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3/10/2021

जीएसटी उद्देश्य, लाभ/महत्व, दोष

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माल एवं सेवाकर (जी.एस. टी.) की आवश्यकता

1. जीएसटी शब्द का तात्पर्य "माल तथा सेवाओं पर कर" से है और यह ऐसा अप्रत्यक्ष करारोपण है, जो कि माल के साथ-साथ सेवाओं के निर्माण, विक्रय तथा उपभोग पर राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। 

यह भी पढ़ें; माल एवं सेवाकर/जीएसटी क्या है? आधारभूत तत्व/विशेषताएं

2. इसका प्रमख उद्देश्य अधिकांश अप्रत्यक्ष करारोपण को एकमात्र कर के रूप मे शामिल करना है, जिससे बहुसंख्यक करारोपण का प्रतिस्थापन करके, विद्यमान अप्रत्यक्ष कर संरचना की सीमाओं को दूर करके, कर प्रशासन मे दक्षताओं का सृजन किया जा सके।

3. जी. एस. टी. के पक्ष मे एक अन्य कारक है कि इसके द्वारा संपूर्ण पूर्ति श्रंखला मे निर्बाध क्रेडिट को सुविधापूर्ण बनाकर, सभी राज्यों के बीच एक कराधार का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। 

4. अतः संपूर्ण अर्थव्यवस्था मे प्रयुक्त माल एवं सेवाओं एक विस्तृत करारोपण के रूप मे जीएसटी को विकसित किया जा सके। उत्पादन तथा वितरण के सभी स्तरों पर जी. एस. टी. आरोपण द्वारा पूर्ववर्ती स्तरों पर चुकता जीएसटी से "सेट ऑफ" लागू किया जा सके। मूलतः यह अंतिम उपयोग पर करारोपण है।

5. विस्तृत रूप मे कम्प्यूटराइज्ड व्यवस्था के उपयोग द्वारा अप्रत्यक्ष कर का नेटवर्क विस्तृत होगा तथा करवंचना को दूर किया जा सकेगा।

6. संक्षिप्त मे, जीएसटी को माल तथा सेवाओं की पूर्ति पर ऐसे करारोपण के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है, जो माल के विक्रय या सेवा के प्रावधान के प्रत्येक बिन्दु पर आरोपित किया जाता है, जहां माल के विक्रेता तथा सेवाओं के प्रदानकर्ता द्वारा माल तथा सेवाओं के क्रय पर चुकता जी. एस. टी. को इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप मे वसूल किया जा सके।

जीएसटी के अधीन माल के वास्तविक विक्रय की अपेक्षा नही है। पूर्ति के अन्य वैकल्पिक रूप अग्र हो सकते है--

(अ) स्टाॅक अन्तरण

(ब) अन्य स्थानों पर स्वयं उपभोग

(स) प्रेषण या किसी अन्य आधार पर प्रधान से अपने एजेण्ट को पूर्ति

(द) जाॅब वर्क आधार पर पूर्ति (यदि वापसी की शर्त के साथ है, कोई करारोपण नही), 

(ई) दान, सैम्पल्स इत्यादि अन्य किसी रूप मे पूर्ति।

वस्तु एवं सेवाकर (जी.एस.टी.) के उद्देश्य 

जीएसटी के उद्देश्य इस प्रकार है--

1. एक राष्ट्र एक कर,

2. निर्माण के स्थान पर उपभोग आधारित कर व्यवस्था।

3. जीएसटी पंजीयन (Registration), भुगतान तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट की समान प्रक्रिया,

4. कास्केडिंग प्रभाव (कर पर कर) का विलोपन।

5. केन्द्र तथा राज्य स्तर पर अधिकांश अप्रत्यक्ष करों को समाहित करना, 

6. भ्रष्टाचार तथा करवंचना की रोकथाम, 

7. ज्यादा उत्पादकता, 

8. GDP मे करों के भाग का अनुपात बढ़ाकर राजस्व बचत, 

9. अनुपालनओं मे वृद्धि, 

10. आर्थिक विषमताओं मे कमी।

जी. एस. टी. के लाभ/महत्व 

सम्पूर्ण देश हेतु जीएसटी विजयी स्थिति है। उद्दोग, सरकार तथा उपभोक्ताओं सभी के लिए यह एक लाभकारक घटना है। इससे माल तथा सेवाओं की लागत कम होगी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा तथा माल और सेवाओं का विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धी उत्पादन तथा सृजन होगा। जी. एस. टी. का महत्व एवं लाभ इस प्रकार से स्पष्ट किये जा सकते है--

