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3/23/2021

आयकर क्या है? विशेषताएं, उद्देश्य

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aaykar arth visheshta uddeshya;भारत मे आयकर आय पर लगाया जाता है। हर प्राप्ति आयकर के अंतर्गत कर योग्य नही होती है। उदाहरण के लिए हम 2 लाख रूपये मे मकान बेचते है तो इस 2 लाख रूपये की प्राप्ति पर आयकर नही लगेंगा बल्कि मकान बेचने से पूंजी लाभ के रूप मे जो आय होगी उस पर आयकर लगेंगा। इसी तरह मकान संपत्ति मे जो कर योग्य आय होगी उसी पर कर लगेगा। इसी प्रकार कर्मचारियों को वेतन शीर्षक के अंतर्गत जो प्राप्तियां होती है उस पर कर नही लगता है। वेतन शीर्षक से कर योग्य आय की गणना करेंगे और ऐसी आय पर ही कर लगता है। एक चिकित्सक जो रकम मरीजों से प्राप्त करता है, उसमे से हम स्वीकृत व्यय घटाते है तथा जो कर योग्य आय निकालते है उसी पर आयकर देना पड़ता है।

आयकर क्या है? (aaykar ka arth)

जैसा की ऊपर किये गये विवेचन से ही स्पष्ट हो जाता है कि आयकर आय पर लगाया जाता है, न कि प्राप्तियों पर। आयकर दो शब्दों के सहयोग से बना है-- "आय" एवं "कर" अर्थात आय पर लगने वाला एक वार्षिक कर है। यह प्रत्येक वर्ष मे करदाता द्वारा वर्षभर मे कमाई गई कर-योग्य आय पर निर्धारित दरों पर केन्द्रीय सरकार द्वारा लगाया जाता है। कर-योग्य आय  का निर्धारण आयकर अधिनियम के अनुसार किया जाता है। 

आयकर की विशेषताएं (aaykar ki visheshta)

आयकर की मुख्य विशेषताएं या तत्व इस प्रकार है--

1. आयकर एक प्रत्यक्ष कर है

जब जिस व्यक्ति पर कर लगाया जाता है और वही व्यक्ति उसका भार सहन करता है, किसी अन्य व्यक्ति को उस भार को हस्तान्तरित नही किया जा सकता, तो ऐसे कर को प्रत्यक्ष कर कहते है और आयकर ऐसा ही कर है।

2. आयकर एक केन्द्रीय कर है

आयकर की एक विशेषता यह है कि आयकर केन्द्रीय सरकार द्वारा लगाया जाता है।

3. आयकर गत बर्ष की शुद्ध करयोग्य आय पर लगाया जाता है

एक व्यक्ति की एक गत बर्ष की शुद्ध करयोग्य आय की गणना आयकर अधिनियम मे वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत की जाती है।

5. प्रगतिशील कर की दरें 

व्यक्ति की दशा मे सम्पूर्ण आय पर एक जैसी कर की दर लागू नही होती, बल्कि आय के विभिन्न खण्डों पर अलग-अलग दरों से कर की गणना की जाती है। ज्यों-ज्यों आय मे वृद्धि होती है, त्यों-त्यों कर की दरें ऊँची होती जाती है। वर्तमान मे व्यक्तिगत आयकर की न्यूनतम दर 5% एवं अधिकतम दर 30% है। कंपनी एवं साझेदारी फर्मों पर 30% की स्थिति दर से आयकर लगता है।

6. शिक्षा उपकर 

आयकरदाताओं को कुल आय पर देय कर 4% की दर से शिक्षा उपकर भी चुकाना पड़ता है। जैसे कुल आय पर निर्धारित दरों से देय कर 1,00,000 रूपये है तो इस पर 4% की दर से 4,000 रूपये शिक्षा उपकर जोड़कर कुल करदातित्व 104,000 रूपये होगा। इस वर्ष से वार्षिक 50 लाख से 1 करोड़ कमाने वालों को 10% प्रतिशत सरचार्ज एवं एक करोड़ रूपये से अधिक आय कमाने वाले करदाताओं को 15% सरचार्ज देना होगा।

7. आयकर का भुगतान चालू कर-निर्धारण वर्ष मे किया जाता है

आयकर की गणना, भुगतान व वसूली का कार्य प्रत्येक गत वर्ष से संबंधित कर-निर्धारण वर्ष मे किया जाता है। जैसे-- 31 मार्च, 2019 तक की आय पर आयकर का भुगतान संबंधित कर-निर्धारण वर्ष 2019-20 मे किया जायेगा।

