उसकी 'शुद्ध कृषि आय' को कुल आय मे शामिल किया जाता है। इस तरह एक करदाता की शुद्ध कृषि आय उसकी कुल आय मे तभी जोड़ी जायेगी, जबकि--

1. व्यक्ति या हिन्दू अविभाजित परिवार करदाता की गैर कृषि आय 50,000 हजार रूपये से ज्यादा हो और, 

2. उसकी शुद्ध कृषि आय 5,000 रूपये से ज्यादा है। ऐसे मे कृषि आय करदाता की कुल आय मे जोड़कर कर की गणना की जावेगी और बाद मे कृषि पर कर की छूट दी जावेगी।

साझेदारी फर्म एवं कंपनी करदाता की दशा मे कृषि आय को कर गणना करते समय कुल आय मे नही जोड़ा जाता। 

कृषि आय क्या है? (krishi aay kise kahte hai)

जमीन पर उगने वाली सभी उपज को बेचने से प्राप्त आय कृषि आय नही होती है। अतः यहाँ पर यह जानना जरूरी है कि कृषि आय किसे कहते है? कृषि आय को आयकर अधिनियम की धारा 2 (1A) मे परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार कृषि आय से आशय निम्न आयों से है-- 

1. भारत मे स्थित किसी ऐसी भूमि से प्राप्त किराया या लगान जिसका प्रयोग कृषि कार्यों हेतु किया जाता है।

2. उपर्युक्त तरह की भूमि से प्राप्त आय जो उस पर कृषि करने से या कृषि उपजों को विक्रय योग्य बनाने हेतु किसी क्रिया को करने से या उपज को बेचने से प्राप्त की गई हो।

3. उपर्युक्त तरह की भूमि से लगे हुए किसी मकान की आय, जिसका प्रयोग किसान या भूमि के मालिक द्वारा रहने अथवा पशुओं को रखने अथवा भंडार गृह के रूप मे किया जाता है। किन्तु इसके लिए निम्न शर्तों की पूर्ति जरूरी है--

(अ) ऐसी भूमि पर भारत मे लगान अथवा कोई स्थानीय कर लगता हो जो कि सरकारी अधिकारियों द्वारा निर्धारित या वसूल किया जाता है, या

(ब) अगर उस भूमि पर स्थानीय कर नही लगता है तो वह भूमि नगर पालिका या केंटोंमेंट बोर्ड की स्थानीय सीमाओं से अधिकतम 8 किलोमीटर से दूर के क्षेत्र मे स्थित होनी चाहिए या 10,000 से कम आबादी वाली नगर पालिका अथवा कैंटोनमेंट बोर्ड के क्षेत्र मे स्थित होनी चाहिए।

कृषि आय के तत्व 

इस तरह कृषि आय के जरूरी तत्व निम्न तरह बताए जा सकते है-- 

1. आय भूमि से प्राप्त की गई हो

इसका अभिप्राय यह है कि कोई आय कृषि आय तभी मानी जाएगी, जबकि वह कृषि भूमि या जमीन से संबंधित हो। खदान, नदी, समुद्र, जंगल आदि से संबंधित आयें भूमि से संबंधित आय नही मानी जाएगी।

2. यह भूमि भारत मे स्थित हो

ऐसी कृषि भूमि भारत मे होनी चाहिए। भारत से बाहर अर्थात् विदेशी भूमि से होने वाली कृषि आय इस परिभाषा के अंतर्गत कृषि आय की श्रेणी मे नही आयेगी।

3. भूमि का प्रयोग कृषि कार्यों के लिए होना चाहिए 

तात्पर्य यह है कि भूमि पर जुताई, बुवाई, सिंचाई आदि कृषि क्रियाएं की गई हो। नर्सरी मे तैयार किये गये पौधें से आय भी कृषि आय मानी जाएगी, चाहे कृषि क्रियाएं की गयी हो, या नही, लेकिन अपने आप उगने वाले पेड़-पौधे कृषि कार्यों के अंतर्गत नही आते।