1. संपूर्ण देश एकल बाजार 

पूर्ववर्ती अप्रत्यक्ष करारोपण व्यवस्था हर राज्य स्तर पर विमुक्तियों, प्रक्रियाओं, कर की दरों मे भिन्नता के कारण, सम्पूर्ण देश मे मूल्य विभेद तथा व्यावसायिक मानदण्डों मे भिन्नता व्याप्त रहती थी। कुछ राज्यों मे व्यवसाय केन्द्रीकृत थे, वही अन्य राज्य केवल उपभोक्ता राज्य समझे जाते थे। जीएसटी क्रियान्वयन के बाद संपूर्ण देश मे व्यावसायिक परिचालनों तथा मूल्य व्यवस्था मे एकरूपता से संपूर्ण देश एकल बाजार बन गया है।

2. 'भारत मे निर्माण' विचार को बल 

भारत सरकार द्वारा प्रारंभ 'भारत मे निर्माण' विचार के अभ्युत्थान को प्रशस्त करने मे जी.एस.टी. की महती भूमिका है, क्योंकि एक कर व्यवस्था के अधीन माल तथा सेवाओं का उत्पादन राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो सकेगा।

3. सरकारी राजस्व की अभिवृद्धि 

कर के आधार का विस्तार, सरल करारोपण तथा संग्रहण एवं करदाताओं की अनुपालना मे वृद्धि आदि उत्साहवर्द्धक परिणामों के कारण सरकारी राजस्व मे वृद्धि आशानुकूल होगी।

4. तटस्थता 

जीएसटी लागू होने के बाद पूर्ववती व्यावसायिक प्रक्रियाएं, प्रारूप, संगठनात्मक संरचना, भौगोलिक स्थिति तथा उत्पाद प्रतिस्थापन उसी रूप मे चल रहे है। अतः आर्थिक क्षमताओं मे विकास तथा टिकाऊ दीर्घकालीन आर्थिक विकास संभावना बलवती होती है।

5. भारत से निर्यातों पर शुन्य कर 

चूंकि, भारत से निर्यात, शुन्य दर से करारोपित है, इसलिए अन्तराष्ट्रीय बाजार मे अधिक प्रतिस्पर्धी है। इससे निर्यात, निर्माणी गतिविधियों, रोजगार अवसरों मे वृद्धि के कारण राष्ट्रीय आय मे उत्साहजनक परिणाम अपेक्षित है।

6. काले धन व्यवस्था का उन्मूलन 

काला धन अर्थात् कर वंचित आय, इसके संग्रहण मे प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों तरह की कर वंचना होती है। जीएसटी के अधीन सभी लेनदेन इलेक्ट्रॉनिकली सम्पादित होता है। उसकी डिजिटल रिकार्डिंग तथा माॅनीटरिंग व्यवस्था के कारण करवंचना अति दुरूह हो जाती है। अधिकांश लेनदेन बैंकिंग प्रणाली से होते है। इसलिए कोई बड़ा व्यवसाय रोकड़ी आधार पर चलाना असंभव होता है। जीएसटी लागू होने से पहले, सरकार ने संपूर्ण वित्तीय सूचनाएं, व्यक्तियों के समंक संग्रहण (डाटा बैंक), ऐच्छिक आय घोषिणा, विमुद्रीकरण, KYC अनुपालनओं, आधार लिंकिंग आदि के द्वारा संगृहीत कर ली है, क्योंकि इसके बीना जी. एस. टी. का क्रियान्वयन संभव नही हो पाता।

7. व्यक्तिगत हस्तक्षेप से मुक्ति 

जीएसटी की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन सम्पादित होती है। सभी क्रियाकलाप काॅमन GSTN पोर्टल पर किए जाते है। परिणामस्वरूप न्यूनतम अफसरशाही तथा भ्रष्टाचार की संभावनाएं रहती है। पंजीयन, रिटर्न्स प्रस्तुति, रिफण्ड आदि की सभी प्रक्रियाएं शीघ्र तथा सरल रूप मे संपादित हो जाती है।

8. करदाता के अनुकूल 

करदाता की अनुपालनाओं को सरल बनाने की दिशा मे जीएसटी सराहनीय प्रयास है जिसके अधीन स्वचालित प्रक्रियाओं के माध्यम से जटिलताओं को समाप्त किया गया है। जैसे-- पंजीयन रिटर्न्स, रिफण्ड्स तथा कर भुगतान आदि प्रक्रियाएं।