8. आयकर की दृष्टि से आय को विभिन्न खण्डों मे बाँटा जाता है

किसी भी करदाता की आय को आयकर लगाने के उद्देश्य से विभिन्न खण्डों (Slabs) मे बाँटा जाता है। आयकर लगाने की इस पद्धति को खण्ड पद्धति (Slab system) कहते है। प्रत्येक खण्ड के लिए कर की दर अलग होती है। इस खण्ड पद्धति का उद्देश्य उच्च आय वर्ग से अधिक कर वसूल करना है।

9. कर-मुक्त सीमा 

यदि आय निर्धारित राशि से अधिक होती है तो आयकर लगता है। कर-मुक्त सीमा तक की आय पर कर नही लगता है। कर-निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए कर-मुक्त सीमा निम्न है--

(अ) व्यक्ति (महिला-पुरूष) 60 वर्ष की आयु तक, हिन्दू अविभाजित परिवार, व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों का समूह 

- 2,50,000 रूपये।

(ब) सीनियर सिटीजन आयकर दाता- आयु 60 से 80 वर्ष तक है- 3,00,000 रूपये।

(स) सुपर सीनियर सिटीजन आयकर दाता- आयु 80 वर्ष से अधिक है- 5,00,000 रूपये।

(द) फर्म, कंपनी, स्थानीय सत्ता-   शुन्य। 

10. प्रशासन 

आयकर लगाने एवं वसूल करने का कार्य आयकर विभाग द्वारा किया जाता है। यह विभाग प्रत्यक्ष करों के केन्द्रीय बोर्ड के नियंत्रण मे कार्य करता है।

11. आय कर की राशि का बँटवारा 

आयकर से एकत्रित राशि वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकारों को प्राप्त होती है। परन्तु निम्न राशियों मे से राज्य सरकारों को हिस्सा नही मिलता--

(अ) कंपनियों से प्राप्त आयकर,

(ब) अधिभार की राशि, 

(स) शिक्षा उपकर।

आयकर लगाने के उद्देश्य (aaykar ke uddeshya)

प्रारंभ मे आयकर लगाने का उद्देश्य उन आर्थिक हानियों की पूर्ति करना था जो सन् 1857 के सैनिक विद्रोह के कारण उत्पन्न हुई थी, किन्तु वर्तमान मे इसे लागू करने के पीछे निम्म उद्देश्यों की पूर्ति होना है--

1. आय का स्थाई साधन 

सरकार को देश एवं जनहित मे अनेक कार्य संपन्न करने होते है, जैसे-- शत्रु देशों से देश की सुरक्षा करना, देश मे कानून व्यवस्था (law and order) बनाये रखना, जनोपयोगी कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए सरकार को निरन्तर धन की आवश्यकता पड़ती है जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा आयकर के द्वारा सरकार को प्राप्त होता है। आय के स्थायी व निरन्तर साधन बनाये रखने के उद्देश्य से सरकार आयकर लगाती है और वसूल करती है।

2. आर्थिक विषमताएं दूर करना 

भारत सरकार का लक्ष्य है-- देश मे समाजवादी समाज की स्थापना करना। यह तभी संभव है, जबकि देश मे अमीरों व गरीबों के बीच की खाई को कम किया जा सके। आयकर के माध्यम से सरकार अपने इस लक्ष्य की पूर्ति मे धीरे-धीरे सफलता प्राप्त कर ही है। इसी उद्देश्य को ध्यान मे रखते हुए सरकार ने आयकर की खण्ड प्रणाली (slab system) को लागू किया है।

3. बचत एवं विनियोगों को प्रोत्साहन 

सरकार द्वारा आयकर अधिनियम मे कुछ इस तरह के प्रावधान किये गये है जो जनता को बचत करने व विनियोगों मे वृद्धि को प्रोत्साहन देते है। उदाहरण के लिए, जो व्यक्ति अपना, अपने जीवन-साथी (spouse) या अपने बच्चों का जीवन बीमा कराता है अथवा कुछ निर्धारित योजनाओं मे रकम जमा करता है, तो उसके द्वारा चुकाई गई रकम को सकल कुल आय मे से धारा 80 (c) के अंतर्गत अधिकतम 1,50,000 रूपये तक कम कर दिया जाता है जिससे उसकी कर-योग्य आय कम हो जाती है और कर-दायित्व भी कम होता है।

4. पूँजी निर्माण 

जब कोई व्यक्ति अपनी बचतों को विनियोगों के रूप मे जमा करता है, तो इससे देश मे पूंजी निर्माण मे वृद्धि होती है। सरकार इस धन को भी महत्वपूर्ण कार्यों मे प्रयोग करती है।

संदर्भ; मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी, लेखक श्री डाॅ. सुरेश चन्द्र जैन प्राध्यापक प. म. ब. गुजराती वाणिज्य महाविद्यालय इन्दौर (म.प्र.)

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