4. भूमि मे हित होना 

भू-स्वामी या किरायेदार या गिरवी रखने वाले को प्राप्त आय ही कृषि आय मानी जाती है, क्योंकि इनका भूमि मे हित होता है। खड़ी फसल को खरीदकर बेचने से प्राप्त आय कृषि आय नही होगी।

इस प्रकार से सरल शब्दों मे हम कह सकते है कि भू-स्वामी या किरायेदार को भारत मे स्थित भूमि पर कृषि कार्य करने से होने वाली आय कृषि आय कहलाती है। कृषि भूमि से प्राप्त किराया अथवा लगान एवं कृषि के उपयोग मे आने वाले भवन की आय भी कृषि आय की श्रेणी मे आती है।

कृषि आय के प्रकार (krishi aay ke prakar)

आयकर अधिनियम की धारा 2 (1A) दी गई परिभाषा के आधार पर निम्न प्रकार की सभी आयें कृषि आय की श्रेणी मे आती है--

1. भूमि से प्राप्त किराया

अगर भूमि-मालिक द्वारा अपनी भूमि किसी अन्य व्यक्ति को कृषि कार्य हेतु दे दी जाए, तो उससे प्राप्त होने वाला किराया कृषि आय के अंतर्गत आता है।

2. भूमि पर खेती से प्राप्त आय 

जब भूमि पर कृषि की जाती है तब ऐसी भूमि की उपज से जो आय प्राप्त होती है उसे 'भूमि पर खेती' से प्राप्त आय कहते है।

3. नर्सरी मे पौधें तैयार करने से आय

नर्सरी मे छोटे पौधे तैयार करने से आय भी कृषि आय मानी जाएगी, चाहे भूमि पर मूल क्रियाएं नही की गयी हो। इस प्रकार नर्सरी मे फल-फूल के छोटे पौधे तैयार करने और उन्हें बेचने से आय कृषि आय की श्रेणी मे आएगी और करमुक्त मानी जाएगी।

4. उपज को विक्रय योग्य बनाने की क्रिया मे परिश्रम से प्राप्त आय 

कभी-कभी किसान को अपनी उपज विक्रय योग्य बनाने हेतु कुछ क्रियाएं करनी पड़ती है, तब कहीं उसे आय प्राप्त होती है, जैसे-- चाय, तंबाकू तथा रूई को विक्रय योग्य बनाने हेतु उन्हें खुखाना एवं अन्य क्रियाएं करनी पड़ती है। इन क्रियाओं से प्राप्त आय कृषि आय है।

5. भूमि की उपज को बेचने से प्राप्त आय 

किसान अथवा किराया प्राप्त करने वाले के द्वारा अपनी उपज की नियमित दुकान लेकर बिक्री करने से प्राप्त आय को कृषि आय मानेंगे।

6. कृषि के कार्य मे उपयोग मे आने वाले मकान से आय

अगर कोई मकान कृषि भूमि पर उसके निकट स्थित हो तथा उसे किसान अथवा लगान प्राप्तकर्ता अपने रहने के लिए या भंडार गृह या बाहरी मकान के रूप मे प्रयोग करता है तो ऐसे मकान की आय कृषि आय होगी। पर ध्यान रहे कि उस भूमि पर भारत मे किराया या स्थानीय कर लगता हो तथा सरकारी अफसरों के द्वारा वसूल किया जाता हो।

कृषि आय के कुछ उदाहरण 

1. बंधक रखने वाले व्यक्ति द्वारा उप-किरायेदार से कृषि भूमि के लिए प्राप्त किया गया किराया।

2. कृषि कार्यों मे संलग्न फर्म से किसी साझेदार द्वारा पूंजी पर प्राप्त किया गया ब्याज।