9. जीएसटी के अन्य लाभ 

(अ) कर की दरों मे कमी,

(ब) अनुपालना लागत मे कमी,

(स) ऐच्छिक अनुपालना विकास, 

(द) भ्रष्टाचार, विवाद तथा नौकरशाही मे कमी, 

(ई) कम सरकारी प्रशासनिक लागतें, 

(फ) मूल से अंतिम उपभोक्ता तक लेनदेन की खोज।

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के दोष 

व्यवसाय के परिचालन तथा उपभोक्ता के हितों के समक्ष कुछ चुनौतियां है, जिनकी वजह से जीएसटी का क्रियान्वयन प्रभावित होता है। जी. एस. टी. के कुछ मुख्य दोष/कमियां/कठिनाइयां/बाधाएं इस प्रकार है--

1. गणना करने संबंधी कठिनाइयां 

इस कर की गणना करना आसन नही है। इनपुट टैक्स क्रेडिट एवं रिवर्स चार्ज के कारण इसमे काफी जटिलता रहती है। पूर्ववर्ती लागत या पूर्व मे चुकाया गया कर ज्ञात करने के लिए काफी रिकार्ड रखने पड़ते है। अधिकांश व्यापारी इसकी व्यवस्था से परेशान है।

2. कर चोरी पर अंकुश की अवधारणा

यह एक गलत धारणा है कि जीएसटी लगने से कर चोरी रूक जायेगी। जीएसटी प्रणाली मे कर चोरी की संभावना वेट एवं उत्पाद शुल्क की तुलना मे अधिक है। यदि पहले चरण मे ही माल बिना बिल के बिकता है तो अंतिम चरण तक वह बिना बिल के बिकता जावेगा और सरकार को किसी भी स्तर पर कोई राजस्व नही मिलेगा।

3. एकल कर नही 

जी. एस. टी. को एकल कर-व्यवस्था के रूप मे संदर्भित किया गया है, लेकिन वास्तव मे यह दोहरी कर प्रणाली है, जहां एक ही लेन-देन मे केन्द्र तथा राज्य द्वारा कर लिया जाता है। जीएसटी एक भ्रामक शब्दवली है,  जहां एकल कर के नाम से दोहरा कर वसूल किया जाता है।

4. विस्तृत कर दरें 

जी. एस. टी. मे कर की कई दरें प्रचलित है, साथ ही केन्द तथा राज्य दोनों करारोपित करते है। CGST तथा SGST का संयुक्त कर भार अधिक कष्ट कारक है। GST की दरें 0%, 3%, 5%, 12%, 18%, तथा 28%, तक पायी जाती है।

5. बहुज्यीय पंजीकरण 

जीएसटी मे प्रत्येक कार्यशील राज्य मे पंजीकरण अपेक्षित है। प्रत्येक व्यावसायिक फर्म को अपने कार्यक्षेत्र मे पृथक GSTN प्राप्त करना जरूरी होता है।

6. पेशेवरों की आवश्यकता 

जीएसटी अनुपालनओं को सरलता से पूरा करने हेतु क्लाउड आधारित तकनीकी आवश्यक हो जाती है। इसमे बीजकों को अपलोड करने के बाद आगामी प्रक्रियाएं स्वयं सम्पादित होती रहेंगी। बीजक संबंधी त्रुटियों मे भी सुधार उसी समय किया जा सकता है, लेकिन नवीन साॅफ्टवेयर, उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

7. कम्प्यूटराइज्ड जी. एस. टी

जीएसटी की सभी अनुपालनाएं, रिटर्न्स प्रस्तुति, कर भुगतान आदि सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी की जाती है। साथ ही, पूर्णतः कम्प्यूटराइज्ड अनुपालना हेतु उनके पास संसाधन नही होते है। संपूर्ण देश के छोटे स्थानों/शहरों मे तकनीकी समस्या का सामना व्यवसायी को करना होता है।

8. परिचालन लागत मे वृद्धि 

भारत मे ज्यादातर व्यवसायी परामर्शी कर विशेषज्ञों की सेवाओं का लाभ नही लेते है तथा परम्परागत रूप से स्वयं कर निर्धारण करके रिटर्न प्रस्तुत करते समय अपेक्षित कर का भुगतान कर देते है। जीएसटी की अनुपालनाओं को पूरा करने के लिए व्यवसायियों को पेशेवर विशेषज्ञों की सेवाएं अपेक्षित होगी, क्योंकि यह व्यवस्था सर्वथा नवीन, जटिल तथा थकाऊ है। अतः पेशेवर सेवाओं की लागतों का भार व्यवसाय को वहन करना होता है।

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