3. तूफान मे नष्ट हुई फसल के लिए बीमा कंपनी से प्राप्त क्षतिपूर्ति।

4. फूल, पौधे एवं लतिकाएं उगाने से होने वाली आय।

गैर-कृषि आय के कुछ उदाहरण 

निम्न आयें यद्यपि कृषि आय जैसे प्रतीत होती है, कृषि आय के आवश्यक लक्षणो को पूरा न करने के कारण कृषि आय नही मानी जाती--

1. कृषि भूमि के पिछले बकाया किराये पर प्राप्त ब्याज की रकम।

2. मुर्गी पालन से आय।

3. मछली पालन से आय।

4. खाने की राॅयल्टी से आय।

5. मक्खन तथा पनीर की बिक्री से आय।

6. समुद्री जल से भूमि मे पानी भरकर उत्पादित नमक से आय।

7. साहूकार या महाजन द्वारा कृषि उपज के रूप मे प्राप्त ब्याज।

8. कृषि भूमि को जल की पूर्ति करने मूल्य के बदले मे प्राप्त कृषि उपज की बिक्री से आय।

9. बाजारों, मेलों तथा प्रदर्शनियों से होने वाली आय।

10. पत्थर की खानों से प्राप्त होने वाली आय।

11. कृषि फार्म के प्रबंधक के रूप मे प्राप्त होने वाला परिश्रमिक।

12. ईंट बनाने हेतु प्रयुक्त भूमि की आय।

13. लाख की खेती करने से होने वाली आय।

14. खड़ी फसल को खरीदने पर होने वाली आय।

15. तालाब मे सिंघाड़े उगाने से प्राप्त आय।

16. कृषि उपज को संग्रहित करके भण्डार के रूप मे प्रयुक्त भूमि से आय।

17. कृषि कार्यों मे प्रयोग न किये जाने वाले पशुओं के लिए भूमि पर चारा उगाने से आय।

18. भू-स्वामी को किरायेदार की उपज के विक्रय पर प्राप्त कमीशन।

19. कृषक द्वारा अधिक उत्पादन करने के परिणामस्वरूप प्राप्त इनाम की राशि।

20. कृषि कार्यों मे लगी हुई कंपनी से अंशधारियों को प्राप्त लाभांश की आय।

12. डेयरी फार्म की आय।

22. जमीन की मिट्टी से बेचने से आय।

उदाहरण-- कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि आयकर के दृष्टिकोण से निम्न मे से कौनसी आयें कृषि आये है तथा कौनसी गैर कृषि आये है--

1. फूल तथा अन्य बेलें उठाने से आय

उत्तर; बागवानी के रूप मे लगाये गये फल-फूलों को बेचनै से बेचने से प्राप्त आय कृषि आय है, क्योंकि यह आय भूमि से संबंधित है तथा कृषि क्रियाएं की गयी है। 

2. कृषि कार्य मे लगी हुई कंपनी से प्राप्त लाभांश की आय

उत्तर; कृषि कार्य मे लगी भारतीय कंपनी से प्राप्त लाभांश कृषि आय नही है, क्योंकि लाभांश प्राप्तकर्ता ने कोई कृषि क्रिया नही की है। यह लाभांश अलग से अन्य साधनों की आय शीर्षक मे करमुक्त होगा।

3. एक कृषक को दिये गये ॠण का ब्याज 

उत्तर; यह कोई कृषि आय नही है क्योंकि इसमे आय कमाने हेतु कोई कृषि कार्य नही किया गया है। यह अन्य साधनो की आय शीर्षक मे करयोग्य होगी।

4. श्रीलंका मे स्थित कृषि भूमि की आय 

उत्तर; श्रीलंका मे स्थित कृषि भूमि की आय कृषि आय नही है क्योंकि भूमि भारत मे स्थित नही है।

5. डेयरी फार्म की आय 

उत्तर; यह भी कृषि आय नही है, क्योंकि इसमे कोई कृषि कार्य नही किया गया है।

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